खरगोन में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा: 8 साल तक सरकारी नौकरी करता रहा कर्मचारी, जांच में खुली पोल, अब हुआ बर्खास्त

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खरगोन में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा: 8 साल तक सरकारी नौकरी करता रहा कर्मचारी, जांच में खुली पोल, अब हुआ बर्खास्त

खरगोन :मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में शिक्षा विभाग की जांच ने अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था में कथित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला उजागर किया है। करीब आठ वर्षों से सरकारी नौकरी कर रहे एक कर्मचारी को विभाग ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।

जांच में सामने आया कि उसने अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए और कथित तौर पर गलत जानकारी देकर नौकरी प्राप्त कर ली थी।
मामला खरगोन जिले में कटकूट के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ भृत्य (चपरासी) पवन दावड़े से जुड़ा है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विभागीय जांच में पाया गया कि पवन डावड़े ने वर्ष 2018 में अपने पिता नील्या दावड़े, जो सहायक शिक्षक थे, के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त की थी। लेकिन नियुक्ति के समय उसने यह जानकारी विभाग से छिपा ली कि उसका बड़ा भाई सुखदेव दावड़े पहले से ही शासकीय सेवा में कार्यरत था।

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पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कलेक्टर कार्यालय में एक शिकायत पहुंची। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच समिति गठित की। जांच में आवेदन पत्र, शपथ-पत्र और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच टीम ने पाया कि नियुक्ति के लिए प्रस्तुत किए गए दावे नियमों के अनुरूप नहीं थे और महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी।

नियमों के अनुसार यदि मृतक शासकीय कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो सामान्य परिस्थितियों में अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जाता। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने 13 सितंबर 2018 को जारी नियुक्ति आदेश को निरस्त करते हुए पवन डावड़े की सेवाएं समाप्त कर दीं।

मामला केवल नौकरी जाने तक सीमित नहीं रह सकता। विभागीय सूत्रों के अनुसार अब पवन दावड़े से पिछले लगभग आठ वर्षों में प्राप्त वेतन और अन्य शासकीय लाभों की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। इससे वसूली की राशि लाखों रुपये तक पहुंचने की संभावना है।

शिक्षा विभाग अब आगे की वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। वहीं यह भी चर्चा है कि दस्तावेजों में कथित गलत जानकारी और भ्रामक शपथ-पत्र देने के मामले में आपराधिक कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।