रविवारीय गपशप: दंड प्रावधानों में विसंगतियां 

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रविवारीय गपशप: दंड प्रावधानों में विसंगतियां 

आनंद शर्मा

सदियों से दण्ड के प्रावधानों पर बहस जारी है कि वे सुधारात्मक होने चाहिये या निवारात्मक । हमारे देश में इसके मिले जुले रूप हैं , अपराध जघन्य है तो निवारक और अपराध छोटा है तो सुधारात्मक । जहाँ तक सिविल मामलों का सवाल है वहाँ अर्थदण्ड का उद्देश्य सचेत करने का रहता है पर कुछ चालाक अपकर्ता क़ानून की पेचीदगी का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करने लगते हैं , लिहाजा अर्थदण्ड उनके लिए महज खानापूर्ति का विषय रह जाता हैं।

कुछ बरस पूर्व जब मैं विदिशा का कलेक्टर हुआ करता था , और पड़ोस के जिले रायसेन में मेरे बैचमेट स्वर्गीय जनक जैन कलेक्टर हुआ करते थे । एक दिन मेरी पत्नी के पास ग्वालियर से मेरे किसी परिचित की पत्नी ने फ़ोन किया और कहा “भाभी जी मेरे देवर का मुरम का डम्पर रायसेन जिले में पकड़ा गया है , यदि भैया सिफारिश कर दें , तो बड़ी मेहरबानी होगी । मेरी आदत से वाक़िफ़ धर्मपत्नी ने उनसे कहा कि नियम के विरुद्ध पकड़े गए अवैध खनन पर तो ये सिफारिश न करेंगे , तो ग्वालियर वाली भाभी बोलीं , “अरे देवर जी केवल यह कह रहे हैं कि जो भी जुर्माना हो वो भरने को तैयार हैं , बस तुरंत फाइन कर दें ताकि डंपर के खड़े रहने से नुकसान न हो ।” मुझे जब मेरी श्रीमती जी ने ये वाक़या सुनाया तो मुझे लगा दण्ड के प्रावधान तो अवैध परिवहन कर्ता के लिए फायदे के सौदे हो रहे हैं और शायद इन्हीं कारणों से तत्काल बाद ही अवैध परिवहन में वाहन राजसात करने के प्रावधान जोड़े गए ।

इससे जुड़ी एक बड़ी पुरानी घटना याद आ रही है , तब मैं राजनांदगांव जिले के खैरागढ़ अनुविभाग का एसडीएम हुआ करता था । उनदिनों छुईखदान और गण्डई तहसीलें खैरागढ़ सबडिवीजन में आतीं थीं । भू राजस्व संहिता में यद्यपि वृक्षों की बिना अनुमति कटाई के लिए जुर्माने के प्रावधान किए गए थे , पर अक्सर अवैध वृक्ष कटाई वाले ठेकेदार भोलेभाले भूमिस्वामियों को बहका कर औने पौने दाम में उनकी भूमिस्वामी अधिकार की भूमियों से बड़ी मात्रा में वृक्ष काट कर ले जाया करते थे ।

एक दिन ऐसी ही घटना की सूचना मुझे मिली कि छुईखदान और गण्डई की सीमा के मध्य बड़ी मात्रा में वृक्षों की कटाई हुई है । मैं राजस्व के अपने अमले के साथ स्थल पर पहुँचा तो मौके पर कोई नहीं था , बस कटे हुए वृक्ष पड़े थे । दिन भर जाँच के बाद रिपोर्ट बनी तो दो हज़ार से ज़्यादा अनेक प्रजाति के झाड़ काट डाले गए थे जिनमें इमारती लकड़ियों के वृक्ष भी थे । मैंने रेस्ट हाउस से कलेक्टर श्री प्रवेश शर्मा को फ़ोन लगा कर वस्तुस्थिति बताई , तो वो कहने लगे ये तो बहुत बड़ा षड्यंत्र है । आप अवैध वृक्ष कटाई का केस बनाओगे , वे ख़ुशी ख़ुशी जुर्माना भर कर पिट पास कटा लेंगे और पर्यावरण के नुक़सान की चिंता किए बिना ये काम आगे भी करते रहेंगे । मैं सोचने लगा तभी उन्होंने कहा “ तुम ऐसा करों प्रत्येक वृक्ष की कटाई का अलग अलग केस बनाओ और हरेक पर अलग अलग जुर्माना लगाओ , देखते हैं ये कैसे लकड़ी उठाते हैं । हम लोग एक सप्ताह तक बैठ कर केस बनाते रहे और दो हज़ार से ज़्यादा के प्रकरणों में नोटिस जारी कर सुनवाई आरम्भ कर दी । माह भर लगा होगा , इस सस्ते जमाने में जब हमारी तनख़्वाह ही एक हज़ार रुपये हुआ करती थी , दस लाख रुपयों से ऊपर का जुर्माना लगा । अवैध वृक्ष कटाई वाले ठेकेदारों के लिए ये घाटे का सौदा था और जमीन के मालिक तो अपना मोल पहले ही पा चुके थे सो किसी ने जुर्माना नहीं भरा , और मेरी खैरागढ़ की पोस्टिंग रहते वे लकड़ियाँ वहीं की वहीं पड़ी रहीं ।