नर्मदा पर चलेगा अंतरराज्यीय क्रूज: ओंकारेश्वर से केवड़िया तक जलमार्ग पर्यटन को हरी झंडी

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नर्मदा पर चलेगा अंतरराज्यीय क्रूज: ओंकारेश्वर से केवड़िया तक जलमार्ग पर्यटन को हरी झंडी

Bhopal-Omkareshwar: नर्मदा नदी को धार्मिक आस्था से आगे बढ़ाकर संगठित पर्यटन गलियारे के रूप में विकसित करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार ने ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। ओंकारेश्वर स्थित आदि गुरु शंकराचार्य की एकात्मता की प्रतिमा और गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को जोड़ने वाली प्रस्तावित क्रूज सेवा अब नीति और कागजी योजना से आगे निकलकर संचालन की तैयारी के चरण में पहुंच चुकी है। इस परियोजना के तहत नर्मदा नदी में अंतरराज्यीय जलमार्ग पर नियमित क्रूज संचालन की रूपरेखा तय की जा रही है।

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ओंकारेश्वर से केवड़िया तक तय होगा जलमार्ग

परियोजना के अनुसार क्रूज सेवा मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर से शुरू होकर गुजरात के केवड़िया तक जाएगी। यह जलमार्ग लगभग 120 से 135 किलोमीटर लंबा होगा। नर्मदा के इस हिस्से को पर्यटन अनुकूल बनाने के लिए जल गहराई, प्रवाह और नौवहन क्षमता का आकलन पहले ही किया जा चुका है।

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अब संचालन की जिम्मेदारी तय

क्रूज सेवा को लेकर अब केवल राज्यों के बीच सहमति तक सीमित नहीं रहा गया है। परियोजना के लिए व्यावसायिक संचालन व्यवस्था तय कर दी गई है, जिसके तहत क्रूज के निर्माण, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दीर्घकालिक आधार पर सौंपी जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह योजना अस्थायी या प्रयोगात्मक नहीं, बल्कि स्थायी पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित की जा रही है।

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फ्लोटिंग जेटी और आधुनिक सुविधाएं

ओंकारेश्वर और केवड़िया दोनों स्थानों पर फ्लोटिंग जेटी विकसित की जा रही हैं, जिससे नर्मदा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बावजूद क्रूज का संचालन प्रभावित न हो। यात्रियों के लिए सुरक्षित बोर्डिंग व्यवस्था, प्रतीक्षालय, टिकटिंग सिस्टम और सुरक्षा जांच की व्यवस्था भी इसी चरण में तैयार की जा रही है।

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लक्जरी और पर्यावरण संतुलन पर फोकस

प्रस्तावित क्रूज को लक्जरी पर्यटन की श्रेणी में रखा गया है। इसमें यात्रियों के लिए केबिन, भोजन कक्ष, दर्शनीय डेक और आधुनिक सुरक्षा उपकरण शामिल होंगे। साथ ही नदी के पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए ईंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और ध्वनि नियंत्रण जैसे मानकों का पालन किया जाएगा।

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आध्यात्मिकता से राष्ट्र निर्माण तक की यात्रा

ओंकारेश्वर में स्थापित 108 फीट ऊंची आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा अद्वैत वेदांत और भारतीय दर्शन का प्रतीक है, जबकि केवड़िया में स्थित 182 मीटर ऊंची सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा देश की एकता और अखंडता का संदेश देती है। यह क्रूज यात्रा इन दोनों विचारधाराओं को नर्मदा के एक ही प्रवाह में जोड़ती है।

● नर्मदा पट्टी को मिलेगा आर्थिक लाभ

क्रूज सेवा शुरू होने से नर्मदा किनारे बसे मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। होटल, परिवहन, स्थानीय गाइड, नाविक, हस्तशिल्प और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे नर्मदा पट्टी की अर्थव्यवस्था को नया संबल मिल सकता है।

अंतरराज्यीय पर्यटन सहयोग की मिसाल

इस परियोजना को मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच पर्यटन सहयोग के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। नर्मदा को केवल धार्मिक नदी के रूप में नहीं, बल्कि संगठित जल पर्यटन मार्ग के रूप में स्थापित करने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।