हिमाचल में गंगा.. है न वाकई चमत्कार..!!

98

हिमाचल में गंगा.. है न वाकई चमत्कार..!!

संजीव शर्मा की विशेष रिपोर्ट

कल्पना कीजिए, जब चारों तरफ चमकती धूप खिली हो लेकिन इसके बाद भी एक स्थान ऐसा हो जहां पूरा पानी कांच की तरह मोटी परत में जमा हो.. पत्थर का बना फर्श इतना ठंडा हो कि पैर जम जाए, लेकिन हवा इतनी शुद्ध एवं साफ की अंतर्मन तक महसूस हो.. अकल्पनीय लगता है न..लेकिन यह हकीकत है और वह भी क्वीन ऑफ हिल्स शिमला से तकरीबन सौ सवा सौ किलोमीटर दूर। यहां तक पहुंचने का रास्ता भी इतना मनमोहक और रोमांचक है कि आप देश के तमाम दुर्गम सफर को भूल जाएंगे। एक तरफ पहाड़ की चोटियों से ऊंचाई में मुकाबला करता चीड़ देवदार का घना जंगल है तो ऊंचाई से विपरीत दिशा में प्रतिस्पर्धा करतीं गहरी खाई और बीच बीच में आवाजाही करते सियार एवं उनके जंगली दोस्त भी। हम भी वापसी में सियार के जोड़े से रूबरू हुए और वह भी इतने दमदार जोड़े से जो बिना डरे आंखों में आंखें डालकर देख रहे थे।

हम बात कर रहे हैं गिरी गंगा की.. हरिद्वार की तरह मां गंगा का एक पवित्र स्थान। शिमला जिले के कड़ापत्थर एरिया के पास स्थित यह स्थान अभी तक पर्यटकों की भीड़, वाहनों की चिल्लपों और शोरगुल से बचा हुआ है। हर तरफ सुकून बिखरा है और चारों ओर बिखरी है बर्फ। कहीं पारदर्शी चमकदार फर्श की तरह तो कहीं टुकड़ों में जमकर नदी के प्रवाह को रोकती हुई।

ज़ाहिर सी बात है कि अब आप के मन में सवाल आएगा कि कहां ऋषिकेश हरिद्वार और कहां ऊंचे पहाड़ों पर बसा शिमला..वहां तक गंगा मैया कैसे पहुंच गई? तो इसके पीछे एक महत्वपूर्ण कहानी है। बताया जाता है कि एक पुराने ऋषि हिमाचल प्रदेश में एक ऐसी जगह बनाना चाहते थे, जिसमें काशी जैसी ही शक्ति और ऊर्जा हो। इसके लिए, उन्होंने हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के निर्मंड गांव को चुना। इसके साथ ही, वह और उनके साथ कुछ साधु हरिद्वार से अपने कमंडल में पवित्र गंगा जल ले जा रहे थे। वे शिमला में पुरानी नागन घाटी से होते हुए आगे बढ़ रहे थे।

यह रास्ता हिमाचल प्रदेश के सबसे घने जंगलों में से एक है। इसी रास्ते में पड़ने वाले कुप्पर बुग्याल में ऋषियों ने आराम करने का फैसला किया। यह एक सुंदर मैदान होने के साथ-साथ एक चोटी भी है।

इस दौरान, वे जो गंगा जल लाए थे, वह गलती से ज़मीन पर गिर गया। उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा “गिरी गंगा” जिसका मतलब है गंगा गिर गई। कमंडल गिरने से पानी की एक धारा बन गई और इसलिए इसे गिरी गंगा नदी कहा गया। बाद में, यहां एक मंदिर बनाया गया। कुछ संदर्भों में ऋषि का नाम जाह्नू ऋषि भी पढ़ने को मिलता है। हालांकि, उनके नाम की पुष्टि बड़े पैमाने पर नहीं हो पाई।

इस घटना के बाद, गिरी गंगा को एक बहुत ही पवित्र और ऊर्जा से भरपूर जगह माना जाने लगा। स्थानीय देवता अपने अनुयायियों के साथ इस जगह पर आने लगे और धीरे-धीरे यह जगह लोकप्रिय हो गई। यहां मां दुर्गा और भगवान शंकर के मंदिर हैं। शिव मंदिर देखने में केदारनाथ मंदिर के छोटे प्रतिरूप की झलक देता है।

मंदिर के चारों ओर पानी का एक कुंड भी है जिसका पानी ठंड में आमतौर पर जमा रहता है। पास से गिरी गंगा की धारा बहती नजर आती है ।

गिरी गंगा मंदिर के बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का मानना है कि यह 13वीं सदी में बनाया गया था। हमारे लिए यह जानना बहुत दिलचस्प है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उस समय आस-पास कोई सभ्यता नहीं थी। गिरि गंगा मंदिर की आकर्षक वास्तुकला देखकर वाकई लगता है कि इस मंदिर को किसने और कैसे बनाया होगा । इस बारे में यहां प्रचलित कहानियों के अनुसार, यह पवित्र स्थान पांडवों ने बनवाया था। ऐसा माना जाता है कि पांडव अपने वनवास के दौरान इस जगह पर रहे थे। इस दौरान, उन्होंने गिरि गंगा में यह स्थान बनाया और यहाँ पूजा भी की। यह जगह उनके छिपने के लिए सबसे सुरक्षित थी क्योंकि जब तक आप खुद यहाँ नहीं पहुँचते, तब तक यह जगह कहीं से भी दिखाई नहीं देती। अभी भी यहां बस एक काम चलाऊ धर्मशाला है। हाल ही में सड़क जरूर जबरदस्त बन गई है इसलिए गाड़ियां की संख्या बढ़ने लगी है जबकि पहले यहां जाना बहुत ही दुष्कर था।

बताया जाता है कि गिरिगंगा और कुप्पर इलाका गद्दी और गुर्जर जनजातियों का रास्ता है। ये जनजातियाँ अपने मवेशियों और भेड़ों को चराने के लिए इस पुराने रास्ते का इस्तेमाल करती हैं। यह भी पढ़ने को मिलता है कि यह पुराना रास्ता उत्तराखंड में यमुनोत्री तक भी जाता है। आगे यह बद्रीनाथ और केदारनाथ तक जाता है इसलिए पुराने समय में गिरी गंगा भक्तों के बीच एक लोकप्रिय पड़ाव था।

हिमाचल प्रदेश देवी देवताओं से जुड़ी आस्था, विश्वास, कथा, कहानियों, किस्से और किवदंतियों की भूमि है। विश्वास करेंगे तो चमत्कारों से भी रूबरू होंगे और यदि नहीं करेंगे तो बस तर्क तलाशते रह जाएंगे। खैर, गिरी गंगा ट्रैकिंग के शौकीन लोगों का स्वर्ग है। कड़ा पत्थर तक राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा यह क्षेत्र गिरी रिजर्व फारेस्ट के अंतर्गत आता है एवं वृक्षों का घना जंगल है। यहां शीर्ष यानि कुप्पर बुग्याल पर पहुंचकर आप पीर पंजाल से लेकर पब्बर घाटी तक का विहंगम दृश्य देख सकते हैं इसलिए इसे बर्फीले ट्रैकिंग के बेहतरीन स्थानों में भी गिना जाता है।