MP में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में SC, ST, OBC और Women के प्रतिनिधित्व पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: वैधानिक आरक्षण नहीं, लेकिन पर्याप्त सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की अपेक्षा

161
Gay Marriage

MP में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में SC, ST, OBC और W Women के प्रतिनिधित्व पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: वैधानिक आरक्षण नहीं, लेकिन पर्याप्त सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की अपेक्षा

 

New Delhi / Bhopal: मध्य प्रदेश में सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन नियुक्तियों में वैधानिक आरक्षण लागू नहीं है, इसलिए अदालत बाध्यकारी आदेश नहीं दे सकती, लेकिन राज्य को सामाजिक रूप से वंचित वर्गों को पर्याप्त अवसर देने की दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति में विविध सामाजिक पृष्ठभूमि के योग्य अधिवक्ताओं को अवसर मिलना चाहिए ताकि न्यायिक व्यवस्था में व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

 

● क्या था पूरा मामला

याचिका में हाल ही में महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा की गई सरकारी वकीलों की नियुक्तियों पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि नई नियुक्तियों में अनुसूचित जनजाति वर्ग का एक भी वकील शामिल नहीं है, जबकि अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिला अधिवक्ताओं की संख्या भी बहुत कम है।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि सरकारी वकील भविष्य में न्यायाधीश पद तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में प्रारंभिक स्तर पर ही यदि सामाजिक विविधता और संतुलन नहीं होगा तो न्यायपालिका में वंचित वर्गों का प्रतिनिधित्व सीमित रह जाएगा।

 

● सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए कोई वैधानिक आरक्षण प्रावधान नहीं है। इस कारण न्यायालय इस विषय में अनिवार्य आदेश पारित नहीं कर सकता। हालांकि अदालत ने राज्य के एडवोकेट जनरल से अपेक्षा जताई कि नियुक्तियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने पर गंभीरता से विचार किया जाए।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि वंचित समुदायों को अवसर ही नहीं दिए जाएंगे तो वे आगे कैसे बढ़ पाएंगे। न्यायालय ने सामाजिक समावेशन को न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।

 

● कानूनी और सामाजिक महत्व

यह निर्देश सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के व्यापक प्रश्न से जुड़ा हुआ है। सरकारी वकील राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और आगे चलकर न्यायिक पदों तक भी पहुंच सकते हैं। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में विविधता और समावेशन पर ध्यान देना न्यायिक प्रणाली के संतुलित विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

● याचिका का निपटारा

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपेक्षित दिशा में विचार करने की सलाह देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कानूनी अधिकार के रूप में आरक्षण लागू करने का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता का विषय है।

इस फैसले के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मध्य प्रदेश में भविष्य की सरकारी वकील नियुक्तियों में सामाजिक विविधता को किस प्रकार संतुलित रूप से शामिल किया जाता है।