
यह संघ का ‘मोहन’ से ‘सम्मोहन’ है…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
मोहन मधुकरराव भागवत सन् 2009 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छठे और वर्तमान सरसंघचालक हैं। उन्हें एक व्यावहारिक नेता के रूप में देखा जाता है। केएस सुदर्शन ने अपनी सेवानिवृत्ति पर उन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। और जब मोहन भागवत रिटायर होंगे तो वह भी अपने उत्तराधिकारी को चुनेंगे। यह संघ की एक परंपरा है जिसका पालन होता रहा है। यह मोहन भागवत ही हैं जिनके संघ प्रमुख बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी का जनाधार बड़ा है और मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने एनडीए गठबंधन के साथ लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाई है। और 2025 में मोहन भागवत और नरेंद्र मोदी 75 साल की आयु पूरी कर चुके हैं। और 75 पार होकर भी मोहन भागवत संघ प्रमुख और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के पद पर रहकर अपनी पारी जारी रखे हैं। अब परफॉर्मेंस के आधार पर देखा जाए तब भी और उपलब्धियों के आधार पर देखा जाए तब भी, संघ में मोहन भागवत और भाजपा में नरेंद्र मोदी से पद को छोड़ने का फैसला सुनाने की हिम्मत नहीं है।
दरअसल, यह बात सिर्फ इस संदर्भ में ही हो रही है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 75 साल के बाद भी संघ प्रमुख के पद पर रहने को लेकर अपनी सफाई दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 8 फरवरी 2026 को मुंबई में अपने पद और 75 साल की उम्र के बाद काम करने को लेकर बड़ा बयान दिया। मोहन भागवत ने कहा कि अगर संघ उन्हें पद से हटने के लिए कहेगा तो वह इस्तीफा दे देंगे और इस संगठन ने ही उनसे उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जहां तक मेरी बात है, जब मेरे 75 साल पूरे हुए, तो मैंने कार्यकर्ताओं से कहा, लेकिन उन्होंने कहा कि आपको क्या हो गया है? आप घूम रहे हैं, काम कीजिए। मैं यहां हूँ। यह मेरी मर्जी नहीं है। अगर मैं यहां नहीं होता तो यह भी मेरा ऑप्शन नहीं होता। यह संघ का ऑप्शन है। जिम्मेदारी से रिटायर होने के बाद भी संघ का काम जिंदगी भर चलता रहता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत आरएसएस शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के साथ एक संवादात्मक सत्र के दौरान सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए। और इसी संदर्भ में मोहन भागवत ने कहा कि ‘संघ कहे तो पद छोड़ने के लिए तैयार हूं…’।
राम मंदिर और ‘अच्छे दिन’ के सवाल पर संघ प्रमुख ने कहा कि आरएसएस के लिए अच्छे दिन भाजपा के सत्ता में आने से नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों की मेहनत और संगठन की वैचारिक प्रतिबद्धता से आए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में जो लोग संघ के साथ खड़े रहे, उन्हें उसका राजनीतिक लाभ मिला। हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर उन्होंने कहा कि अगर उन्हें यह सम्मान दिया जाता है, तो भारत रत्न की गरिमा और बढ़ेगी। आरएसएस और राजनीति के रिश्ते पर उन्होंने कहा कि संघ जरूरत पड़ने पर सलाह देता है, लेकिन राजनीतिक दबाव मतदाताओं का होता है, आरएसएस का नहीं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ‘राजनीति की गलतियों का दोष अक्सर हम पर मढ़ दिया जाता है।’
भागवत ने खास अंदाज में कहा कि संगठन अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है और उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो। उन्होंने कहा कि संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है, न कि चुनाव प्रचार करना। हम अपने प्रचार-प्रसार में पिछड़ गए हैं। अत्यधिक प्रचार से प्रसिद्धि तो मिलती है, लेकिन फिर अहंकार भी आ जाता है। इससे बचना जरूरी है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, यानी समय और मात्रा दोनों में उचित होना चाहिए। यानि कि यह बात भी मोहन भागवत ने पूरी तरह से साफ कर दी है कि न तो वह रिटायर होंगे और ना ही संघ ने अभी तक किसी को रिटायर किया है। खून के आखिरी कतरे तक वह संघ प्रमुख के रूप में ही राष्ट्र की सेवा करते रहेंगे। वैसे सही बात तो यही है कि मोहन भागवत के नेतृत्व में संघ ने बड़ी ऊँचाईयाँ हासिल की हैं और इसीलिए यह संघ का ‘मोहन’ से ‘सम्मोहन’ ही है कि न तो वह मोहन भागवत को रिटायर करेगा और न ही 75 पार जैसे किसी फॉर्मूले को उन पर लागू होने देगा…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





