ग्वालियर के तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बचाई थी 100 करोड़ की सरकारी जमीन, अब 5 IAS–SAS अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा GAD

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ग्वालियर के तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बचाई थी 100 करोड़ की सरकारी जमीन, अब 5 IAS–SAS अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा GAD

Bhopal/Gwalior: ग्वालियर के दीनारपुर क्षेत्र की करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की बेशकीमती सरकारी जमीन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्षों पुराने इस प्रकरण ने अब प्रशासनिक जवाबदेही और अफसरों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

● तत्कालीन कलेक्टर का निर्णायक फैसला

विवाद के चरम पर पहुंचने के दौरान तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच कराई और जमीन को शासकीय घोषित कराया। इस फैसले से न केवल सरकारी संपत्ति सुरक्षित हुई, बल्कि बड़े स्तर पर संभावित भूमि घोटाले पर भी प्रभावी रोक लगी।

● निजी दावों की परतें खुलीं

दीनारपुर की इस जमीन पर लंबे समय से निजी स्वामित्व के दावे किए जा रहे थे। रिकॉर्ड में हेरफेर, पुराने दस्तावेजों की आड़ और प्रशासनिक भ्रम के कारण मामला वर्षों तक उलझा रहा, जिसे कलेक्टर स्तर पर स्पष्ट निर्णय देकर सुलझाया गया।

● हाईकोर्ट पहुंचा मामला

जमीन को सरकारी घोषित किए जाने के बाद प्रकरण न्यायालय तक पहुंचा। यहां सरकार की ओर से याचिका दायर करने में हुई देरी को गंभीरता से लिया गया और इसे साधारण तकनीकी चूक मानने से इनकार किया गया।

● सरकार ने मानी प्रशासनिक लापरवाही

अदालत के समक्ष राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि इस मामले में समय रहते विधिक कदम नहीं उठाए गए। याचिका दायर करने में देरी और फाइलों के लंबित रहने से शासन की स्थिति कमजोर हुई।

● IAS–SAS अधिकारियों पर गिरी गाज

सरकार ने स्पष्ट किया कि याचिका में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जा रही है। इसमें IAS और SAS स्तर के अधिकारी शामिल बताए गए हैं, जिनकी भूमिका अब जांच के दायरे में है।

● GAD ने शुरू की अनुशासनात्मक प्रक्रिया

सामान्य प्रशासन विभाग ने पांच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन पर प्रकरण की मॉनिटरिंग में लापरवाही, विधिक सलाह की अनदेखी और समयसीमा का पालन न करने जैसे आरोप हैं।

● एक अधिकारी का साहस, बाकी तंत्र की चूक

प्रशासनिक हलकों में यह मामला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि जहां एक ओर तत्कालीन कलेक्टर का निर्णय शासन हित में मील का पत्थर साबित हुआ, वहीं बाद के स्तर पर तंत्र की सुस्ती पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर रही है।

● मिसाल बनेगा या औपचारिक कार्रवाई

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि GAD की कार्रवाई वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचेगी या फिर यह मामला भी औपचारिकताओं में सिमट जाएगा। यह प्रकरण आने वाले समय में सरकारी जमीनों की सुरक्षा और अफसरों की जवाबदेही के लिए एक महत्वपूर्ण कसौटी माना जा रहा है।