राजा बख्तावर नल-जल योजना पर हेडओवर का संकट, होली से पहले पानी की जरूरत,  पीएचई–पंचायत आमने- सामने

कर्मचारी हड़ताल पर, जल आपूर्ति पर मंडराया खतरा

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राजा बख्तावर नल-जल योजना पर हेडओवर का संकट, होली से पहले पानी की जरूरत,  पीएचई–पंचायत आमने- सामने

ग्राउंड रिपोर्ट : गोपाल खंडेलवाल – अमझेरा

भरपूर जल स्रोत उपलब्ध होने के बावजूद अमझेरा नगर आने वाले दिनों में गंभीर जल संकट की ओर बढ़ सकता है। खासतौर पर होली जैसे प्रमुख त्योहार के दौरान पानी की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए हालात और चिंताजनक होते जा रहे हैं। नगर की मुख्य राजा बख्तावर नल-जल योजना का हेडओवर (हस्तांतरण) विवाद अब प्रशासनिक टकराव में बदल चुका है।

एक ओर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) है तो दूसरी ओर ग्राम पंचायत अमझेरा। निर्णय अधर में है, कर्मचारी हड़ताल पर हैं और इसका सीधा असर नगर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ने लगा है।

राजा बख्तावर नल-जल योजना की कार्य अवधि पूरी हो चुकी है। पीएचई विभाग का कहना है कि शासन के निर्देशों के अनुसार अब योजना का संचालन ग्राम पंचायत को सौंपा जाना है। वहीं ग्राम पंचायत अमझेरा का दावा है कि योजना आज भी पूरी तरह तैयार नहीं है और ऐसी स्थिति में इसका हेडओवर लेना जोखिम भरा साबित हो सकता है।

होली पर्व के मद्देनजर नगर में पानी की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है, लेकिन हेडओवर विवाद के चलते नल-जल योजना से जुड़े कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिला है। वेतन भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों ने शुक्रवार से हड़ताल शुरू कर दी, जिससे जल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो गई है। त्योहार के समय पानी की किल्लत की आशंका ने नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है।

राजा बख्तावर नल-जल योजना से अमझेरा नगर के 20 वार्डों के लगभग 2300 परिवारों को मेस्को डेम से फिल्टर कर पाइपलाइन के माध्यम से पानी सप्लाई किया जाता है। पिछले पांच वर्षों से योजना का संचालन और देखरेख पीएचई विभाग के पास थी। अब हस्तांतरण नहीं होने से पूरा सिस्टम अनिश्चितता की स्थिति में पहुंच गया है।

ग्राम पंचायत ने योजना को लेकर गंभीर तकनीकी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पंचायत का कहना है कि कई क्षेत्रों में अब तक पाइपलाइन नहीं डाली गई है, अनेक स्थानों पर लीकेज की समस्या है, एरिया अनुसार लगाए गए वाल्व तकनीकी रूप से खराब हैं और योजना के रखरखाव के लिए कोई अलग मेंटेनेंस फंड की व्यवस्था नहीं की गई है।

 

“12 लाख जुटाए थे सरकार ने दिए 5 करोड़”

इस योजना के लिए ग्रामीणों द्वारा लगभग 12 लाख रुपये की राशि जुटाकर शासन को जमा की गई थी, जिसके बदले शासन ने करीब 5 करोड़ रुपये की नल-जल योजना स्वीकृत की। विभाग का कहना है कि ग्रामीणों की 10 लाख रुपये की राशि जमा है और शेष लौटा दी गई है, जबकि पंचायत का तर्क है कि योजना के नियमित संचालन और मेंटेनेंस के लिए कोई स्थायी फंड नहीं दिया गया है।

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पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अधूरी बताई जा रही योजना का हेडओवर कैसे किया जाए, कर्मचारियों का वेतन कौन देगा और यदि होली जैसे पर्व पर जल संकट गहराया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। यदि शीघ्र ही पीएचई विभाग, ग्राम पंचायत और जिला प्रशासन के स्तर पर ठोस व स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया, तो अमझेरा में त्योहार के बीच पानी होते हुए भी लोग प्यासे रहने को मजबूर हो सकते हैं।

वर्जन

नवलसिंह भूरिया,

एसडीओ, पीएचई विभाग, सरदारपुर—

“योजना की अवधि पूरी हो चुकी है। शासन के आदेश अनुसार अब ग्राम पंचायत को इसका संचालन करना है। यदि कहीं कोई तकनीकी कमी है तो उसे दुरुस्त कर दिया जाएगा।”

गोपाल कुमावत,

सचिव, ग्राम पंचायत अमझेरा—

“नल-जल योजना का कार्य आज भी कई जगह अधूरा है। कई स्थानों पर पाइपलाइन नहीं है और अनेक जगह लीकेज है। ऐसी स्थिति में हेडओवर लेना संभव नहीं है। इस संबंध में विभाग को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है।”