एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी से तैयार होंगे जीने योग्य शहर 

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एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी से तैयार होंगे जीने योग्य शहर 

नीलिमा तिवारी

मध्य प्रदेश तेज़ी से बदलते भारत का एक उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है। औद्योगिक निवेश, अधोसंरचना विस्तार, स्मार्ट शहरों की परिकल्पना और ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर बढ़ता पलायन—इन सबके बीच राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती है संतुलित और सुनियोजित शहरी विकास। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी भविष्य के शहरों की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शहरीकरण की नई दिशा

प्रदेश के प्रमुख शहर—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर—तेज़ी से विस्तार कर रहे हैं। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण इन शहरों में आबादी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि यह विस्तार बिना योजना के होता है, तो यातायात जाम, अव्यवस्थित कॉलोनियां, जल निकासी की समस्या और हरित क्षेत्रों की कमी जैसी चुनौतियां सामने आती हैं।

एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी इसी अव्यवस्था को रोकने और विकास को वैज्ञानिक ढंग से संचालित करने की रूपरेखा प्रस्तुत करती है। यह नीति आवास, सड़क, जल, बिजली, सीवरेज, हरित क्षेत्र, सामाजिक अधोसंरचना और व्यावसायिक गतिविधियों को एक ही समेकित ढांचे में विकसित करने का प्रावधान करती है।

क्या है एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी?-

यह नीति निजी एवं सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से बड़े भू-खंडों पर सुव्यवस्थित टाउनशिप विकसित करने की अनुमति देती है। इन टाउनशिप में केवल मकान नहीं, बल्कि—

चौड़ी एवं नियोजित सड़कें

पार्क और हरित पट्टियां

स्कूल, अस्पताल और सामुदायिक भवन

जल संरक्षण एवं अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था

व्यावसायिक परिसर और रोजगार के अवसर

—इन सबका समावेश सुनिश्चित किया जाता है।

इस प्रकार यह नीति ‘रहने की जगह’ को ‘जीने योग्य शहर’ में परिवर्तित करने की परिकल्पना करती है।

सुनियोजित टाउनशिप विकास से रियल एस्टेट क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलती है। निर्माण कार्य, अधोसंरचना विकास और सेवा क्षेत्र में व्यापक रोजगार सृजित होते हैं। स्थानीय स्तर पर श्रमिकों, इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स और लघु उद्यमियों को अवसर मिलते हैं।

औद्योगिक निवेश के साथ यदि आवासीय और सामाजिक सुविधाएं भी विकसित हों, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। यही कारण है कि औद्योगिक कॉरिडोर और नई टाउनशिप एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं।

पर्यावरणीय संतुलन की प्राथमिकता

एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी में पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। वर्षा जल संचयन, सोलर ऊर्जा, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और हरित क्षेत्र का न्यूनतम प्रतिशत सुनिश्चित करने जैसे प्रावधान भविष्य के टिकाऊ शहरों की नींव रखते हैं।

जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच यह आवश्यक है कि विकास प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर किया जाए। नियोजित टाउनशिप में खुले क्षेत्र, साइकिल ट्रैक और पैदल पथ जैसी सुविधाएं जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाती हैं।

आवासीय संकट का समाधान

बढ़ती आबादी के साथ किफायती आवास की मांग भी बढ़ रही है। नीति के तहत विभिन्न आय वर्गों के लिए आवासीय इकाइयों का प्रावधान किया जाता है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग को भी सुनियोजित कॉलोनियों में रहने का अवसर मिलता है।

यह पहल अनियमित बस्तियों के विस्तार को रोकने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है। यदि लोगों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त सस्ती और सुरक्षित आवासीय व्यवस्था उपलब्ध हो, तो वे अवैध निर्माण की ओर नहीं बढ़ते।

यातायात और अधोसंरचना का समन्वय

नियोजित टाउनशिप शहर की मुख्य सड़कों और सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी होती हैं। इससे ट्रैफिक दबाव कम होता है और आवागमन सुगम बनता है। भविष्य में मेट्रो, बस रैपिड ट्रांजिट और अन्य परिवहन प्रणालियों के साथ समन्वय स्थापित करना भी आसान होता है।

साथ ही, भूमिगत बिजली के तार, सुव्यवस्थित सीवरेज नेटवर्क और स्मार्ट लाइटिंग जैसी सुविधाएं शहर की सुंदरता और सुरक्षा दोनों को बढ़ाती हैं।

सामाजिक समरसता और सामुदायिक जीवन

एकीकृत टाउनशिप केवल भवनों का समूह नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन का केंद्र होती है। सामुदायिक भवन, खेल मैदान, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए स्थान और बाजार क्षेत्र—ये सभी नागरिकों को जोड़ने का काम करते हैं।

जब लोग सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में रहते हैं, तो सामाजिक सद्भाव और नागरिक जिम्मेदारी भी मजबूत होती है।

हालांकि नीति सुनियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता, समयबद्ध स्वीकृति प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण आवश्यक है।

भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृति और बुनियादी ढांचे के समन्वय जैसे विषयों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे और मध्यम शहरों को भी समान अवसर मिले।

भविष्य की राह

मध्य प्रदेश का लक्ष्य केवल शहरी विस्तार नहीं, बल्कि स्मार्ट, समावेशी और सतत विकास है। एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी इसी दिशा में एक दूरदर्शी पहल है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश के शहरों की तस्वीर बदल सकती है।

यदि इस नीति का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन होता है, तो प्रदेश के शहर न केवल आधुनिक अधोसंरचना से सुसज्जित होंगे, बल्कि रहने के लिए अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और पर्यावरण-अनुकूल भी बनेंगे।

अंततः, सुनियोजित विकास ही वह आधार है जिस पर समृद्ध समाज और सशक्त अर्थव्यवस्था का निर्माण होता है। मध्य प्रदेश की एकीकृत टाउनशिप पॉलिसी इसी उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सशक्त कदम है—जहां विकास केवल निर्माण नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता का विस्तार बनकर सामने आता है।

(गजानंद फीचर सर्विस)