जल-जंगल-जमीन की सेवा से विकास का रास्ता: धरमपुरी में देव सेवा यात्रा का समापन

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जल-जंगल-जमीन की सेवा से विकास का रास्ता: धरमपुरी में देव सेवा यात्रा का समापन

JHABUA: जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन के संरक्षण को ग्राम समृद्धि की मूल धुरी मानते हुए शिवगंगा झाबुआ द्वारा संचालित देव सेवा यात्रा का धरमपुरी स्थित शिवगंगा गुरुकुल में भव्य और प्रेरक समापन हुआ। यह समापन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि झाबुआ और अलीराजपुर अंचल के सैकड़ों गांवों में जागी उस चेतना का सार्वजनिक संकल्प था, जिसमें ग्रामवासियों ने अपने गांवों को आत्मनिर्भर, पर्यावरण-संवेदनशील और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का दायित्व स्वयं लिया। एक साथ 11 समानांतर यात्राओं का धरमपुरी में मिलन इस अभियान को क्षेत्रीय जन आंदोलन का स्वरूप देता नजर आया।

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झाबुआ-अलीराजपुर की यात्राओं का एक मंच पर समापन

शिवगंगा झाबुआ के मार्गदर्शन में झाबुआ और अलीराजपुर जिलों में संचालित सभी देव सेवा यात्राओं का समापन एक साथ धरमपुरी में किया गया। इस अवसर पर यात्रा से जुड़े कार्यकर्ता, ग्राम समृद्धि टोलियों के सदस्य, तड़वी, सरपंच और सामाजिक नेतृत्व ने अपने अनुभव साझा किए और अपने-अपने गांवों में पांचों देवों की सेवा को निरंतर जीवन व्यवहार का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।

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सामाजिक चेतना का अभियान

देव सेवा यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक चेतना और सामूहिक उत्तरदायित्व के अभियान के रूप में संचालित किया गया। गांव-गांव में यह संदेश दिया गया कि देवों की वास्तविक सेवा पूजा तक नहीं, बल्कि जल स्रोतों के संरक्षण, जंगल और मातावन की रक्षा, जमीन की उर्वरता बढ़ाने, पशुओं के संवर्धन और समाज में आपसी सहयोग से ही संभव है।

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● 11 यात्राएं, 7 दिन, 250 से अधिक गांव

अभियान के अंतर्गत कुल 11 समानांतर यात्राएं संचालित की गईं। प्रत्येक यात्रा प्रतिदिन तीन गांवों में पहुंची और सात दिनों के भीतर 250 से अधिक गांवों तक देव सेवा और ग्राम समृद्धि का संदेश पहुंचाया गया। हर गांव में देवस्थानों की सफाई, कुएं तालाब जैसे जल स्रोतों की देखरेख, वर्षाकाल को ध्यान में रखते हुए वृक्षारोपण के लिए गड्ढे खोदना, जैविक खेती का प्रचार, जमीन माता की सेवा और पशु संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां की गईं।

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● महिला, बच्चे और पुरुष सभी बने सहभागी

देव सेवा यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापक सामाजिक सहभागिता रही। महिलाओं, बच्चों और पुरुषों ने श्रमदान और संवाद के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभाई। गांवों के तड़वी, सरपंच और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यात्राओं का स्वागत कर इसे सामूहिक जिम्मेदारी का रूप दिया, जिससे यह अभियान एक जन आंदोलन के रूप में उभर सका।

● ग्राम समृद्धि टोलियों का गठन

यात्रा के दौरान गांवों में ग्राम समृद्धि टोलियों का गठन किया गया, जो आगे भी निरंतर सीखते हुए, मिल-जुलकर और श्रम के माध्यम से गांवों के विकास के लिए कार्य करेंगी। इन टोलियों का उद्देश्य अल्पकालिक गतिविधियों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक परिवर्तन लाना है।

● झाबुआ को अक्षय विकास का मॉडल बनाने का विश्वास

समापन अवसर पर झाबुआ क्षेत्र की यात्रा के प्रभारी आमलीफालिया निवासी रमू भाई वाखला ने कहा कि ऐसे सामाजिक जनजागरण अभियानों से गांवों में नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से झाबुआ को अक्षय विकास का ऐसा मॉडल बनाया जा सकता है, जिसे देखने और उससे सीखने देश-विदेश से लोग आएंगे।

● संकल्प के साथ यात्रा का समापन

समापन समारोह में सभी सहभागियों ने अपने गांवों में पांच देवों की सेवा को निरंतर बनाए रखने और ग्राम समृद्धि के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। धरमपुरी में हुआ यह समापन क्षेत्र के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।