
Russia में डिजिटल सख्ती, Facebook, Instagram, WhatsApp समेत कई विदेशी सोशल मीडिया पर प्रतिबंध
Moscow: रूस ने एक बार फिर अपने डिजिटल स्पेस पर नियंत्रण कड़ा करते हुए कई प्रमुख विदेशी सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध लागू कर दिया है। रूस की इंटरनेट निगरानी संस्था रोसकोमनाडजोर ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और यूट्यूब सहित कुछ अन्य वैश्विक प्लेटफार्मों की पहुंच सीमित या अवरुद्ध कर दी है। सरकार का दावा है कि ये प्लेटफॉर्म स्थानीय कानूनों का पालन नहीं कर रहे थे और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम बन रहे थे।

● क्या है पूरा मामला
रूसी नियामक संस्था रोसकोमनाडजोर ने आधिकारिक बयान में कहा है कि कई विदेशी डिजिटल कंपनियां रूसी कानूनों के तहत आवश्यक डेटा स्टोरेज, कंटेंट मॉडरेशन और आपत्तिजनक सामग्री हटाने के नियमों का पालन नहीं कर रही थीं। आरोप है कि कुछ प्लेटफार्मों पर प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ी सामग्री और सरकार विरोधी अभियान चलाए जा रहे थे। इसी आधार पर चरणबद्ध तरीके से इन सेवाओं की पहुंच रोकी गई।
● किन प्लेटफार्मों पर लगा प्रतिबंध
फेसबुक और इंस्टाग्राम पहले ही रूस में गंभीर प्रतिबंधों का सामना कर रहे थे, जिन्हें अब पूरी तरह ब्लॉक श्रेणी में रखा गया है। व्हाट्सएप की सेवाओं पर भी व्यापक रोक की खबर है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में तकनीकी रूप से आंशिक पहुंच की सूचना मिलती रही है। यूट्यूब की स्पीड धीमी किए जाने और कई चैनलों को हटाए जाने के बाद अब इसकी पहुंच भी काफी सीमित बताई जा रही है।

इनके अतिरिक्त स्नैपचैट, फेसटाइम, ट्विटर जिसे अब एक्स कहा जाता है, तथा गेमिंग प्लेटफॉर्म रोब्लॉक्स पर भी पहले से प्रतिबंध या सख्त नियंत्रण लागू है।
● सरकार का पक्ष
रूसी प्रशासन का कहना है कि देश की डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। अधिकारियों के अनुसार विदेशी सर्वरों और कंपनियों पर निर्भरता से राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के डेटा संरक्षण को खतरा हो सकता है।
रोसकोमनाडजोर का यह भी कहना है कि कुछ प्लेटफार्मों का उपयोग अवैध गतिविधियों, फर्जी सूचनाओं और चरमपंथी प्रचार के लिए किया जा रहा था।
● डिजिटल संप्रभुता की रणनीति
रूस पिछले कुछ वर्षों से स्वदेशी डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दे रहा है। सरकार स्थानीय सोशल नेटवर्क, मैसेजिंग ऐप और वीडियो प्लेटफार्मों को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य विदेशी तकनीकी कंपनियों पर निर्भरता कम करना और घरेलू प्लेटफार्मों को मजबूत करना बताया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि में भी देखा जाना चाहिए।
● आम नागरिकों और कारोबार पर असर
इन प्रतिबंधों से रूस में करोड़ों उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। कई लोग वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क के जरिये इन प्लेटफार्मों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने वीपीएन सेवाओं पर भी सख्ती बढ़ा दी है। डिजिटल मार्केटिंग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कंटेंट क्रिएटर्स को विशेष रूप से झटका लगा है, क्योंकि उनकी पहुंच वैश्विक दर्शकों तक सीमित हो गई है।
● अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और तकनीकी विशेषज्ञों ने इन कदमों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश बताया है। वहीं रूस का तर्क है कि हर देश को अपने साइबर स्पेस की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि इंटरनेट कितना खुला और कितना नियंत्रित होना चाहिए। रूस का यह कदम डिजिटल दुनिया में बढ़ती राजनीतिक खींचतान का नया अध्याय माना जा रहा है।





