मालवा का अफीम गढ़ अब MDMA फैक्ट्री जोन, गांधी सागर के बैकवॉटर से राजस्थान सीमा तक फैला सिंथेटिक ड्रग

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मालवा का अफीम गढ़ अब MDMA फैक्ट्री जोन, गांधी सागर के बैकवॉटर से राजस्थान सीमा तक फैला सिंथेटिक ड्रग

रतलाम/मंदसौर:: कभी अफीम की वैध एवं अवैध खेती और उसके कारोबार के लिए पहचाने जाने वाला मालवा अंचल अब एक नए और कहीं अधिक खतरनाक नशे की पहचान बनता जा रहा है। रतलाम- नीमच- मंदसौर का इलाका, जो दशकों तक पारंपरिक मादक पदार्थो की सप्लाई का केंद्र रहा, अब हाई-प्रोफिट सिंथेटिक ड्रग MDMA के निर्माण का उभरता हुआ हब बन चुका है।

हाल के महीनों में सामने आए मामलों ने साफ कर दिया है कि यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि सुनियोजित और संगठित तरीके से यहां पर हो रहा है।

हाल ही की कार्रवाई में मंदसौर जिले के गरोठ क्षेत्र के सुरजना गांव में MDMA निर्माण की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया। यह यूनिट गांधी सागर बांध के बैकवॉटर क्षेत्र में स्थापित की गई थी, ताकि पुलिस की नजरों से दूर रह सके।

हाल ही में मंदसौर जिले के आठ थानों से आए 80 से अधिक पुलिसकर्मियों ने एक साथ कार्रवाई करते हुए इस ठिकाने को ध्वस्त किया था। छापे के दौरान MDMA निर्माण में प्रयुक्त 12.6 किलोग्राम कच्चा रसायन, अर्द्धनिर्मित पदार्थ और तैयार नशीला पदार्थ जब्त किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 13 करोड़ रुपये आंकी गई है।

गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि यह फैक्ट्री बीते दो वर्षों से लगातार संचालित हो रही थी।

*नीमच में भी फैक्ट्री पकड़ी गई थी*

यह मामला अकेला नहीं है। इससे पहले नीमच जिले के लसूड़िया हस्तमुरार गांव में भी एमडीएमए निर्माण की एक बड़ी फैक्ट्री पकड़ी गई थी। उस कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और लगभग 30 करोड़ रुपये मूल्य का मादक पदार्थ, रसायन और उपकरण जब्त किए गए थे। इन दोनों मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रतलाम-नीमच-मंदसौर बेल्ट अब केवल ट्रांजिट रूट नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है।

*राजस्थान तक नेटवर्क*

सूत्रों की मानी जाए तो जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है। गिरोह की सक्रियता राजस्थान के मेवाड़ और हाड़ौती अंचल तक फैली हुई है। प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, झालावाड़ और कोटा जैसे जिलों से बीते कुछ महीनों में एमडीएमए की बड़ी खेपें पकड़ी गई हैं। पिछले महीने मध्यप्रदेश- राजस्थान सीमा के दोनों ओर एक साथ की गई कार्रवाई में राजस्थान के झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव और मध्यप्रदेश के रतलाम में दो अलग-अलग MDMA यूनिट्स का भंडाफोड़ किया गया था।

*राजस्थान पुलिस की पड़ताल*

राजस्थान पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने बीते छह महीनों में राज्य में MDMA के निर्माण और तस्करी से जुड़े कम से कम 15 मामलों का खुलासा कर चुकी है। हाड़ौती और मेवाड़ क्षेत्र में नशा तस्करों के खिलाफ करीब 100 आपरेशन किए गए हैं। मंदसौर- नीमच क्षेत्र और राजस्थान के सटे मेवाड़ व हाड़ौती इलाके लंबे समय से अफीम की खेती और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के लिए कुख्यात रहे हैं। यही पारंपरिक नेटवर्क अब सिंथेटिक ड्रग के नए कारोबार की रीढ़ बनता जा रहा है।