
Ajit Pawar’s plane crash: एक हादसा, दो कहानियां, कई अनुत्तरित सवाल
▪️राजेश जयंत
Mumbai: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे ने देश को झकझोर दिया है। यह सिर्फ एक वीआईपी फ्लाइट क्रैश नहीं, बल्कि एक ऐसी घटना है जिसमें मानवीय त्रासदी, प्रशासनिक चूक और नागरिक उड्डयन व्यवस्था पर गंभीर सवाल एक साथ खड़े हो गए हैं। इस हादसे में जहां 25 वर्षीय पायलट शांभवी पाठक की जान गई, वहीं विमान की कमान संभाल रहे कैप्टन सुमित कपूर का पुराना रिकॉर्ड जांच के घेरे में आ गया है।

▪️कौन थीं शांभवी पाठक और क्यों उनकी कहानी महत्वपूर्ण है
शांभवी पाठक ग्वालियर की रहने वाली थीं। उनका बचपन एयरफोर्स के माहौल में बीता। पिता स्क्वाड्रन लीडर रहे और मिराज फाइटर जेट उड़ाते थे। दादा भी एयरफोर्स में ग्राउंड स्टाफ थे। शांभवी को घर में प्यार से ‘चीनी’ कहा जाता था। हादसे वाले दिन सुबह उन्होंने अपनी दादी को सिर्फ एक साधारण सा संदेश भेजा था, “Hi Dadda… Good Morning।” किसी को अंदाजा नहीं था कि यह आखिरी संवाद होगा।यह कहानी इसलिए अहम है क्योंकि शांभवी सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि उस नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं जो पेशेवर जिम्मेदारी के साथ आसमान में उड़ान भरती है। लेकिन इस हादसे के बाद सवाल यह है कि क्या सिस्टम ने उसे सुरक्षित वातावरण दिया था।

▪️दूसरा पहलू: पायलट का अतीत और सिस्टम की चूक
हादसे के बाद सामने आई दूसरी रिपोर्ट ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। विमान के कैप्टन सुमित कपूर पहले दो बार उड़ान से पहले शराब परीक्षण में फेल हो चुके थे। वर्ष 2017 में डीजीसीए ने उन्हें तीन साल के लिए सस्पेंड किया था। इसके बावजूद सस्पेंशन अवधि पूरी होने के बाद वह प्राइवेट ऑपरेटर के जरिए वीआईपी और चार्टर्ड फ्लाइट्स उड़ाते रहे।
यह सवाल अब केंद्रीय है कि जिस पायलट का रिकॉर्ड विवादित रहा हो, उसे इतने संवेदनशील वीआईपी मिशन की जिम्मेदारी कैसे दी गई। क्या प्राइवेट ऑपरेटरों पर निगरानी ढीली है। क्या डीजीसीए के नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

▪️हादसे के दिन क्या हुआ और क्यों सवाल उठे
28 जनवरी 2026 की सुबह मुंबई से बारामती के लिए विमान ने उड़ान भरी। लैंडिंग के दौरान रनवे स्पष्ट नहीं दिखा। पहली कोशिश असफल रही। दूसरी कोशिश में मात्र छह सेकंड के भीतर विमान क्रैश हो गया। सरकार की ओर से कोहरे को प्राथमिक कारण बताया गया, लेकिन तकनीकी, मानवीय और प्रक्रियागत पहलुओं की जांच अभी जारी है।
▪️यह सिर्फ हादसा नहीं, चेतावनी है
यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे एविएशन सिस्टम के लिए चेतावनी है। शांभवी पाठक की कहानी मानवीय संवेदना जगाती है, जबकि कैप्टन सुमित कपूर का रिकॉर्ड सिस्टम की ढिलाई को उजागर करता है। इन दोनों कहानियों के बीच असली सवाल यह है कि क्या भारत की चार्टर्ड और वीआईपी उड़ानों की निगरानी पर्याप्त है या नहीं।
जब तक इस हादसे से सबक लेकर जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति का खतरा बना रहेगा।





