
रिटायरमेंट के 22 महीने बाद पूर्व IFS अधिकारी दिलीप कुमार को मिली क्लीनचिट
गणेश पांडे की रिपोर्ट
भोपाल। भारतीय वन सेवा में 1990 बैच के IFS अधिकारी डॉ दिलीप कुमार को राज्य शासन ने रिटायरमेंट के 22 महीने बाद क्लीनचिट दी है।
डॉ कुमार पर लगे आरोप के संदर्भ में तत्कालीन प्रबंध संचालक का ऐसा कोई भी पत्र एवं बयान नहीं लगाया गया है, जो कि प्रमाणित करता हो कि पुस्तकों का प्रकाशन संघ मुख्यालय के बिना जानकारी के किया गया है।को दोषमुक्त किया गया। राज्य शासन द्वारा जारी दोषमुक्त आदेश में कहा गया है कि डॉ कुमार द्वारा लिखी गयीं तीन पुस्तकें वन विभाग के खोजकर्ताओं, नीति-निर्धारकों, जैव-विविधता संरक्षणकर्ताओं, प्रकृति प्रेमियों आदि के लिए उपयोगी है, प्रकाशक द्वारा अनुबंध लेखक के स्थान पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, एमएफपी पार्क से किया है न कि स्वयं के व्यक्तिगत नाम से और प्रकाशक द्वारा पुस्तकों के प्रचार प्रसार हेतु लेखक को सीमित संख्या में पुस्तकें कम दर पर उलब्ध करायी जाती है।


गवर्नमेंट प्रेस से एनओसी जरुरी नहीं
मध्यप्रदेश राज्य लघुवनोपज संघ शासन द्वारा वित्त पोषित न होने के कारण, राज्य लघु वनोपज संघ पर मध्यप्रदेश वित्तीय अधिकार पुस्तिका 2012 के प्रावधान लागू न होकर संघ में प्रत्यायोजित अधिकार लागू है। अतः पुस्तकों का प्रकाशन निजी संस्थाओं से कराने के पूर्व शासकीय मुद्रणालय से अनापत्ति प्राप्त नहीं की जानी थी।
पुस्तकों के प्रकाशन में हुए भुगतान के संबंध में यह पाया गया कि आंतरिक क्रय समिति द्वारा क्रय की कार्यवाही का अनुमोदन किया गया है। इस प्रकार पुस्तकों के प्रकाशन में अपनाये गये नियम तथा प्रक्रिया के संबंध में डॉ कुमार द्वारा दिया गया बचाव उत्तर मान्य करने योग्य पाया गया है।





