
नगरीय निकायों में अब डिजिटल पार्किंग, रसीद कट्टे होंगे बंद, फास्टटैग और ANPR का होगा उपयोग
भोपाल: मध्यप्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सभी सार्वज्निक स्थलों पर ठेके पर और सरकारी स्तर पर चलने वाली पार्किंग व्यवस्था अब पूरी तरह कैशलेश और डिजिटल होगी। रसीद कट्टे से शुल्क वसूली पूरी तरह बंद की जाएगी। पार्किंग में फास्टटैग और आटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम लागू किया जाएगा।पॉस मशीन कंपलशरी होगी, नगद में कोई पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाएगा।
दरअसल निजी संस्थाओं और व्यक्तियोें द्वारा शहरी क्षेत्रों में हाट-बाजार, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैड, बड़े शॉपिंग माल, व्यावसायिक क्षेत्रों में नगर निगम और नगर पालिकाओं से ठेके लिए जाते है। लेकिन इन ठेकों से निकायों को पर्याप्त राजस्व नहीं मिल रहा है। फर्जी रसीद कट्टों का उपयोग कर अवैध रुप से पार्किंग शुल्क वसूला जाता है। कई बार ठेका नहीं होंने पर भी निजी व्यक्ति वहां अपने आदमी लगाकर पार्किंग शुल्क वसूलते रहते है। इससे निकायों को हर साल भारी राजस्व घाटा उठाना पड़ रहा है। वहीं पार्किंग में तैनात अमले द्वारा अक्सर वाहन स्वामियों के साथ विवाद किया जाता है। पार्किंग स्थलों पर वाहनों की सुरक्षा और सीमेंट-कांक्रीटिंग, बारिश, धूप से बचाव के पर्याप्त प्रबंध भी नही किए जाते। इस सबपर शिकंजा कसने के लिए नगरीय प्रशासन विभाग प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में पार्किंग को पूरी तरह कैशलैश करने जा रहा है। इसकी शुरुआत राजधानी भोपाल से होगी। भोपाल स्मार्ट सिटी कारपोरेशन इसका क्रियान्वयन नगर निगम के सहयोग से करेगा।
*फास्टटैग, आटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्नीशन से जुड़ेंगे वाहन-*
जितने भी चार पहिया वाहन है वे फास्टटैग से जुड़े हुए है। पार्किंग में भी फास्टटैग का उपयोग करके वाहनों से पार्किंग शुल्क की वसूली की जाएगी। दुपहिया वाहनों को आटोमेटिक नंबर प्लेट रिक्ग्नीशन (ANPR)सिस्टम से जोड़ा जाएगा। वाहनो के नंबर रीड कर इसके जरिए शुल्क लिया जाएगा। पार्किंग ठेकों में रसीद कट्टों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। सभी को पार्किग शुल्क की वसूली पीओएस मशीन के जरिए करनी होगी। इससे फर्जी रसीद कट्टों के जरिए अवैध वसूली पर पूरी तरह लगाम लगेगा। पार्किंग शुल्क पूरी तरह कैशलेश, डिजिटल हो जाएगा। शहर के बैंको को भी इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा। बैंक इसमें रीडर और अन्य उपकरण पार्किंग में उपलब्ध कराएंगे। अगले पंद्रह दिन के भीतर इस प्रोजेक्ट पर अमल शुरु किया जाएगा।
ऐसे हो रहा नुकसान-
भोपाल नगर निगम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में पार्किंग से होंने वाली आय के लिए तीन करोड़ रुपए का वार्षिक राजस्व तय किया गया था। लेकिन इस लक्ष्य के विरुद्ध केवल डेढ़ करोड़ रुपए ही प्राप्त हुए। इंदौर में पीपीपी मॉडल पर आधारित पार्किंग स्थलों से निगम को प्रतिवर्ष तीस लाख रुपए ही मिल रहे है। उज्जैन मे तीन पार्किंग ठेकोें से निगम को पांच लाख रुपए की आय हुई है। यहां 19 पार्किंग ठेके है लेकिन ठैकेदारों की मोनोपाली के चलते राजस्व आय पर्याप्त नही मिल पा रही है।





