
एसपी के रिटायरमेंट पर झंडे बैनर से पटा बड़वानी,राजनीतिक पारी की शुरुआत के संकेत
बड़वानी: बड़वानी के पुलिस अधीक्षक जगदीश डाबर 31 जनवरी को रिटायर हो गए हैं। लेकिन सोशल मीडिया से लेकर बड़वानी जिला मुख्यालय पर उनके उनके रिटायरमेंट के दिन को झंडे बैनर पोस्टर स्वागत द्वार और आदिवासी वाद्य यंत्र से इस तरह से पाट दिया गया है मानो उनके राजनीति में प्रवेश की तैयारी हो।
पुलिस अधीक्षक जगदीश डाबर मूलतः बड़वानी जिले के निवाली क्षेत्र के निवासी हैं। उन्होंने जिले के सेंधवा से कॉलेज की पढ़ाई भी की है ।रिटायरमेंट के दौरान उनके पैदाइश के जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थापना से कई सवाल उठे थे जो अब भी निरुत्तरीत हैं। हो सकता है कि कोई कारण रहा हो जिसके चलते उन्हें यहां पदस्थ किया गया । वरिष्ठ अधिकारी भी इस मुद्दे पर गोलमोल जवाब देते नजर आते हैं। बहरहाल आखरी पारी उन्होंने अपने जन्म स्थल के जिले में खेल ही ली।

बड़वानी के पुलिस अधीक्षक के रूप में उनकी पारी बेहद साधारण रही न तो अपराधों पर अंकुश लगा और न ही कोई नवाचार देखने को मिला।
यह खुद कुछ ज्यादा काम धाम नहीं देखे थे, उनके अधीनस्थ एक एएसपी पूरा जिला चलाता था उसका नाम एक फेक एनकाउंटर केस में दर्ज होने के बाद उसे हटाया गया । इसके बाद रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़ा एक एसडीओपी फिलहाल सारे मामले देख रहा था।
इसके पूर्व यहां पदस्थ रहे पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोत के जाने के बाद जगदीश डाबर के आने से सारे थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्र में बेहद प्रभावी हो गए और उन्होंने बे रोक टोक अपनी पारियां खेलीं।
यह बात अवश्य है कि उनके व्यवहार और बातचीत के तरीके ने जनता का दिल जीता। जाते-जाते वे पुलिस अधीक्षक से सीनियर पुलिस अधीक्षक भी बन गए।

पुलिस अधीक्षक श्री जगदीश डावर के 31 वर्ष की सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने पर शनिवार को बड़वानी के गार्डन में भव्य सेवानिवृत्ति समारोह एवं प्रीतिभोज आयोजित किया जा रहा है। जिसमे अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों व व्यापारी उपस्थित होकर उन्हें शुभकामनाएं देंगे।
उनके रिटायरमेंट के लिए काफी दिन पहले से तैयारी शुरू हो गई थी। क्या व्यापारी ,क्या नेता, क्या अधिकारी सभी इस दिन को उत्सव के रूप में मना रहे हैं। इस तरह की तैयारी की गई है कि कोई बड़ा राजनेता बड़वानी में पधारने वाला है।
इसके अलावा जगदीश डाबर का एक भतीजा विकास डाबर कांग्रेस का प्रभावी नेता रहा है जो टिकट नहीं मिलने के चलते भाजपा में शामिल हो गये। इसके अलावा भी अन्य कई संकेत है जिससे लगता है कि श्री डाबर राजनीति के मैदान में कूद सकते हैं। वे अपने करीबी लोगों से कई पार्टियों से ऑफर की चर्चा भी करते हैं। हालांकि समय ही बतायगा कि वे अपने रिटायरमेंट को किस तरह से बिताते हैं।
इन्हीं सब के चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि एसपी साहब जल्दी ही राजनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे। इनका आदिवासी प्रेम सर्व विदित था। उन्होंने जयस से जुड़े मामलों को बेहद संवेदनशीलता से लेकर प्रकरण दर्ज करवाये तो लगा कि कहीं इनका झुकाव जयस की तरफ तो नहीं है। लेकिन शेष पार्टियों से भी उनका लगाव संतुलन कारी रहा।
उल्लेखनीय है कि एसपी डावर का जन्म 21 जनवरी 1966 को बड़वानी जिले की निवाली तहसील के ग्राम मंसूर में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1995 में पुलिस सेवा में प्रवेश किया। लगभग 13 वर्ष तक एसडीओपी तथा 12 वर्ष तक उज्जैन, इंदौर, देवास और झाबुआ जैसे जिलों में एसपी के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2022 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन के बाद वे शाजापुर एसपी और इंदौर डीसीपी के रूप में कार्यरत रहे। बाद में 31 दिसंबर 2025 को वे बड़वानी एसपी पद से सेवानिवृत्त हुए।





