
Vishansabha Session Bhopal: आसंदी से निर्देश- फारेस्ट सेटलमेंट अधिकारी को करें पदस्थ
भोपाल: विधानसभा में फॉरेस्ट सेटलमेंट अधिकारी की नियुक्ति का मुद्दा उठने के बाद अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने निर्देश दिए कि इस पद पर नियुक्ति की जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला पहले भी सदन में आ चुका है और अब तक निराकरण नहीं होना चिंताजनक है, इसलिए सामान्य प्रशासन विभाग को लिखकर तत्काल नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
वहीं उन्होंने एक अन्य प्रश्न पर भी मंत्री करण सिंह वर्मा को निर्देश दिए हैं कि श्योपुर के सहरिया आदिवासियों को परेशान नहीं किया जाए।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि फॉरेस्ट सेटलमेंट अधिकारी के तीन पद रिक्त हैं, जिससे पत्तेदारी और सीमांकन से जुड़े मामलों में दिक्कत आ रही है तथा विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कलेक्टर द्वारा भी नियुक्ति के लिए अनुरोध किया गया है। विकास कार्य रूक रहे हैं, मेडिकल कॉलेज तक की जगह बदल दी जा रही है। दीवार गिरा दी जाती है, बाद में पता चलता है कि राजस्व की जगह है। इसलिए फॉरेस्ट सेटलमेंट अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए।
जवाब में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि नियुक्ति का अधिकार सामान्य प्रशासन विभाग को है। इस पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए निर्देश दिए कि फॉरेस्ट सेटलमेंट अधिकारी की नियुक्ति की जाना चाहिए।
वहीं विधायक मुकेश मल्होत्रा के सवाल पर अध्यक्ष ने मंत्री करण सिंह वर्मा को निर्देश दिए कि श्योपुर में सहरिया आदिवासियों को परेशान नहीं किया जाए। कलेक्टर को इस संबंध में निर्देश दिए जाएं। मल्होत्रा ने श्योपुर जिले में बेचिराग राजस्व ग्राम ऊकाल, सोहनदेह, श्यामापुरा खैरोना, अजनई, पिपरकक्ष आदि ग्रामों में आदिवासियों को रहने बसने का अधिकार दिए जाने को लेकर सवाल किया था।
*भाजपा विधायक का आरोप मंत्री ने दिया अपूर्ण और अशुद्ध जवाब*
इधर भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने आरोप लगाया कि उनके सवाल पर मंत्री उदय प्रताप सिंह ने अशुद्ध और अपूर्ण जवाब दिया है। उन्होंने अपने क्षेत्र में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शालाओं की इमारतों की जर्जर स्थिति को लेकर सवाल किया था। उन्होंने कहा कि बच्चों और शिक्षकों को उम्मीद रहती है कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से काम हो जाएगा। वे टूट हुए छते दिखाते हैं, छत गिरने से बच्चे घायल हुए और उन्हें इलाज के लिए नागपुर में एडमिट करना पड़ा था। जो जानकारी जवाब में दी गई है वह मुझे ही नहीं पता कहां की है। अधिकारी अशुद्ध जानकारी दे रहे हैं, ऐसे में बच्चों का क्या होगा। गलत जानकारी देने वालों पर कार्यवाही की जाए। इस पर मंत्री ने कहा कि सूची में टाइपिंग मिस्टेक हो सकती है। प्रदेश में 1816 जीर्णशीर्ण भवन है, इनकी मरम्मत की चिंता की जा रही है।





