
MP News : Promotion में आरक्षण का मामला: हाई कोर्ट में अब 17 फरवरी को होगी अहम सुनवाई
Bhopal: लंबे समय से अटका संवेदनशील मुद्दा मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण का मामला एक बार फिर निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। वर्षों से लंबित यह विवाद न केवल प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित कर रहा है, बल्कि हजारों कर्मचारियों के भविष्य को भी अधर में लटकाए हुए है।
● 17 फरवरी को तय हुई अगली सुनवाई
इस प्रकरण में अब 17 फरवरी को हाई कोर्ट जबलपुर में अगली सुनवाई प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि यह सुनवाई मामले की दिशा तय करने वाली हो सकती है, क्योंकि राज्य सरकार की नीतिगत स्थिति और कर्मचारियों की अपेक्षाएं दोनों इसी फैसले से जुड़ी हैं।
● क्या है प्रमोशन में आरक्षण का विवाद
प्रमोशन में आरक्षण को लेकर मूल विवाद यह है कि पदोन्नति में आरक्षण देने से पहले प्रशासन को प्रतिनिधित्व, पिछड़ेपन और प्रशासनिक दक्षता से जुड़े ठोस आंकड़े प्रस्तुत करने होते हैं। इन्हीं संवैधानिक शर्तों के अनुपालन को लेकर मामला न्यायिक जांच में है।
● प्रमोशन प्रक्रिया ठप
मामले के लंबित रहने के कारण कई विभागों में वर्षों से नियमित पदोन्नतियां नहीं हो पा रही हैं। इसका असर वरिष्ठता सूची, वेतनमान, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक संतुलन पर साफ दिखाई दे रहा है।
● सरकार की दुविधा
राज्य सरकार एक ओर आरक्षण नीति के पालन की बाध्यता की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर न्यायालयी दिशा-निर्देशों के कारण बिना विधिक आधार के प्रमोशन देने से बच रही है। इसी संतुलन को साधना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
● कर्मचारी संगठनों की बढ़ती बेचैनी
सामान्य, पिछड़ा और आरक्षित वर्ग — सभी श्रेणियों के कर्मचारी संगठन इस मुद्दे को लेकर असंतुष्ट हैं। कोई इसे सामाजिक न्याय से जोड़कर देख रहा है, तो कोई इसे योग्यता और प्रशासनिक दक्षता से।
17 फरवरी की सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि प्रमोशन में आरक्षण को लेकर राज्य सरकार आगे किस मॉडल पर चलेगी। इसके आधार पर ही नए नियम, संशोधन या नीतिगत बदलाव संभव होंगे।





