संकट में सप्रे और शाह …

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संकट में सप्रे और शाह …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मध्य प्रदेश के दो नेता इन दिनों बड़े संकट से गुजर रहे हैं। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह और बीना विधायक निर्मला सप्रे का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी इस हद तक है कि उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने को मध्य प्रदेश सरकार मजबूर हो सकती है। वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता खत्म करने के मामले में विपक्ष ने सीधा मोर्चा खोल दिया है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने इस मामले में निर्मला सप्रे और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से अलग-अलग सुनवाई की है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने अपना पक्ष खुल कर रख दिया है और हाईकोर्ट की कोई टिप्पणी आने से पहले विधानसभा अध्यक्ष इस मामले पर अपना फैसला सुना सकते हैं।

 

कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी से जुड़े प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह के मामले में 9 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई। पूरे प्रदेश की निगाहें इस बहुचर्चित मामले पर लगी हुई थीं, लेकिन सुनवाई स्थगित हो गई। शीर्ष कोर्ट में मामला सूचीबद्ध नहीं होने की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। इससे मंत्री को और कुछ समय मिल गया है। अगली सुनवाई के लिए भी अभी तारीख निर्धारित नहीं हुआ है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि वह मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति पर फैसला करे। इस फैसले के लिए सरकार को दो सप्ताह का समय दिया गया था। मामले में एसआईटी पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, लेकिन राज्य सरकार की मंजूरी का इंतजार है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में मंत्री विजय शाह की दलील सुनने से इंकार कर दिया था। साथ ही, एसआईटी को निर्देश दिए थे कि मंत्री से जुड़े अन्य विवादों की जांच की जाए। अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी। यह प्रकरण चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। सरकार की ओर से कोई दस्तावेज या रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं की गई है। अब यह कहा जा रहा है कि सरकार विजय शाह को बचाने के लिए बीच के रास्ते तलाशने में जुटी है। फिर भी सुप्रीम कोर्ट के रुख से यह राह आसान नजर नहीं आ रही है। हो सकता है कि शाह पर संकट और गहरा जाए।

 

वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता मामले में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के समक्ष 10 फरवरी 2026 को विधायक निर्मला सप्रे और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की सुनवाई हुई है। सिंघार ने ठोस सबूतों के साथ अपना पक्ष रखा है और उन्हें इस मामले पर जल्द निर्णय की उम्मीद है। इस प्रकरण को लेकर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विधानसभा से यह पूछा गया था कि इस मामले में क्या कार्यवाही की जा रही है। विधानसभा द्वारा न्यायालय को यह जानकारी दी गई थी कि मामले में कार्यवाही जारी है। सिंघार ने कहा कि कई मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि दलबदल से जुड़े मामलों में 90 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए। विधायक निर्मला सप्रे ने भाजपा के मंच से सदस्यता ग्रहण की है। इसके अलावा उनके सार्वजनिक बयान और अन्य सबूत भी प्रस्तुत किए गए हैं, जो दलबदल की पुष्टि करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करते हुए अगले कुछ दिनों में इस मामले पर निष्पक्ष और समयबद्ध निर्णय लेंगे। सिंघार ने भाजपा पर आरोप लगाया कि भाजपा इस मामले को टालने का प्रयास कर रही है, क्योंकि वह उपचुनाव से डरती है। भाजपा को आशंका है कि यदि उपचुनाव हुए तो उसे करारी हार का सामना करना पड़ेगा, इसी वजह से निर्णय में देरी की जा रही है। हालांकि, यह साफ है कि विधानसभा के सामने निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर अंतिम फैसला लेने के अलावा कोई चारा नहीं है।

मध्य प्रदेश का विधान सभा का बजट सत्र जल्दी ही शुरू होने वाला है। ऐसे में इन दोनों मामलों में कांग्रेस मोहन सरकार को सदन में भी घेरेगी। वहीं सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की किसी भी तरह की टिप्पणी से बचने के लिए दोनों ही मामलों में संवैधानिक तौर पर फैसला लेगी, इस बात की संभावना ज्यादा है। हालांकि, सरकार की पहली प्राथमिकता यही रहेगी कि संकट को टालते हुए, वह अपने कैबिनेट मंत्री और विधायक को बचाते हुए अपने फैसले को संवैधानिक दायरे में लाने में सफल हो सकें। पर सरकार की इस मंशा की पूर्ति होना बहुत आसान नहीं है। और ज्यादा संभावनाएं यही नजर आ रही हैं कि शाह और सप्रे पर संकट गहरा है और बचने की गुंजाइश बहुत कम है…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।