
Villagers Do Shramdaan to Clean Pond : पारंपरिक हलमा से तालाब पुनर्जीवन का संदेश 269 ग्रामीणों ने किया श्रमदान!
Ratlam : जिले की घोड़ा खेड़ा पंचायत के ग्राम रामपुरिया में शनिवार को समुदाय की सहभागिता से पारंपरिक हलमा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गांव के पुराने तालाब में लंबे समय से गाद भर जाने तथा अनचाही घास उग जाने की वजह से जल भंडारण एवं संरक्षण प्रभावित हो रहा था। समाधान के लिए पूर्व में वाग्धारा संस्था एवं ग्राम स्वराज समूह के सहयोग से “हलमा संवाद” आयोजित किए गए थे, जिनमें तालाब की साफ-सफाई एवं पुनर्जीवन के लिए सामूहिक सहमति बनी थी। इसी क्रम में रामपुरिया, घोड़ा खेड़ा एवं बगली गांवों के ग्रामीण पारंपरिक ढोल-मांदल, लोकगीतों और सांस्कृतिक उत्साह के साथ हलमा स्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान करते हुए तालाब में उगी घास की सफाई की, गाद निकाली तथा तालाब को पुनर्जीवित करने का कार्य किया।

इस प्रयास का उद्देश्य वर्षा जल का अधिक समय तक संचयन सुनिश्चित करना है, जिससे आसपास के किसान साथियों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो सके तथा तालाब के निकट स्थित कुओं का जलस्तर भी बना रहें। कार्यक्रम के दौरान समुदाय में आपसी सहयोग, एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी की अनूठी मिसाल देखने को मिली। श्रमदान के बीच ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से भोजन तैयार किया तथा खाखरे के पत्तों से बनी पत्तलों में दाल-चावल का भोजन ग्रहण किया। आयोजन में 269 बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों एवं पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। हलमा के माध्यम से ग्रामीणों ने न केवल जल संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि सामुदायिक सहयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित की। कार्यक्रम के दौरान वाग्धारा के इकाई लीडर धर्मेंद्र सिंह चुंडावत ने जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल बचाना आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। वहीं वाग्धारा की ब्लॉक सहजकर्ता रेणुका पोरवाल ने हलमा की परंपरा, सामूहिक श्रमदान और समुदाय की भागीदारी के महत्व पर विस्तार से संवाद किया।

फुलजी भूरिया, झालू भूरिया, कालू भूरिया, सोहन भूरिया, सोनू भूरिया, पार्वती भूरिया, जमना भूरिया, राजूबाई भूरिया, हुकला भूरिया, शांति लाल भूरिया, लालू भूरिया, कूदर भूरिया, मीरा भूरिया, लिमजी भूरिया, धापू भूरिया, हुर्रा भूरिया, गुड्डी बाई मुनिया, खुमा बाई मुनिया, लूंजी बाई खराड़ी, कांता बाई डोडियार, मुकेश सिंगाड, कैलाश भूरिया, शांति भूरिया पटेल, सहजकर्ता आभा चरपोटा, बालाराम चरपोटा, प्रवीण चरपोटा, कपिल वसुनिया, मगन भूरिया, अनिल कटारा एवं रमेश चरपोटा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहें। हलमा कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि जल स्रोतों का संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव हैं, संचालन काली भूरिया द्वारा किया गया!





