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IFS एसोसिएशन के व्हाट्सअप ग्रुप से जारी हुए हॉफ के हवाले से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी डीएफओ सीएफ और सीसीएफ को निर्देश दिया जाता है कि वे अगले दो दिनों के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र में लंबित सभी अदालती मामलों की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, हॉफ, पीसीसीएफ और सचिव/ को प्रतिवादियों की सूची से तुरंत हटा दिया जाए।

यदि यह संभव न हो, तो कार्यवाहक अधिकारी (OIC) को नियुक्त करें और उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दें ताकि अवमानना या अवमानना से उत्पन्न किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। निर्देश में कहा गया है कि यह कार्रवाई तुरंत की जाए अन्यथा संबंधित के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे में अब सवाल यह है कि नियमों की अनदेखी कर मनमानी बड़े अफसर करें और सीसीएफ,सीएफ -डीएफओ कानूनी पचड़े से बाहर निकाले।
*क्यों जारी करना पड़े निर्देश?*
वन भवन से सीसीएफ-सीएफ मुख्यालय तक चर्चा है कि रेंजर्स प्रभार मामले में तत्कालीन ACS फारेस्ट और तत्कालीन APCCF प्रशासन -दो कमलिका मोहन्ता हाई कोर्ट जबलपुर की अवमानना मामला झेल रहे हैं। इसके लिए व्हाट्सअप ग्रुप पर हॉफ के नए निर्देश जारी करने पड़े। मप्र कर्मचारी कांग्रेस के अध्यक्ष मुनेन्द्र सिंह ने न्यायालय में अवमानना की याचिका दायर कर रखी है।