सिंहस्थ कुंभ और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अब थ्री डी प्रिंटिंग तकनीक से बनेंगे भवन

41

सिंहस्थ कुंभ और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अब थ्री डी प्रिंटिंग तकनीक से बनेंगे भवन

भोपाल : मध्यप्रदेश में वर्ष 2028 में होंने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले और आपदा प्रभावित क्षेत्रों तथा स्कूल और अस्पतालों के निर्माण में लोक निर्माण विभाग थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करेगा। इससे जहां मानवीय त्रुटियों की संभावनाएं कम होंगी वहीं गुणवत्तापूर्ण निर्माण, सटीकता और बेहतर स्ट्रक्चरल स्ट्रेंथ सुनिश्चित हो सकेगी।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक सिबी चक्रवर्ती, प्रमुख अभियंता भवन लोक निर्माण सहित अन्य अधिकारियों को निर्देशित किया है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास में जिस तरह थ्री डी प्रिंटिंग तकनीक से बेहतर गुणवत्तापूर्ण निर्माण किए जा रहे है उसी तरह मध्यप्रदेश में भी इसी तकनीक का उपयोग कर भवन और अन्य निर्माण किए जाए। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह लोक निर्माण विभाग के अफसरों के साथ हाल ही में आईआईटी मद्रास में भवन निर्माण में उपयोग की जा रही थ्री डी प्रिंटिंग तकनीक का अवलोकन करके आए है। थ्री डी तकनीक से भवन निर्माण में न सिर्फ तेजी आएगी बल्कि गुणवत्ता भी बेहतर होगी। मंत्री ने अफसरों को निर्देशित किया है कि सिंहस्थ कुंभ मेले में होंने वाले निर्माण में इस तकनीक का उपयोग किया जाए। सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में जहां परिस्थितियों के अनुरुप तीव्र गति से भवन निर्माण की जरुरत होती है वहां थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक बहुत उपयोगी साबित होगी।

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा है कि गुजरात, तेलंगाना में भी जिन नवीन निर्माण तकनीकों और आधुनिक कार्यप्रणालियों का अध्ययन किया गया है उन्हें मध्यप्रदेश में लागू किया जाए। थ्री डी प्रिंटिंग जिसे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग भी कहा जाता है यह पारंपरिक निर्माण से अलग है। इस पद्धति में पहले कम्प्यूटर पर संबंधित भवन का डिजिटल डिजाइन तैयार किया जाए फिर विशेष मशीनों से कांक्रीट और अन्य निर्माण सामग्री को परत दर परत प्रिंट कर संरचना का निर्माण किया जाता है। इस प्रकिया में ईट शटरिंग और पारंपरिक ढलाई की आवश्यका अत्यंत कम हो जाएगी। इससे निर्माण तेज गति से सटीक और नियंत्रित तरीके से हो सकता है।

लोक निर्माण मंत्री का कहना है कि जहां पारंपरिक निर्माण में महीनों का समय लग जाता है वहीं थ्री डी तकनीक से नए भवन कुछ ही दिनों में तैयार हो जाएंगे। मौसम, श्रमिक उपलब्धता और शटरिंग जैसी बाधाओं का भी इस तकनीक पर सीमित प्रभाव पड़ेगा। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन आवास इससे त्वरित तैयार हो सकेंगे। सकूल और अस्पताल में भी यह तकनीक उपयोगी होगी। इस तकनीक को पहले पायलट प्रोजेक्ट इंजीनियरों की विशेष ट्रेनिंग और स्टार्ट अप के साथ समन्वय करके अपनाया जाएगा।

मंत्री ने सड़क सुरक्षा से जुड़ी नवीन तकनीकों तथा डेटा ड्रिवन हाइपर लोकल आधारित कार्य प्रणालियों का उपयोग भी मध्यप्रदेश में करने के निर्देश दिए है।