
अब रोशनी बिखेरेगा, सीपत सुपर थर्मल पावर का ‘विकल्प’ अभियान…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
सीपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले के सीपत में स्थित है। यह पावर प्लांट एनटीपीसी के कोयला आधारित पावर प्लांटों में से एक है। इस पावर प्लांट के लिए कोयला साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की दीपिका माइंस से प्राप्त किया जाता है। सीपत सुपर थर्मल पावर प्लांट की कुल स्थापित क्षमता 2980 मेगावाट है और यह दो चरणों में पूरी की गई। पहले चरण में सुपर-क्रिटिकल बॉयलर तकनीक से युक्त 660 मेगावाट की तीन इकाइयाँ शामिल थीं, जबकि दूसरे चरण में 500 मेगावाट की दो इकाइयाँ शामिल थीं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 20 सितंबर, 2013 को सीपत तापीय विद्युत संयंत्र का उद्घाटन किया था। छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक ऊर्जा उत्पादन करने वाला यह संयंत्र एनटीपीसी इकाइयों के उत्पादन की दृष्टि से सीपत परियोजना का वर्तमान में तीसरा स्थान है। इस परियोजना से महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, दमन एवं दीव, जम्मू एंड कश्मीर और दादरा एवं नगर हवेली को विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित एनटीपीसी की पहली 800 मेगावाट की इकाई यहाँ तृतीय चरण (स्टेज-III) के अंतर्गत निर्माणाधीन है। इसका भूमिपूजन 30 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। इसके साथ ही सीपत थर्मल पावर जनरेशन का सिरमौर बन जायेगा। परिसर में 26 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर एवं 2.3 मेगावाट ग्राउंड माउंटेड सोलर परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। सीपत थर्मल पावर प्रोजेक्ट एनर्जी लीडर है। और अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार पुरस्कारों से नवाजा जाता रहा है।
यह तो हुआ देश के विभिन्न राज्यों को रोशन करने वाला एनटीपीसी थर्मल पावर प्लांट सीपत का एक पहलू। पर इससे भी बड़ा पहलू है सामाजिक सरोकारों का। सोशल कॉर्पोरेट रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत सीपत थर्मल पावर प्लांट आठ गाँवों में जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। और इसके आसपास करीब तीन दर्जन गाँवों में भी मूलभूत सुविधाओं को जुटाने में पूरा सहयोग कर रहा है। बालिका सशक्तिकरण, युवाओं को रोजगार प्रशिक्षण,
स्वास्थ्य, खेल, शिक्षा सहित वृक्षारोपण, तालाबों की सेहत सुधारना, टॉयलेट निर्माण, सड़क निर्माण सहित सभी कार्यों को सीपत प्लांट दायित्व मानकर पूरा कर रहा है। इन दायित्वों को पूरा करने के साथ, अब सीपत थर्मल प्लांट ने पूरे देश में एक नई रोशनी बिखेरने का काम शुरू कर दिया है। और सीपत, थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन ने इसको नाम दिया है ‘विकल्प’। एनटीपीसी सीपत ने लगातार तीन वित्त वर्षों 100 प्रतिशत से अधिक ऐश यूटिलाइजेशन दर्ज किया गया है। जल की खपत कम करने और धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से ड्राई फ्लाई ऐश उपयोगिता में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। इसके अतिरिक्त राख के 100 प्रतिशत उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न नवाचार अपनाए गए हैं, जिनमें लाइट वेट एग्रीगेट्स, लो-कॉस्ट ग्रीन हाउस, जियोपॉलीमर कंक्रीट रोड, एंगुलर ऐश बेस्ड एग्रीगेट्स आदि शामिल हैं। इसी क्रम में राख-आधारित “ईको-हाउस” का निर्माण भी किया गया है, जो किफायती एवं हरित आवास का एक मॉडल प्रस्तुत करता है। नवाचारों के तहत सीपत इकाई फ्लाईएस और सीमेंट के उपयोग से गिट्टी निर्माण शुरू कर रही है। और गहन अनुसंधान के साथ पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण की दिशा में कदम आगे बढ़ा रही है। इस दिशा में बृहद स्तर पर सफलता मिलने पर सीपत थर्मल पावर प्लांट की उपलब्धि ‘विकल्प’ के जरिए रोशनी बिखेरने के रूप में दर्ज की जाएगी। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ आए पीआईबी के प्रेस टूर के पांचवें दिन पत्रकारों ने सीपत पावर प्लांट का अवलोकन किया। पीआईबी भोपाल के असिस्टेंट डायरेक्टर पराग मांडले के नेतृत्व में जब टीम एनटीपीसी सीपत पहुँची, तो जीएम ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस सुरोजित सिन्हा ने परियोजना का विस्तृत परिचय देते हुए ‘विकल्प’ को लेकर जो उत्साह दिखाया वह नई ऊर्जा भरने वाला था। उनकी पूरी टीम जीएम ऑपरेशन अशोक सरकार, जीएम इंजीनियरिंग विकास खरे तथा अपर महाप्रबंधक (मेंटिनेंस) अनुराग गौतम ने जानकारियाँ भी साझा की और ‘विकल्प’ को बेहतर भविष्य की नीव बताया।
प्रेस टूर के पाँचवें दिन महामाया मंदिर टीम ने बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्थित महामाया मंदिर के दर्शन भी किए।
यह देवी दुर्गा, महालक्ष्मी को समर्पित एक मंदिर है और पूरे भारत में फैले 52 शक्ति पीठों में से एक है। इस प्राचीन मंदिर के पास तालाब हैं। परिसर के भीतर शिव और हनुमान जी के मंदिर भी हैं। परंपरागत रूप से महामाया रतनपुर राज्य की कुलदेवी हैं। मंदिर का जीर्णोद्धार वास्तुकला विभाग द्वारा कराया गया है।
तो यही उम्मीद है कि सीपत सुपर थर्मल पावर का ‘विकल्प’ अभियान भारत के भविष्य को नई रोशनी से भरेगा। और जितनी उपलब्धियां थर्मल पावर के रूप में सीपत प्लांट को मिली हैं, उससे ज्यादा उपलब्धियाँ ‘विकल्प’ के तहत पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण के रूप में सीपत थर्मल प्लांट को मिलेंगी…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





