
बेवकूफ भी बेहतरीन उस्ताद हो सकते है!
मुकेश नेमा
हमेशा आलिमों से ही नहीं मिलते सबक सारे !
कभी कुछ जाहिलों से भी मग़ज़मारी जरूरी है !
कितनी बढ़िया बात बता गए हैं राहत इंदौरी। चतुर लोग की काम की बात बता सकें ये जरूरी नही। बहुत बार बेवकूफ ,उजड्ड ,जाहिल मूर्ख बंदे ऐसे ऐसे सबक दे जाते है हमें जो जिंदगी बना दे। बेवकूफ भी बेहतरीन उस्ताद हो सकते है ,बशर्ते आपको धीरज रखना आता हो।
बेवकूफों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। बेवकूफों से बेवकूफ बनना सीखना चाहिए हमे।आइए ऐसा कहने की वजहें गिनवाते है आपको। बेवकूफी मे ,बेवकूफ होने मे ,बेवकूफ बन जाने में बड़े मजे है ,उजड्ड होना राजा होने जैसा है। यह ठलुआई करने का ,पाँव फैला कर झपकी लेने का ,मौज करने का ,राज करने का लायसेंस है।
सीखना ही है कुछ तो निखालिस बेवकूफों को ढूँढें। ये प्राकृतिक हैं। बने बनाए पैदा हुए हैं ,बेवकूफों की सबसे बेहतरीन कैटेगरी यही है,जन्मजात उजड्ड कभी भी तारीफो ,पैसे और इज्जत की परवाह नहीं करता ,और कोई बात मन से नहीं लगाता वो इसलिये दुख भी कम ही होता है उसे ,और आज के जमाने मे बिना दुखी हुए पैदा होना और ऐसे ही मर जाने से बेहतर और क्या हो सकता है।
दरअसल आप बने बनाए बेवकूफ पैदा हुए या आपने इसे अपने ऊपर ओढ़ लिया हो। इसके फ़ायदे अनगिनत हैं, जैसे इस कहावत को ही लें कि बेवक़ूफ़ों पर चतुर राज करते है ,यह तो सिरे से गलत है।दरअसल यह कहावत सर के बल खड़े कर देने लायक़ है।राज करने के लिये चतुर होने होने के बजाय किसी करोड़पति की ,किसी बड़े नेता की औलाद होना ही काफ़ी होता है। आप दुनिया की किसी भी फ़ील्ड का मुआयना करके देख ले।आपको उसके टॉप पर रखी लेदर चेयर पर कोई बेवकूफ उजड्ड ही क़ाबिज़ मिलेगा ये मेरी ग्यांरटी है। लॉटरी यह देखकर नही खुलती कभी कि आपने ग्रेजुएशन मे कितने परसेंट हासिल किये है। लक्ष्मी हमेशा से उल्लुओं पर मेहरबान होती आई है। कुल मिलाकर इस मामले मे बेवकूफ होना ज्यादा फ़ायदेमंद है।
एक और कहावत पर आईये अब।इस कहावत से मै इत्तफ़ाक़ रखता हूँ।हूरों पर तो कॉपीराइट होता है लंगूरों का। यदि दुनिया आपको चतुर मानती है तो पूरा खटका है कि आपके हिस्से मे कोई सूखी सी ,होनहार चश्मेवाली ही आये और वो जिंदगी भर आपको यही बताती रहे कि आपको क्या करना है और क्या नही करना चाहिए था।
अब चतुर होने के नुक़सान पर भी निगाह डाल लीजिये।हमेशा जयजयकार के लिये मरा जाता आदमी होता है वो।और इसकी वजह से हमेशा काम के बोझ से गधो की लदे हु्ये चतुर कभी जिन्दगी के मजे लूट ही नही पाता। चतुर लोगों की पूरी जिंदगी बेवकूफो की सवारी हो जाने मे ,उनकी चाकरी करने में ही बीतती है।चतुर आदमी सुबह से शाम इसी टेंशन मे रहता है कोई बेवक़ूफ़ ना बना जाये उसे जबकि बेवक़ूफ़ निश्चिंत बना रहता है इस मामले मे।चतुर और चतुर होने की जद्दोजहद मे लगा रहता है बेवक़ूफ़ को इस मामले मे कभी ख़ून नही जलाता।
