
त्वरित टिप्पणी-
Bengal Results: बंगाल में मोदी का क्रांतिकारी राज,डॉ मुखर्जी का सपना साकार
आलोक मेहता
आजादी के बाद यह एतिहासिक अवसर है, जबकि घोषित हिन्दुत्व के नारे के साथ विधान सभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भारी बहुमत मिला | हाल ही में आई मेरी एक किताब ‘ रेवलूशनेरी राज , नरेंद्र मोदी के 25 साल ‘ आने पर कुछ संपादकों ने शीर्षक को लेकर सवाल किए थे कि मोदी की सत्ता को ‘ क्रांति ‘ कैसे कहा जा सकता है | ऊनका इशारा चीन रूस या अन्य देशों में कम्युनिस्टों की क्रांति या भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी प्रयासों की ओर था | तब मैंने जो उत्तर दिया , वह अब बंगाल में ममता बनर्जी की टी एम सी या कम्युनिस्ट / काँग्रेस की पराजय से साबित हो गया | मेरा मानना है कि पंचायत , नगर पालिका निगम , विधान सभा , लोक सभा में करोड़ों लोग वोट के माध्यम से सत्ता बदलना और बनाना ही लोकतान्त्रिक क्रांति है | फिर नरेंद्र मोदी अमित शाह के नेत्रत्व में जिस भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल में सफलता पाई है , उसके मूल संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा को मजबूत करने के लिए जनसंघ की स्थापना राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहयोग से किया था | डॉ मुखर्जी ने जम्मू कश्मीर में संविधान की धारा 370 के विरोध में 1953 में कश्मीर जाकर आंदोलन किया और काँग्रेस सरकार के जुल्म से जेल में ऊनका बलिदान हुआ | मोदी सरकार ने पहले ही संसद में उस धारा को खत्म कर लोकतान्त्रिक चुनाव करवा दिए हैं |
इसमें कोई शक नहीं कि बंगाल में करीब 25 साल के कम्युनिस्टों की सरकार से संघर्ष कर ममता बनर्जी सत्ता में आई , लेकिन 15 वर्षों के दौरान भ्रष्टाचार और अत्याचार की पराकाष्ठा हो गई |ममता ने राजनीति के लिए काँग्रेस और भारतीय जनता पार्टी का साथ भी लिया था | फिर अब तो दिल्ली में लाल किले पर झण्डा फहराने यानी केंद्र में सत्ता में आने के सपने सँजो रही थी | लेकिन असामाजिक तत्वों और आपराधिक तरीकों ने जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो दी | दिलचस्प बात यह है कि केंद्र में सत्ता और मोदी के विरोध के लिए ममता राहुल गांधी और कम्युनिस्टों kए कथित गठबंधन के नेता हर दिन रात गिरगिट की तरह लाल हरा सफेद रंग बदलते थे | एक स्थान पर विरोध और दूसरे स्थान पर समर्थन की बातों ने हास्यास्पद स्थिति बना दी | बंगाल , केरल के चुनावी बयान इसके प्रमाण हैं |

इस बार के चुनावों का दूसरा क्रांतिकारी पहलु यह है कि अब भारत के किसी कोने में कमुनिस्टों का राज नहीं रहा और न ही भविष्य में होने की दूर दूर तक संभावना नहीं है | 1957 से केरल , बंगाल , त्रिपुरा जैसे राज्यों में कमुनिस्टों को कई बार जीत हार मिली | केरल में दस साल के निकम्मे भ्रष्ट कम्युनिस्ट राज से तंग जनता ने काँग्रेस गठबंधन को चुन लिया | भाजपा की रणनीति में केरल तमिलनाडु आने वाले वर्षों के लिए जमीन तैयार करने की रही है | यही कारण है कि नरेंद्र मोदी अमित शाह ने राष्ट्रवाद , हिन्दुत्व ,भारतीय भाषाओं के मुद्दों का विरोध करने वाली द्रमुक को सत्ता से हटाने के लिए लगातार जोरदार अभियान चलाया | द्रमुक की पराजय से तमिलनाडु की पुरानी राजनीति की तरह तमिल अभिनेता विजय की नई पार्टी टी वी के को जनता ने स्वीकार कर लिया | एम जी आर करुणानिधि जयललिता के बाद यह विजय का फिल्मी जादू तमिलनाडु के लोगों की तरक्की की उम्मीदों से जुड़ा है |
सुदूर असम में भी भाजपा ने एक इतिहास रच दिया | दशकों से सत्ता के अहंकार में रहने वाली काँग्रेस को इस बार जड़ से उखाड़ दिया | हिमन्त बसवा सरमा वैसे काँग्रेस से ही राहुल गांधीं का विरोध कर भाजपा में ये थे | लेकिन भाजपा के मुख्यमंत्री के रूप में विकास और हिन्दुत्व की नीतियों , बंगलादेशी मुस्लिम घुसपैठियों को निकालने के अभियान से जनता में भारी विश्वास अर्जित कर लिया | हाँ अब असम , बंगाल में भाजपा सरकारों को वायदे पूरे करने , सामाजिक आर्थिक कल्याण कार्यक्रम तेजी से लागू करने और भ्रष्टाचार अत्याचार रोकने के लिए हर संभव कदम उठाने पड़ेंगे | तभी 2047 में विकसित भारत का मोदी का सपना साकार होगा |





