सरला माहेश्वरी नहीं रहीं: दूरदर्शन की विश्वसनीय आवाज़ को श्रद्धांजलि

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सरला माहेश्वरी नहीं रहीं: दूरदर्शन की विश्वसनीय आवाज़ को श्रद्धांजलि

New Delhi: दूरदर्शन की प्रख्यात और विश्वसनीय समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके निधन की खबर सामने आते ही पत्रकारिता जगत, प्रसारण क्षेत्र और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। दशकों तक अपनी स्पष्ट उच्चारण, संतुलित प्रस्तुति और निष्पक्ष शैली के लिए पहचानी जाने वाली सरला माहेश्वरी ने भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता को एक अलग गरिमा प्रदान की।

बताया जाता है कि उनका जन्म दिल्ली में हुआ था और वे लंबे समय तक दिल्ली में ही निवासरत रहीं। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। पत्रकारिता में आने से पहले वे शिक्षण और शोध कार्य से भी जुड़ी रहीं।

● सहज वाणी और निष्पक्ष प्रस्तुति की पहचान

सरला माहेश्वरी उन चुनिंदा समाचार वाचकों में रहीं, जिनकी आवाज ही विश्वसनीयता का पर्याय मानी जाती थी। उन्होंने वर्ष 1976 में दूरदर्शन के साथ अपने करियर की शुरुआत की। लगभग तीन दशक से अधिक समय तक वे हिंदी समाचार बुलेटिन का प्रमुख चेहरा रहीं और 2005 के आसपास सक्रिय सेवा से जुड़ी रहीं।

दूरदर्शन के स्वर्णिम दौर में उन्होंने राष्ट्रीय समाचार बुलेटिनों का संचालन किया और अपनी संतुलित भाषा, शुद्ध उच्चारण तथा गंभीर प्रस्तुति के माध्यम से करोड़ों दर्शकों का विश्वास अर्जित किया। उनकी वाणी में न तो अनावश्यक नाटकीयता होती थी और न ही पक्षपात का कोई भाव। यही कारण रहा कि वे लंबे समय तक देशवासियों के लिए समाचार का विश्वसनीय चेहरा बनी रहीं।

● दूरदर्शन के स्वर्णिम युग की प्रतिनिधि

जब निजी समाचार चैनलों का दौर नहीं था और दूरदर्शन ही सूचना का प्रमुख माध्यम था, उस समय सरला माहेश्वरी जैसे समाचार वाचकों ने प्रसारण की गरिमा को बनाए रखा। सीमित तकनीकी संसाधनों के बावजूद उनकी प्रस्तुति में स्पष्टता और आत्मविश्वास झलकता था।

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समाचार वाचन को उन्होंने केवल पढ़ने का कार्य नहीं माना, बल्कि उसे एक जिम्मेदारी और जनसेवा का माध्यम समझा। 80 और 90 के दशक में उनकी आवाज घर घर में पहचानी जाती थी।

● अंतिम संस्कार और पारिवारिक जानकारी

सरला माहेश्वरी का अंतिम संस्कार दिल्ली के निगमबोध घाट पर संपन्न हुआ। परिवार के सदस्य, पूर्व सहकर्मी और पत्रकारिता जगत से जुड़े अनेक लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। परिवार में उनके पुत्र और निकट संबंधी हैं।

● राजनीतिक और पत्रकारिता जगत की श्रद्धांजलि

सरला माहेश्वरी के निधन पर प्रधानमंत्री ने उन्हें भारतीय प्रसारण परंपरा की सशक्त और विश्वसनीय आवाज बताते हुए श्रद्धांजलि दी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि उन्होंने दूरदर्शन की विश्वसनीयता को नई ऊंचाई प्रदान की और उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

कांग्रेस अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके निधन को मीडिया जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

दूरदर्शन के पूर्व वरिष्ठ समाचार वाचक शम्मी नारंग ने कहा कि सरला माहेश्वरी अनुशासन, भाषा की शुद्धता और पेशेवर प्रतिबद्धता की मिसाल थीं। कई वरिष्ठ पत्रकारों और पूर्व सहकर्मियों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उनकी आवाज आज भी समाचार की गंभीरता और गरिमा की याद दिलाती है।

● एक युग का अवसान

सरला माहेश्वरी का निधन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि दूरदर्शन के उस दौर की स्मृतियों का भी अवसान है जब समाचार प्रस्तुति में गंभीरता, मर्यादा और भाषा की शुद्धता सर्वोपरि मानी जाती थी।

उनके जाने से पत्रकारिता जगत को जो क्षति हुई है, वह लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

Mediawala परिवार ईश्वर से प्रार्थना करता है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।