उजड्ड होना ,बेवकूफी से बडी डिग्री है। उजड्ड होना और बढ़िया बात। उजड्ड होने के लिये गुर्दा चाहिए। उजड्ड होना साहसी होना है। महात्मा बुद्ध ज्ञान को दुख की वजह कहा है। चतुराई डरपोक बनाती है आपको।फ़र्ज़ कीजिये कोई बदमाश घर आकर ललकार रहा है आपको।आप इंडियन पैनल कोड पढ़ने लगेंगे।पर आपकी जगह कोई उजड्ड होता तो वो ऐसे हालात मे क्या करता ? वो डंडा निकालता और उस बदमाश को उसके घर तक खदेड़ कर आता। मुसीबत हो तो उजड्ड से मदद माँगना हमेशा ठीक होता है।वो मौका आने पर दोस्त की ठोक कर मदद करते हैं और बहुत बार सामने वाले को इतना ठोक देते है कि वो ताजिंदगी आपके आसपास फटकने की भी नही सोचता। चतुर आदमी ,सलीके का दामन पकड़े रहता है। किसी भी काम को करने के सौ बार सोचता है। बहुत सारे किंतु परंतु रास्ता रोक लेते है उसका।वह वक्त जाया करता है इसमे और जब तक वह किसी नतीजे पर पहुँचे कोई उजड्ड क़िला फ़तह कर उस पर अपना झंडा फहरा चुका होता है।
उजड्ड आदमी ,दुनिया जहान के ऐसे किसी मुद्दे पर दिमाग़ नही खपाता ,जिससे उसका सीधे कोई लेना देना नहीं।वह दुनिया के किसी फटे में टांग नही डालता। राज करने वालों से ,उसके हिसाब से वोट ना देने वालों से ,अपने जैसा ना सोचने वालों से ,बीबी से ,बच्चों से नाराज नहीं होता। वो हर जगह बहुमत में होता है ,हर बार जीतता है।और अकेले में भी खुश रहता है।
दुनिया उजड्ड लोगों से कोई उम्मीद नही लगाती। जाहिल आदमी पूरी जिंदगी वज़नदार उम्मीदों से दबा नही रहता। उसे कोई ज़िम्मेदारी नही ओढ़नी होती। कोई गंभीर काम नही करना होता। काम न करने की वजह से वो कम ग़लतियाँ करता है ,कोई उसे डाँटने की हिम्मत नही करता। वो डिप्रेशन और ब्लडप्रेशर की गोलियाँ नही खाता। अपनी क़ाबिलियत के हिसाब से हैसियत ना पाने का अफ़सोस नही करता और अक़्लमंदों से ज्यादा जीता है।
मुझे पढकर यदि आप बेवक़ूफ़ी के पाले मे कूदने की सोच रहे है तो अच्छी बात है पर सही बात तो यह है कि बेवक़ूफ़ी नैसर्गिक गुण है इसे कोशिश करके हासिल नही किया जाना मुश्किल है। ग़लती से चतुर होकर पैदा हो चुके हों आप तो हद से हद आप बेवकूफ होने की एक्टिंग कर सकते है। जब तक आपकी ये चाल चल जाये आप ऐडा बनकर पेड़ा खा भी सकते है।पर आप अपना यह भेद कब तक छुपा सकेगे ये आपकी किस्मत पर है।जहां तक मैं जानता हूँ ,आज तक की तारीख मे मुल्ला नसीरूद्दीन से होनहार बंदा पैदा ही नही हुआ,ये शख्स निहायत जहीन था,पर ताजिंदगी बेवक़ूफ़ी ओढ़े रहा,और बेवक़ूफ़ी की आड़ से ऐसी ऐसी शानदार बातें कर गया ,ऐसे ऐसे बेशक़ीमती सबक दे गया दुनिया को कि उन्हें पढ़ सुन कर ,आज तक पूरी कायनात का गला उनकी तारीफ़ों के कसीदे काढ़ती रहती है।
लिहाजा राहत इंदौरी की बात मानिए। गंडा बँधवाइए किसी जाहिल से। उजड्ड लोगों की संगत कीजिए। बेवकूफों को तवज्जो दीजिए। उनकी सुनिए। यदि पैर पसार कर गहरी नींद सोने की इच्छा है आपकी तो इससे बेहतर सलाह कोई दूसरी नही हो सकती।





