
Kissa-A-IAS: Nisha Grewal: पिता बिजली विभाग में, दादाजी के गाइडेंस में 23 साल की उम्र में बेटी ऐसे बनी IAS
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। हर साल लाखों युवा इस परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन सफलता कुछ हजार को ही मिल पाती है और टॉप रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवार तो गिने-चुने होते हैं। ऐसे में जब कोई युवा पहले ही प्रयास में यह परीक्षा पास कर ले, वह भी बेहद कम उम्र में, तो उसकी कहानी लाखों सपने देखने वालों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। हरियाणा के भिवानी जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंची निशा ग्रेवाल की कहानी भी ऐसी ही है।

*▪️साधारण परिवार, असाधारण सपना*
निशा ग्रेवाल का जन्म एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता राज्य के बिजली विभाग में कार्यरत हैं और मां गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण थी, लेकिन शिक्षा को लेकर सोच स्पष्ट और मजबूत थी। घर में न तो पहले कभी किसी ने सिविल सेवा की परीक्षा दी थी और न ही प्रशासनिक सेवा से कोई सीधा संबंध रहा, लेकिन निशा के दादा जी ने उन्हें शुरू से अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास का महत्व समझाया। परिवार ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी और संसाधनों की कमी को कभी बाधा नहीं बनने दिया।

*▪️पढ़ाई में शुरू से गंभीर*
निशा शुरू से ही पढ़ाई में गंभीर और लक्ष्य के प्रति सजग रहीं। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने यह तय कर लिया था कि उन्हें ऐसी सेवा में जाना है, जहां वे समाज और व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकें। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में बीए ऑनर्स किया। यह विषय आगे चलकर उनके UPSC की तैयारी में बेहद उपयोगी साबित हुआ।

*▪️UPSC का फैसला और पहली ही कोशिश में सफलता*
कॉलेज के दिनों में ही निशा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला कर लिया था। यह निर्णय आसान नहीं था, क्योंकि परीक्षा की कठिनाई, लंबा सिलेबस और असफलता का डर हर उम्मीदवार को प्रभावित करता है। इसके बावजूद उन्होंने बिना किसी अनावश्यक दबाव के, स्पष्ट रणनीति के साथ तैयारी शुरू की। उन्होंने कोचिंग पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय स्व-अध्ययन को आधार बनाया और अपनी कमजोरियों पर लगातार काम किया।
पहले ही प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 51 हासिल कर ली। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 23 वर्ष थी। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई।

*▪️बैच, चयन और प्रशासनिक जिम्मेदारी*
निशा ग्रेवाल ने 2020 में 51वीं रैंक के साथ यूपीएससी क्लियर किया और IAS बनी। मसूरी में ट्रेनिंग के बाद उन्हें 2021 बैच मिला और बिहार कैडर आवंटित हुआ। बाद में उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला।
चयन के बाद उन्होंने मसूरी में प्रशासनिक प्रशिक्षण पूर्ण किया।

*▪️तैयारी की रणनीति*
निशा ग्रेवाल मानती हैं कि UPSC की तैयारी में सबसे अहम भूमिका निरंतरता और सही दिशा निभाती है। उन्होंने अपनी तैयारी की शुरुआत NCERT की किताबों से की, ताकि बुनियादी अवधारणाएं मजबूत हो सकें। इसके बाद उन्होंने सीमित लेकिन भरोसेमंद पुस्तकों का चयन किया। करंट अफेयर्स के लिए उन्होंने सरकारी दस्तावेजों, विश्वसनीय समाचार स्रोतों और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री का संतुलित उपयोग किया।
वह रोजाना पढ़ाई के घंटों को गिनने के बजाय इस बात पर ध्यान देती थीं कि उन्होंने क्या समझा और कितना सीखा। उनका मानना है कि गुणवत्ता, मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण होती है।

*▪️असफलता के डर से नहीं रुकीं*
निशा के अनुसार, UPSC की तैयारी में सबसे बड़ा नुकसान डर और दूसरों से तुलना करने से होता है। उन्होंने खुद को इस दबाव से दूर रखा और अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहीं। मॉक टेस्ट में अपेक्षा से कम अंक आने पर उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी कमियों की पहचान की और रणनीति में सुधार किया।
*▪️प्रशासनिक सेवा में प्रारंभिक कार्य और प्राथमिकताएं*
प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद निशा ग्रेवाल का कार्यकाल अभी प्रारंभिक चरण में है।2021 बैच की आईएएस अधिकारी ग्रेवाल को शुरू में बिहार कैडर आवंटित किया गया था, जहां उन्होंने मोतिहारी में उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के रूप में 15 महीने तक सेवा की। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार द्वारा उनका तबादला उत्तर प्रदेश कैडर में कर दिया गया।
अब वे मथुरा की सदर तहसील में अपनी नई भूमिका संभाल रही है, जो जिले का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रभाग है।
प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, समयबद्ध निर्णय और जनसरोकारों को प्राथमिकता देना उनकी कार्यशैली का हिस्सा माना जा रहा है। अनुभव के इस शुरुआती दौर में उनका फोकस व्यवस्था को समझने और उसे बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
*▪️युवाओं के लिए संदेश*
निशा ग्रेवाल का मानना है कि सिविल सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी है। वह युवाओं को सलाह देती हैं कि UPSC की तैयारी तभी करें जब वे इसके उद्देश्य और सामाजिक दायित्व को समझें। उनके अनुसार, स्पष्ट लक्ष्य, ईमानदार मेहनत और धैर्य किसी भी उम्मीदवार को सफलता के करीब ले जाता है।
*▪️एक कहानी, लाखों सपनों की प्रेरणा*
एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का निशा ग्रेवाल का सफर यह साबित करता है कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में अंतिम बाधा नहीं होते। सही सोच, परिवार का सहयोग और निरंतर प्रयास किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकते हैं। उनकी कहानी आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो UPSC को सिर्फ सपना नहीं, बल्कि अपना लक्ष्य मानते हैं।





