कूनो में जीवन की दहाड़:मादा चीता ‘आशा’ के 05 शावकों से भारत के संरक्षण प्रयासों को नई रफ्तार

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कूनो में जीवन की दहाड़:मादा चीता ‘आशा’ के 05 शावकों से भारत के संरक्षण प्रयासों को नई रफ्तार

▪️राजेश जयंत

Bhopal: मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। वर्षों की तैयारी, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत निगरानी के बाद भारत के चीता संरक्षण अभियान को वह सफलता मिली है, जिसका इंतजार देश लंबे समय से कर रहा था। मादा चीता ‘आशा’ द्वारा पांच स्वस्थ शावकों को जन्म देना न केवल एक जैविक उपलब्धि है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि भारतीय भूमि एक बार फिर चीतों के लिए अनुकूल बन रही है।

यह क्षण भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

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ऐतिहासिक जन्म और संरक्षण की बड़ी उपलब्धि

7 फरवरी 2026 को कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ‘आशा’ ने पांच स्वस्थ और सक्रिय शावकों को जन्म दिया। शावकों का सुरक्षित जन्म और उनकी प्रारंभिक गतिविधियां यह संकेत देती हैं कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और मां के साथ अनुकूल रूप से विकसित हो रहे हैं।

इस जन्म के साथ ही भारत में जन्मे चीतों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है, जबकि कूनो नेशनल पार्क में कुल चीता आबादी अब 35 तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा इस परियोजना की स्थिरता और दीर्घकालिक सफलता की दिशा में एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।

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कूनो का पारिस्थितिक तंत्र:चीतों के लिए उपयुक्त आवास

शावकों का जन्म इस बात की पुष्टि करता है कि कूनो नेशनल पार्क का पारिस्थितिक तंत्र चीतों के अनुकूल बन चुका है। पर्याप्त शिकार आधार, खुला घास मैदान, सुरक्षित वन क्षेत्र और निरंतर निगरानी ने यहां ऐसा वातावरण तैयार किया है, जहां चीते न केवल जीवित रह रहे हैं, बल्कि प्रजनन भी कर रहे हैं। वन विभाग द्वारा रेडियो कॉलर ट्रैकिंग, चौबीसों घंटे निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण और मानव हस्तक्षेप को न्यूनतम रखने जैसी व्यवस्थाओं ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है।

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Project Cheetah:विलुप्ति से पुनरुत्थान तक की यात्रा

भारत में चीता वर्ष 1952 में आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित किया गया था। इसके बाद दशकों तक यह प्रजाति केवल इतिहास और पुस्तकों तक सीमित रह गई। Project Cheetah के माध्यम से 17 सितंबर 2022 को इस दिशा में एक साहसिक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया, जब अफ्रीका से चीतों को भारत लाकर पुनर्स्थापन की प्रक्रिया शुरू हुई।

शुरुआती चुनौतियां कठिन थीं। स्थानांतरण का तनाव, जलवायु अनुकूलन, स्वास्थ्य जोखिम और व्यवहारिक परिवर्तन जैसी कई बाधाएं सामने आईं, लेकिन समय के साथ चीते भारतीय परिस्थितियों में ढलते चले गए। आज शावकों का जन्म इस पूरी यात्रा की सबसे ठोस सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

● जैव-विविधता और पर्यावरण संतुलन का मजबूत संदेश

मादा चीता ‘आशा’ के शावकों का जन्म केवल एक वन्यजीव समाचार नहीं है, बल्कि यह जैव-विविधता संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का एक सशक्त संदेश भी है। शीर्ष शिकारी प्रजाति के रूप में चीते की उपस्थिति किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि योजनाबद्ध संरक्षण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक प्रतिबद्धता साथ हों, तो विलुप्त प्रजातियों का पुनरुद्धार संभव है।

प्रधानमंत्री और राज्य नेतृत्व की निर्णायक भूमिका

MP भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सोशल मीडिया पर व्यक्त अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए Project Cheetah को राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर समर्थन मिला है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने कूनो नेशनल पार्क को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।

नीतिगत समर्थन, संसाधनों की उपलब्धता और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देने का ही परिणाम है कि आज मध्यप्रदेश देश का प्रमुख वन्यजीव संरक्षण केंद्र बनकर उभर रहा है।

वन्यजीव पर्यटन और भविष्य की संभावनाएं

चीतों की बढ़ती संख्या से न केवल संरक्षण प्रयासों को बल मिला है, बल्कि इससे वन्यजीव पर्यटन, स्थानीय रोजगार और अनुसंधान के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोधकर्ताओं और संरक्षण विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।

आने वाले वर्षों में यदि यही गति बनी रही, तो कूनो चीता संरक्षण का वैश्विक मॉडल बन सकता है।

और अंत में••

कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता ‘आशा’ द्वारा पांच स्वस्थ शावकों को जन्म देना भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। यह सफलता दर्शाती है कि दूरदर्शी नीतियां, वैज्ञानिक प्रबंधन और निरंतर प्रयास मिलकर असंभव को भी संभव बना सकते हैं। यह केवल वर्तमान की उपलब्धि नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, संतुलित और समृद्ध प्राकृतिक विरासत की दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम है।🐾