सत्ता जाने के बाद सच समझाती ममता की कविता ‘अकेले आए थे, अकेले ही जाना होगा’…

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सत्ता जाने के बाद सच समझाती ममता की कविता ‘अकेले आए थे, अकेले ही जाना होगा’…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

सत्ता बहुत बड़ी ठगिनी है। जब तक पास रहती है तब तक उदास नहीं होने देती। और जब छोड़कर जाती है, तो खुश रहने की कोई आस भी पास में छोड़कर नहीं जाती। और यह भी तय है कि सत्ता किसी के हिस्से में स्थायी रूप से नहीं आती। जिन्दगी की तरह सत्ता भी आनी जानी है, लेकिन जब तक सत्ता रहती है तब तक यह अहसास भी नहीं होता कि सत्ता जा भी सकती है। ठीक उसी तरह कि जब तक जिंदगी रहती है तब तक हम यह भी नहीं सोच पाते कि मौत का भी अस्तित्व है। फिलहाल सच से मुकाबला पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कर रही हैं। वहीं, ममता बनर्जी, जो अभी तक खुद को पूर्व भी स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। और जिन्होंने हारने के बाद भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देकर एक इतिहास रचा है। पर सत्ता और सच्चाई से दूरी बहुत समय तक फील गुड नहीं करा पाती है। और यही हाल सच से सामना कर रही ममता बनर्जी का है। सत्ता जाने के बाद जब डरावने सच से मुकाबला हुआ तब ममता ने कविता के जरिए अपना दर्द बयां किया है कि ‘अकेले आए थे अकेले ही जाना होगा’। यह बात और है कि वह खुद की हार के लिए चुनाव आयोग की निर्ममता को दोषी ठहराकर सुकून की तलाश में जुटी थी, लेकिन अन्ततः सच सामने है कि सत्ता ने ममता के संग छलावा कर ही दिया है और अब कविता के जरिए मन की बात कर वह सुकून की तलाश में हैं।

ममता बनर्जी ने अपनी कविता का शीर्षक ‘साहसी’ (ब्रेव) दिया है। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने यह कविता लिखकर 12 मई 2026 को इंटरनेट मीडिया पर साझा की है। उन्होंने लिखा- ‘साहसी और मजबूत बनो, अगर तुम हमेशा आत्मविश्वास से भरे रहोगे, तो कोई तुम्हें छू भी नहीं सकेगा। तुम्हारी ताकत तुम्हारे भीतर है…। जब तुम जन्मे थे, तब अकेले आए थे और जब मृत्यु होगी तब भी अकेले ही जाना होगा। तुम्हारे अच्छे कर्म हमेशा जिंदा रहेंगे, अपने अच्छे कामों पर विश्वास रखो।

दरअसल तृणमूल सुप्रीमो ममता और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक ने पार्टी की इंटरनेट मीडिया टीम के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर समर्पित इंटरनेट मीडिया योद्धाओं से संगठन को मजबूत बनाने के साथ-साथ जनता तक पार्टी की बात प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर चर्चा की। और मूल मुद्दा मनोबल बनाए रखने का है, चाहे इसे कार्यकर्ताओं से जोड़कर देख लिया जाए या फिर खुद सत्ता के शीर्ष पर रही ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक से जोड़कर। कविता के जरिए उन्होंने हार से निराश अपने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के साथ यह भी सीख दी है कि इस दुनिया में लोग अकेले ही आते हैं और उन्हें अकेले ही इस दुनिया से रुखसत भी करना पड़ता है। सोशल मीडिया पर वायरल कविता के जरिए संदेश दिया है कि असली ताकत इंसान के भीतर होती है। “बहादुर और मजबूत बनो। अगर आपको खुद पर भरोसा है, तो आपको दुनिया की कोई ताकत छू नहीं सकती। आपकी ताकत आपके भीतर है, इसे गरिमा के साथ बनाए रखें। कायर हमेशा कायर ही रहेंगे, लेकिन मजबूत लोग हमेशा टिके रहते हैं। मुश्किलों का सामना हमेशा मुस्कुराहट के साथ करें, आपकी मुस्कान ही आपकी शक्ति है।” तो राजनीति भी ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जो सत्ता से बाहर हुए लोगों को

सच का अहसास कराने में कोई कसर भी नहीं छोड़ता। विरोधी तो अहसास कराते ही हैं, लेकिन खुद अपने भी आइना दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। पश्चिम बंगाल चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जबरदस्त जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं और अधिकारियों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बोलना शुरू कर दिया है। तृणमूल ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कोहिनूर मजूमदार, रिजु दत्ता और कार्तिक घोष सहित कई प्रवक्ताओं को छह साल के लिए निलंबित भी कर दिया है। इसके बाद टीएमसी खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसे में ममता बनर्जी की यह कविता पार्टी को एकजुट रखने की एक कोशिश भी नजर आ रही है। वहीं दूसरी तरफ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद पश्चिम बंगाल के समकक्ष शुभेंदु अधिकारी के साथ एक तस्वीर पोस्ट की है। हालांकि, तस्वीर से ज्यादा चर्चाएं उनके कैप्शन की हो रही हैं, जिनमें उन्होंने ‘बुरे दिनों’ का जिक्र किया है। सरमा की तरफ से शेयर की गईं तस्वीरें शपथ ग्रहण समारोह की हैं। उन्होंने लिखा, ‘बुरे दिन…(आप जानते हैं किसके लिए)।’ इस पर अधिकारी ने जवाब दिया, ‘अंदाजा लगाने के लिए कोई इनाम नहीं मिलेगा, मुझे ऐसा ही लगता है।’ खास बात है कि दोनों ही नेताओं ने अपनी पोस्ट में यह साफ नहीं किया है कि संदेश किसे लेकर था। पर यह तो समझा ही जा सकता है कि ममता इन दोनों के संदेश का सही किरदार नजर आ रही हैं। हालांकि हिमंत के मामले में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा निशाने पर हैं। खेड़ा के खिलाफ असम क्राइम ब्रांच की कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। पवन खेड़ा 13 मई 2026 को असम पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए। रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमों के सिलसिले में उनसे पूछताछ की गई। आगामी दिनों में ऐसा कुछ ममता के साथ ही देखा जा सकता है।

खैर, यही कहा जा सकता है कि सत्ता में रहते हुए भी अगर व्यक्ति सच से दूरी ना बनाए तो सत्ता जाने के बाद भी उसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इसे कल्पना मात्र माना जा सकता है या फिर इसमें कोई बिरला ही अपवाद बनकर उदाहरण पेश करने में सफल हो पाता है। बाकी तो सत्ता से जाने के बाद ही यह अहसास होता है कि दुनिया में अकेले ही आए थे और अकेले ही जाना है… हालांकि यह सच हम और आप सभी के लिए भी है और बड़े ही दुख की बात है कि हमें भी कम से कम इस बात का अहसास कभी नहीं हो पाता है कि ‘ अकेले ही आए थे और अकेले ही जाना होगा’।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।