
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: इंदौर में मैथिली भाषा भाषियों ने बिखेरी मिथिला की संस्कृति, लोकगीतों की खुशबु
इंदौर : अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर शहर के चिमनबाग मैदान में भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का अद्भुत संगम देखने को मिला। डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति एवं भारतीय भाषा संवर्द्धन समिति के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष समारोह में विभिन्न भारतीय भाषाओं के साथ मैथिली भाषा और संस्कृति की गरिमामयी प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमुदाय का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में शहर के मैथिली भाषा-भाषी समाज ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। मैथिली साहित्य, संस्कृति, संगीत, लोकगीत और पारंपरिक खानपान पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
“इंदौर सखी बहिनपा मैथिलानी समूह” की महिलाओं ने मधुर मैथिली लोकगीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया। समारोह स्थल पर मिथिला के पारंपरिक व्यंजनों के आकर्षक स्टॉल भी लगाए गए, जिनका लोगों ने उत्साहपूर्वक आनंद लिया।
इस अवसर पर मैथिल सामाजिक मंच के आदित्य नाथ झा, मुकेश झा, नुनु झा सहित इंदौर सखी बहिनपा मैथिलानी समूह की ऋतु झा, सुषमा झा, सोनी झा और बड़ी संख्या में शहर के मैथिली भाषी नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि केवल मैथिली ही नहीं, बल्कि संस्कृत, निमाड़ी, मालवी, भीली, जनजातीय भाषाएं, भोजपुरी, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, मारवाड़ी, सिंधी, गुजराती, नेपाली, हिंदी और गढ़वाली भाषाओं में भी प्रस्तुतियां दी गईं, जिससे भारत की भाषाई विविधता का जीवंत चित्र उभरकर सामने आया।
मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे, जबकि सेवानिवृत्त मेजर जनरल सरबजीत सिंह देऊसी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता समिति के क्षेत्र संपर्क प्रमुख प्रवीण गुप्त ने अपने उद्बोधन में भारत की विविध भाषाओं की समृद्ध परंपरा, विशेषताओं और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।





