“आज के बच्चों को केवल पढ़ाना नहीं, जीवन जीने की क्षमता देना जरूरी” : अनुभव साझा कार्यशाला में बोले बीईओ डीएस मौर्य

55

“आज के बच्चों को केवल पढ़ाना नहीं, जीवन जीने की क्षमता देना जरूरी” : अनुभव साझा कार्यशाला में बोले बीईओ डीएस मौर्य

Udaygarh-Alirajpur: वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं रह गया है, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर, निर्णय-क्षम और व्यवहारिक बनाना भी उतना ही आवश्यक है। सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम इसी दिशा में एक प्रभावी पहल है, जो बच्चों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करता है। उपरोक्त वक्तव्य जीवन कौशल कार्यक्रम के अंतर्गत अनुभव साझा कार्यशाला में खंड शिक्षा अधिकारी एवं उत्कृष्ट उमावि प्राचार्य डीएस मौर्य ने व्यक्त किये। बुधवार को शासकीय मॉडल उमावि में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 

● शिक्षा को जीवन से जोड़ने की पहल

खंड शिक्षा अधिकारी डीएस मौर्य ने कहा कि सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का माध्यम है। यह कार्यक्रम आत्मविश्वास, संवाद क्षमता, भावनात्मक संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे गुणों को मजबूत करता है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे इस कार्यक्रम को नियमित शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाकर बच्चों के व्यवहार में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाएं।

● सोच और व्यवहार में परिवर्तन

कार्यशाला में सामने आया कि सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम से बच्चों की सोच और व्यवहार में स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिल रहा है। बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है, वे समूह में बेहतर ढंग से कार्य कर पा रहे हैं और अपनी बात प्रभावी तरीके से रख पा रहे हैं। समस्या समाधान, निर्णय निर्माण और तनाव प्रबंधन जैसे कौशल बच्चों के दैनिक जीवन में परिलक्षित हो रहे हैं।

●अनुभव साझा कार्यशाला

आयोजित अनुभव साझा कार्यशाला में विकासखंड की सभी माध्यमिक शालाओं से एक-एक शिक्षक, जन शिक्षक और मास्टर ट्रेनर शामिल हुए। जिन्होंने वर्ष भर संचालित गतिविधियों, IMG 20260128 WA0150 scaledनवाचारों और उनके परिणामों पर अपने अनुभव साझा किए।

● मेरी सीख की कॉपी और मेरी सीख का कोना

कार्यशाला में मेरी सीख की कॉपी, मेरी सीख का कोना तथा अन्य गतिविधियों के चार्ट और पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से कार्यक्रम की निरंतर गतिविधियों को प्रस्तुत किया गया। इन प्रयासों से बच्चों में आत्ममूल्यांकन, अभिव्यक्ति और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिला है।

● बच्चों की प्रस्तुति : बदलाव की जीवंत तस्वीर

कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि बच्चों ने मंच पर अपने कौशल का उपयोग करते हुए सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम से अपने भीतर आए बदलाव को साझा किया। बच्चों ने बताया कि वे अब अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी भावनाएं और विचार व्यक्त कर पा रहे हैं।

● शिक्षकों और शैक्षणिक नेतृत्व की सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम में खंड शिक्षा अधिकारी डीएस मौर्य, खंड स्रोत समन्वयक रामसिंह सोलंकी, मंडल संयोजक ज्ञान सिंह चौहान, जन शिक्षक आशीष राठौर, इंतजार खान, कन्या शिक्षा परिषद प्राचार्य दिलीपसिंह चौहान सहित कई शिक्षकों ने सहभागिता की। विकासखंड के मास्टर ट्रेनर और सभी माध्यमिक शालाओं के प्रतिनिधि शिक्षक भी उपस्थित रहे।

● प्रबंधन स्तर की सहभागिता

सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम के संभागीय प्रबंधक नगुलाल हाडा, जिला प्रबंधक श्रुति परदेशी तथा विभिन्न विकासखंडों के ब्लॉक मैनेजर- बहादरसिंह अलीराजपुर-सोंडवा, दीपक कंगाली कट्ठीवाड़ा- चंद्रशेखर आजाद नगर और पूजा मालवीय उदयगढ़-जोबट ने कार्यक्रम की प्रगति और प्रभाव पर अपने विचार रखे। माध्यमिक शाला थांदला से पायल वास्केला और बालक माध्यमिक शाला उदयगढ़ से मांगीलाल चौहान ने विद्यालय स्तर के अनुभव साझा किए।

 

● श्रेष्ठ कार्य के लिए सम्मान

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य के लिए पांच शिक्षकों, दो जन शिक्षकों और चार मास्टर ट्रेनरों को खंड शिक्षा अधिकारी ने प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

● मकसद में सफलता की ओर

यह कार्यशाला इस निष्कर्ष के साथ संपन्न हुई कि सक्षम जीवन कौशल कार्यक्रम बच्चों के जीवन में व्यवहारिक शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सकारात्मक सोच को मजबूत करने की दिशा में एक प्रभावी और आवश्यक पहल है। जी सोच और उद्देश्य के साथ यह कार्यक्रम शुरू किया गया था वह सही दिशा में सफलता की ओर अग्रसर है।

कार्यक्रम का संचालन जन शिक्षक आशीष राठौर ने किया। आभार जोबट-उदयगढ़ ब्लॉक प्रबंधक पूजा मालवीय ने व्यक्त किया।