
Simhastha 2028: उज्जैन को मिलेंगे 2 एलिवेटेड ब्रिज, 1050 करोड़ से टेंडर की तैयारी
Ujjain: धार्मिक नगरी उज्जैन में ट्रैफिक दबाव को स्थायी समाधान देने और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को गति देने के लिए दो बड़े elevated bridge निर्माण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 13 मई 2025 को की गई घोषणा अब अमली जामा पहनती नजर आ रही है।
उज्जैन संभाग के कमिश्नर और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग और सेतु निगम की टीमों ने तकनीकी सर्वे, ट्रैफिक आकलन और प्रारंभिक डिजाइन कार्य लगभग पूरा कर लिया है तथा लगभग 1050 करोड़ रुपये की लागत से टेंडर जारी करने की तैयारी चल रही है।

*● निकास चौराहा से इंदौर गेट तक एलिवेटेड कॉरिडोर*
पहला एलिवेटेड ब्रिज निकास चौराहा से बुधवारिया होते हुए इंदौर गेट तक प्रस्तावित है। इसकी लंबाई डेढ़ किलोमीटर से अधिक और चौड़ाई लगभग 11 मीटर रखी गई है। इसे टू लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। योजना का मूल उद्देश्य यह है कि ऊपर से वाहनों की निर्बाध आवाजाही हो और नीचे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों। इस हिस्से में वर्तमान में बाजार क्षेत्र और घनी आबादी होने से पारंपरिक फ्लाईओवर मॉडल की बजाय पिलर आधारित एलिवेटेड स्ट्रक्चर प्रस्तावित किया गया है ताकि न्यूनतम भूमि अधिग्रहण में कार्य संभव हो सके।

*● मकोडिया आम से चामुंडा चौराहा तक 3.5 किमी लंबा ब्रिज*
दूसरा प्रमुख एलिवेटेड ब्रिज मकोडिया आम चौराहे से चामुंडा चौराहे तक बनाया जाएगा। इसकी लंबाई लगभग 3.5 किलोमीटर और चौड़ाई करीब 25 मीटर प्रस्तावित है। यह हिस्सा सिंहस्थ के दौरान सर्वाधिक ट्रैफिक दबाव वाले मार्गों में शामिल रहता है। डिजाइन इस प्रकार तैयार की जा रही है कि भारी वाहन और श्रद्धालु वाहनों का प्रवाह अलग-अलग स्तर पर नियंत्रित किया जा सके। आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में इसी कॉरिडोर को उच्च क्षमता वाले सार्वजनिक परिवहन तंत्र के अनुरूप विकसित करने की संभावना भी तकनीकी रूप से रखी गई है।

*● इंदौर रोड और महामृत्युंजय द्वार कनेक्टिविटी*
इंदौर रोड पर महामृत्युंजय द्वार से हरी फाटक ब्रिज तक भी एलिवेटेड कनेक्टिविटी को लेकर निर्देश दिए गए हैं। इंदौर-उज्जैन फोरलेन को सिक्स लेन में अपग्रेड किया जा रहा है और इसका लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण बताया जा रहा है। इसी विस्तारित मार्ग के ऊपर एलिवेटेड संरचना विकसित करने का प्रारूप तैयार किया गया है, जिससे शहर में प्रवेश और निकास दोनों ओर ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके।
*● तकनीकी संरचना और डिजाइन*
परियोजना की ड्राइंग और डिजाइन विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा तैयार की जा रही है। प्रारंभिक तकनीकी अवधारणा के अनुसार प्रीकास्ट गर्डर आधारित पिलर स्ट्रक्चर अपनाया जाएगा, जिससे निर्माण अवधि कम रहे और बाजार क्षेत्र में व्यवधान न्यूनतम हो। पिलर स्पेसिंग इस तरह प्रस्तावित है कि नीचे की दुकानों और यातायात पर असर सीमित रहे। यातायात प्रबंधन के लिए एप्रोच रोड, सर्विस लेन और रैंप की समुचित योजना भी शामिल की जा रही है।
*● 1050 करोड़ की लागत, अप्रैल से काम शुरू होने की संभावना*
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार दोनों एलिवेटेड ब्रिज की कुल अनुमानित लागत लगभग 1050 करोड़ रुपये है, जिसमें निर्माण, भूमि अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और अन्य तकनीकी घटक शामिल हैं। यदि टेंडर प्रक्रिया निर्धारित समय में पूरी हो जाती है तो अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है और लगभग दो वर्षों में परियोजना पूर्ण करने की रूपरेखा है।
*● जाम से राहत और महाकाल दर्शन में सुविधा*
उज्जैन में महाकाल मंदिर और प्रमुख बाजार क्षेत्रों में अक्सर जाम की स्थिति बनती है। एलिवेटेड ब्रिज बनने के बाद शहर के मुख्य मार्ग आपस में बेहतर ढंग से जुड़ेंगे, भारी वाहनों का दबाव सतही सड़कों से हटेगा और श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिलेगी। सिंहस्थ 2028 के दौरान देश-विदेश से आने वाली भीड़ को संभालने में यह संरचना निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
*● प्रशासनिक स्तर पर निगरानी*
उज्जैन संभाग के कमिश्नर और मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह सहित प्रशासनिक अमला और सिंहस्थ से जुड़े अधिकारी परियोजना की प्रगति की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। उद्देश्य यह है कि सिंहस्थ से पूर्व प्रमुख ढांचागत परियोजनाएं धरातल पर दिखने लगें और उज्जैन को दीर्घकालिक ट्रैफिक समाधान मिल सके।
उज्जैन में प्रस्तावित यह एलिवेटेड ब्रिज परियोजना केवल एक यातायात योजना नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की संरचना को नया आकार देने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल मानी जा रही है, जो व्यापार, धार्मिक पर्यटन और शहरी विस्तार तीनों को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने का प्रयास है।





