AI Summit 2026- ‘Robot Dog’ पर बवाल: विदेशी मशीन को स्वदेशी बताने के आरोप के बाद यूनिवर्सिटी का स्टॉल हटाया

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AI Summit 2026- ‘Robot Dog’ पर बवाल: विदेशी मशीन को स्वदेशी बताने के आरोप के बाद यूनिवर्सिटी का स्टॉल हटाया

New Delhi: राजधानी नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में एक बड़े विवाद ने सरकार और आयोजकों दोनों को असहज स्थिति में ला दिया। समिट में प्रदर्शित एक Robotic Dog को लेकर दावा किया गया कि इसे भारतीय संस्थान ने विकसित किया है, लेकिन बाद में विशेषज्ञों ने इसे विदेशी कंपनी का तैयार उत्पाद बताया। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित विश्वविद्यालय का स्टॉल एक्सपो से हटवा दिया गया।

 

● विदेशी मॉडल को भारतीय इनोवेशन बताने का आरोप

सूत्रों के अनुसार, नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक चार पैरों वाला रोबोटिक डॉग प्रदर्शित किया गया था। प्रस्तुति के दौरान इसे निगरानी, सुरक्षा और स्वचालित गश्त जैसे कार्यों में सक्षम भारतीय तकनीक बताया गया। हालांकि कार्यक्रम में मौजूद तकनीकी विशेषज्ञों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने जल्द ही पहचान लिया कि यह मशीन चीन की रोबोटिक्स कंपनी Unitree Robotics के Go2 मॉडल से मिलती-जुलती है, जो पहले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध है और कई देशों में इस्तेमाल हो रही है।

 

● वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद

समिट के दौरान प्रसारित एक वीडियो में विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर रोबोट डॉग को संस्थान के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा विकसित बताती नजर आईं। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।

बाद में संबंधित क्लिप को सरकारी प्रसारक DD News के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, लेकिन तब तक मामला व्यापक चर्चा का विषय बन चुका था।

 

● स्टॉल खाली करने के निर्देश

विवाद गहराने के बाद आयोजकों ने विश्वविद्यालय को एक्सपो से बाहर कर दिया और तुरंत स्टॉल खाली करने को कहा गया। आधिकारिक स्तर पर इसे “प्रस्तुतीकरण संबंधी समस्या” बताया गया, हालांकि अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर गलत दावा भारत की छवि पर असर डाल सकता था।

 

● यूनिवर्सिटी का स्पष्टीकरण

विश्वविद्यालय प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि उसने रोबोट का निर्माण करने का दावा नहीं किया था, बल्कि छात्र विदेशी तकनीक का अध्ययन कर रहे थे और भविष्य में स्वदेशी समाधान विकसित करने का लक्ष्य है। संस्था ने पूरे विवाद को अपने खिलाफ चलाया गया दुष्प्रचार भी बताया।

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● विपक्ष और अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया

इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे भारत की तकनीकी छवि के लिए नुकसानदेह बताया और कहा कि देश की प्रतिभा का उपयोग करने के बजाय कार्यक्रम प्रचार आधारित आयोजन बनता जा रहा है।

कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर भी आरोप लगाया गया कि विदेशी उत्पादों को भारतीय उपलब्धि बताकर पेश किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की साख प्रभावित होती है। वहीं कुछ तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि विदेशी तकनीक का प्रदर्शन करना गलत नहीं है, लेकिन उसे स्वदेशी नवाचार बताना भ्रम पैदा करता है और शोध-विकास की वास्तविक उपलब्धियों को भी कमजोर करता है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम भी चर्चा में आया, हालांकि इस मुद्दे पर उनकी ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

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● पहले दिन से ही अव्यवस्था के आरोप

समिट के उद्घाटन दिवस से ही व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। प्रतिभागियों ने तकनीकी खामियों, पंजीकरण अव्यवस्था और कार्यक्रम प्रबंधन में कमी की बात कही थी। रोबोट डॉग विवाद ने इन आलोचनाओं को और तेज कर दिया।

● क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला

विशेषज्ञों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्र में विश्वसनीयता सबसे बड़ी पूंजी होती है। किसी विदेशी उत्पाद को स्वदेशी नवाचार बताने का आरोप न केवल संस्थान बल्कि पूरे इकोसिस्टम की साख पर प्रश्न खड़ा करता है। फिलहाल यह मामला तकनीकी सत्यापन, प्रस्तुति की पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दावों की जिम्मेदारी- तीनों पर गंभीर बहस छेड़ चुका है।