राज्यसभा की रणभेरी: मप्र में खरगे वाला फार्मूला चला तो दिग्विजय !

50

राज्यसभा की रणभेरी: मप्र में खरगे वाला फार्मूला चला तो दिग्विजय 

आशीष दुबे

 

हाल में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद अब 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव का बिगुल बजते ही राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी है। हालांकि इस चुनाव में समीकरणों के हिसाब से ओवरआल नतीजों में भाजपा का ‘अपर हेंड’ माना जा रहा है। मप्र समेत कुछ राज्यों में कांग्रेस के लिए हालात ज्यादा पेचीदा होने के आसार हैं। यद्यपि एनडीए को राज्यसभा की एक सीट गंवानी पड़ सकती है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष को तीन सीटों का फायदा होने की भी उम्मीद है।
मप्र में सरगर्मी की वजह खुद कांग्रेस द्वारा जताई गई यह आशंका है, कि भाजपा एक अतिरिक्त सीट जीतने के लिए ‘आपरेशन’ चला सकती है। कांग्रेस को मप्र में अपना उम्मीदवार जिताने के लिए 57 वोटों की दरकार होगी, हालांकि उसके पास 63 वोट (विधायक) हैं, मगर इनमें से एक बीना विधायक निर्मला सप्रे को पार्टी के भीतर ही कमजोर कड़ी माना जा रहा है, वजह यह कि वे भाजपा के मंच पर भी नजर आ चुकी हैं और भाजपा के दफ्तर में भी। इसके अलावा मुकेश मल्होत्रा के पास वोट का अधिकार नहीं है, जबकि दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता जाती रही है। भाजपा यदि कांग्रेस की एक सीट को छीनने का प्रयास करती है तो उसे आधा दर्जन से ज्यादा विधायकों की (क्रास वोटिंग) जरूरत होगी, भाजपा में एक उच्च पदस्थ सूत्र का कहना है- अभी दिल्ली से इस बारे में कोई संकेत या संदेश नहीं हैं, यदि हाईकमान कोई निर्णय लेता है, तभी कोई अतिरिक्त प्रयास हो सकते हैं।
इधर कांग्रेस के पास अपनी एक सीट बचाने के लिए विधायकों को लामबंद रखने की चुनौती है, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार खुद काफी पहले भाजपा के ‘आपरेशन’ की आशंका जता चुके हैं। कांग्रेस के एक सूत्र का कहना है कि भाजपा की फितरत देखते हुए यह जरूरी होगा कि पार्टी किसी मजबूत नेता को मैदान में उतारे। यानी संकेत साफ हैं कि दिग्विजय सिंह या कमलनाथ जैसे किसी नेता की उम्मीदवारी से ही ‘वोटों’ को संभाला जा सकेगा। ऐसे में निवर्तमान सांसद दिग्विजय सिंह की तीसरी बार राज्यसभा की राह भी खुल सकती है, ताकि वे वोटों का बिखराव संभाल सकें। हालांकि कांग्रेस हाईकमान दो बार से ज्यादा किसी नेता को राज्यसभा में भेजने के पक्ष में नहीं है, लेकिन मप्र के समीकरण के अलावा एक अन्य पहलू गौरतलब है। दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का राज्यसभा कार्यकाल भी खत्म हो रहा है, वे तीसरी बार राज्यसभा जाएंगे तो दिग्विजय के लिए भी राह खुल सकती है। बहरहाल, चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव का विस्तृत कार्यक्रमजारी कर दिया है। इसमें 8 जून बेहद अहम होगी, क्योंकि यह नामांकन का दिन है। माना जा रहा है कि सभी प्रमुख दल उम्मीदवार मामले में अपने पत्ते इसी दिन के आसपास खोलेंगे।
इनसेट/
देशभर की कुल 26 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हैं, उनमें एनडीए के पास अभी 18 और कांग्रेस के पास चार सीटें हैं, जबकि एक सीट जेएमएम के पास और तीन सीटें वायएसआरपी के पास हैं। भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए को 17 सीटें मिलने की संभावना है, कांग्रेस को पांच, जेएमएम को दो और टीवीके को एक सीट मिलेगी। राज्यसभा के 244 सदस्यों वाले उच्चसदन में अभी एनडीए के पास 149 सांसद हैं, जबकि विपक्ष के पास 78 और गैर-गठबंधन वाले क्षेत्रीय दलों के पास 17 सांसद हैं। तमिलनाडु में एनडीए की एक सीट कम होगी, वहां एआईएडीएमके की सीट सत्ताधारी पार्टी टीवीके को मिल सकती है। जबकि आंध्र में चारों सीटें एनडीए को, गुजरात में भी चारों सीटे भाजपा-एनडीए को मिलना तय माना जा रहा है। जबकि झारखंड में में दो सीटें हैं व दोनों जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन को मिलने की संभावना है।