संविदा कर्मचारी हनुमान…तो स्थायी कर्मचारियों को भी चाहिए मान…

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संविदा कर्मचारी हनुमान…तो स्थायी कर्मचारियों को भी चाहिए मान…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल में संविदा कर्मचारियों के महासम्मेलन में उन पर स्नेह की बरसात कर डाली। संविदा कर्मचारियों को जो भी दिया जा सकता था वह दिल खोलकर दे दिया। मानो यही कह रहे हों कि मोहन काल में सब लोग आनंद लो। जो-जो मैं दे सकता हूं सब दे दूंगा, चिंता करने की कोई बात नहीं है। तो सेवा के मामले में भी उन्होंने संविदा कर्मचारियों की तुलना हनुमान से कर यह जता दिया कि सरकार में उनकी वास्तव में कितनी अहमियत है। संविदा कर्मचारियों के महासम्मेलन में मोहन का यह स्नेहिल रूप देखकर स्थायी कर्मचारी मन ही मन यह जरूर सोच रहे होंगे कि मुख्यमंत्री जी यदि संविदा कर्मचारी हनुमान हैं तो स्थायी कर्मचारियों के मान का ध्यान भी आपको रखना होगा। कम से कम सही समय से वरिष्ठता के अनुसार स्थायी कर्मचारी भी पदोन्नति के हकदार हैं। पदोन्नति में आरक्षण का कांटा निकालिए और स्थायी कर्मचारियों को भी मान देकर उन पर भी स्नेह की बरसात कीजिए। पिछले बारह साल में हजारों कर्मचारी अधिकारी इसी संताप में रिटायर हो गए कि आखिर उनका कसूर क्या था जो उनसे पदोन्नति का हक छीना गया। पर अब मोहन के काल में लाखों कर्मचारी अधिकारी यह उम्मीद लगाए हैं कि उन पर भी प्रेम की बरसात होगी और उन्हें उनका हक मिलेगा।

भोपाल में संविदा कर्मचारियों के महासम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2023 की संविदा नीति लागू करने की घोषणा की। प्रदेश के सभी विभागों में डेढ़ लाख से अधिक संविदा कर्मचारी हैं। लंबे समय से ये विभिन्न मांगों को लेकर अलग-अलग प्रदर्शन कर रहे हैं। पहली बार भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले सभी एकजुट हुए और भोपाल में महासम्मेलन किया। इन्हें संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि संविदाकर्मियों के श्रम और विश्वास पर ही राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में सफल हो रही है। संविदाकर्मियों की भूमिका हनुमान जी के समान है। आपके श्रम और साझेदारी ने ही शासन-प्रशासन की व्यवस्था बनाई रखी है। संविदाकर्मी अनुबंध से अवश्य आते हैं, किन्तु व्यवस्थाओं के प्रबंधन में विराट भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य सेवाएं हों या शिक्षा, पंचायत, नगरीय निकाय या तकनीकी सेवाएं मैदानी स्तर पर सर्वे, मॉनीटरिंग और क्रियान्वयन में संविदा भाई-बहन हर जगह व्यवस्था के भरोसेमंद स्तंभ बनकर खड़े हैं। संविदाकर्मियों ने जिस निष्ठा से काम किया है, उसने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा पद से बड़ी है। संविदाकर्मी राज्य सरकार का कार्यबल ही नहीं, हमारा आत्मबल भी हैं। भारतीय मजदूर संघ के ‘देश के हित में करेंगे काम’ के वाक्य को हमारे साथी चरितार्थ कर रहे हैं। ऐसा प्रेम अनुभव कर और अपनी सेवाओं का आकलन सुनकर डॉ मोहन यादव का यह रूप निश्चित तौर से संविदा कर्मियों के मन में बस गया होगा। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के स्थान पर कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता दिए जाने की घोषणा नहीं हुई, जिसने कर्मचारियों को थोड़ा निराश भी किया लेकिन संतोष इस बात का रहा कि मुख्यमंत्री ने 2023 की संविदा नीति के सभी प्रविधानों को सभी विभाग, निगम, मंडलों में लागू करने की घोषणा की। इससे कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा, ग्रेच्युटी, अनुकंपा नियुक्ति, अंशदायी पेंशन योजना सहित अन्य लाभ मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने जैसे ही कहा कि जिन विभागों में समकक्षता का निर्धारण नहीं हुआ है, वह कराया जाएगा, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और नारों से गूंज उठा। इसके लिए कमेटी बनाई जाएगी।

सीएम ने कहा कि हमने दस वर्षों से अधिक अनुभवी संविदा कर्मचारियों को नियमित पदों के विरुद्ध 50 प्रतिशत संविलियन प्रारंभ कर दिया है, इसे और आगे बढ़ाने पर काम करने वाले हैं। संविदा नीति 2023 के प्रविधानों को सब दूर समान रूप से लागू कराया जाएगा। इसमें अंशदायी पेंशन योजना, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा, अनुकंपा नियुक्ति जैसे प्रविधान हैं। इसी तरह संविदा कर्मियों को सीधे बर्खास्त नहीं किया जा सकेगा। सीसी रूल्स के तहत आरोप पत्र देकर पूरी प्रक्रिया करनी होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि वित्त, सामान्य प्रशासन और भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। इसमें संविदा कर्मचारियों से जुड़ी सभी समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा होगी और समाधान खोजे जाएंगे। यदि कहीं कोई कठिनाई आएगी तो मैं बैठा हूं। जो मिलना चाहिए, वह सब मिलेगा। सरकार संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा और भविष्य से जुड़े विषयों पर गंभीरता से साथ है। हमारी पहले की सरकारों ने इस विश्वास को कायम रखा है और हम भी सदैव साथ रहेंगे

अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के तीसरे साल में पूरे फॉर्म में आ चुके हैं। संविदा कर्मियों का महासम्मेलन हो या मध्य प्रदेश को लेकर कोई दूसरा विषय, डॉ. मोहन यादव समस्याओं के समाधान और सभी का दिल जीतने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। और फिर बात कर्मचारियों पर ही आ जाती है कि संविदा कर्मचारी हनुमान तो स्थायी कर्मचारियों के मन में भी मोहन के काल में मान पाने की उम्मीद जग ही गई होगी…और निश्चित तौर से यह बात डॉ. मोहन यादव के मन में भी होगी…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।