न अगड़ा न पिछड़ा, सिर्फ भारतीय: यूजीसी बहस के बीच धीरेंद्र शास्त्री का संदेश

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न अगड़ा न पिछड़ा, सिर्फ भारतीय: यूजीसी बहस के बीच धीरेंद्र शास्त्री का संदेश

Mumbai (Bhiwandi): देश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के नए नियमों को लेकर मचे बवाल के बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान सामने आया है। उन्होंने सामाजिक समानता, राष्ट्रीय एकता और भारतीय पहचान को लेकर मंच से तीखी और भावनात्मक बात रखी। भिवंडी में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समानता, जातिवाद और देश की एकता जैसे मुद्दों को यूजीसी नियमों पर चल रही बहस के व्यापक सामाजिक संदर्भ से जोड़ते हुए अपनी राय व्यक्त की।

● यूजीसी के नए नियम और विवाद
यूजीसी के हालिया प्रस्तावित नियमों को लेकर देशभर में शैक्षणिक जगत और राजनीति में तीखी बहस चल रही है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि नए नियमों से राज्यों के अधिकार कमजोर होंगे और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर असर पड़ेगा। विशेष रूप से कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया, शैक्षणिक निर्णयों में केंद्र की भूमिका और संस्थानों की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई राज्य सरकारें इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बता रही हैं, वहीं समर्थक इसे एकरूपता और गुणवत्ता सुधार की दिशा में कदम बता रहे हैं।
● धीरेंद्र शास्त्री का मंच से बड़ा सामाजिक संदेश
इसी माहौल के बीच पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मंच से कहा कि देश की असली समस्या नियम या कानून से ज्यादा समाज की मानसिकता है। उन्होंने कहा, भारत में न कोई अगड़ा होना चाहिए और न कोई पिछड़ा। यहां केवल एक ही भाव सर्वोपरि होना चाहिए और वह है भारतीय होने का भाव। जब तक हम जातियों में बंटते रहेंगे, तब तक देश की एकता प्रभावित होती रहेगी।
● एकता बनाम बंटवारे की राजनीति पर प्रहार
धीरेंद्र शास्त्री ने इशारों ही इशारों में सामाजिक और राजनीतिक विभाजन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कानून तभी सफल होते हैं जब समाज उन्हें समान भाव से स्वीकार करे। चाहे शिक्षा व्यवस्था हो या सामाजिक ढांचा, अगर सोच बंटी रहेगी तो नियम भी विवाद का कारण बनेंगे। उन्होंने राष्ट्रीय अखंडता को सर्वोपरि बताते हुए समाज को जाति और वर्ग से ऊपर उठने का आह्वान किया।
● यूसीसी और राष्ट्रीय एकता का जोड़ा मुद्दा
अपने संबोधन में उन्होंने समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि देश को मजबूत करने के लिए एक जैसी सोच और समान अधिकार जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की ताकत विविधता में है, लेकिन यह विविधता विभाजन का कारण नहीं बननी चाहिए।
● धार्मिक मंच से सियासी संकेत
यूजीसी नियमों पर चल रहे विवाद के बीच धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान केवल धार्मिक संदेश तक सीमित नहीं माना जा रहा। जानकारों का मानना है कि यह बयान शिक्षा, कानून और समाज से जुड़े मौजूदा विवादों पर एक वैचारिक टिप्पणी है, जिसमें उन्होंने सीधा किसी नियम का समर्थन या विरोध न करते हुए सामाजिक एकता को समाधान बताया।
● देशव्यापी बहस के बीच बढ़ी चर्चा
यूजीसी नियमों को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस के बीच बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर का यह बयान सोशल और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। समर्थक इसे एकता का संदेश बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे अप्रत्यक्ष राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं।