
राजधानी में शराब दुकान बदलने के डेढ़ महीने पहले ही शुरू हुआ ‘छूट का खेल’
भोपाल: राजधानी भोपाल में शराब की दुकानों पर इन दिनों ‘भारी छूट’ और ‘स्पेशल आफर’ के बड़े-बड़े पोस्टर चर्चा का विषय बने हुए हैं। आबकारी नीति के तहत निर्धारित अवधि यानी 31 मार्च को शराब दुकान बदलने से करीब डेढ़ महीने पहले ही कई दुकानों पर छूट का खेल शुरू हो गया है। शहर के प्रमुख इलाकों में संचालित शराब दुकानों के बाहर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें विभिन्न ब्रांड्स पर विशेष डिस्काउंट का दावा किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की अचानक और आक्रामक छूट से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों का मानना है कि जब तय समय से पहले स्टॉक खपाने की होड़ लगती है, तो नकली या मिलावटी शराब की आशंका भी बढ़ जाती है।
छूट के नाम पर यदि बिना सख्त निगरानी के बिक्री बढ़ाई गई, तो असामाजिक तत्व इसका फायदा उठा सकते हैं। वे सस्ती शराब के चक्कर में लोगों को चोरी-छिपे नकली और मिलावटी शराब बेचेंगे।
एमआरपी से कम कीमत पर शराब बेचना नियम का उल्लंघन है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ दुकानों में एमआरपी से कम कीमत पर शराब बेचे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इससे न केवल राजस्व को नुकसान हो सकता है, बल्कि उपभोक्ताओं की सेहत के लिए भी खतरा बढ़ सकता है। पहले भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मिलावटी शराब के मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें लोगों की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं दर्ज हुई थीं। विभागीय लोगों की मानें तो एमआरपी से कम और ज्यादा रेट पर शराब बेचना नियम का उल्लंघन करना है, लेकिन शहर में यह खेल जारी है।
*आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल*
राजधानी की अनेक शराब दुकानों में छूट के बड़े-बड़े पोस्टर बीते तीन-चार दिनों से लगे हुए हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर आबकारी अमले ने चुप्पी साध रखी है। इससे कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। शहरवासियों ने प्रशासन और आबकारी विभाग से मांग की है कि छूट के नाम पर चल रहे इस खेल की जांच की जाए। दुकानों के स्टॉक, बिलिंग और गुणवत्ता की नियमित जांच हो, ताकि किसी भी प्रकार की मिलावट या अवैध बिक्री पर समय रहते रोक लगाई जा सके। यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो छूट का यह खेल राजधानी में बड़े गोरखधंधे का रूप ले सकता है।





