आधी रात तक जुटे रहे मंत्री-अफ़सर, हाथ मलते रह गए लेटलतीफ महकमे, तबादलों पर प्रतिबंध लौटा..! अब बैक डेट का सहारा, गेंद सीएम के पाले में

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आधी रात तक जुटे रहे मंत्री-अफ़सर, हाथ मलते रह गए लेटलतीफ महकमे, तबादलों पर प्रतिबंध लौटा..! अब बैक डेट का सहारा, गेंद सीएम के पाले में

आशीष दुबे की विशेष रिपोर्ट

भोपाल : मप्र के सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के तबादलों के लिए 15 दिन खोला गया प्रतिबंध सोमवार को समयसीमा बीतने के साथ ही फिर से लागू हो गया है, अर्थात अब सरकारी मुलाजिमों के तबादले नहीं किये जा सकेंगे। हालांकि दो दर्जन विभागों मे रात तक सूची बनाते,मंजूर कराने और जारी करने की हड़बड़ी मची रही। यह सब विभाग की शुरूआती लेतलाली और मंत्री-अफसरों के बीच समन्वय नहीं बन पाने का नतीजा माना जा रहा है और आज या कल में समयसीमा नहीं बढी तो कुछ सूची तो बैक-डेट में निकल जाएंगी लेकिन असल गेंद सीएम-समन्वय के पाले में पहुंचना तय है।

सूत्रों की मानें तो सामान्य प्रशासन विभाग तक कई महकमों की गुहार व दरकार परोक्ष तौर पर पहुंचने लगी हैं ,लेकिन साप्रवि ने कैबिनेट की मंजूरी लेने की मजबूरी बता दी है तथा इस मामले में कल शाम मुख्यमंत्री डा मोहन यादव तक समूची जानकारी भी पहुंचा दी गई। अब फैसला उनके रुख पर निर्भर है। दूसरी तरफ आलम यह है कि सरकारी विभागों में तबादलों के काम आधा-अधूरा पड़ा हुआ है। कई विभाग तो जरूरत के बीस फीसद तबादले तक नहीं कर सके हैं। ऐसे में कुछ महकमे बैक-डेट का सहारा ले रहे हैं।

दरअसल, राज्य मंत्रिपरिषद ने इस वर्ष की तबादला नीति को मई माह के अंत में मंजूरी दी थी तथा एक से पंद्रह जून तक तबादलों की समयसीमा तय की थी, लेकिन आलम यह रहा कि कई बड़े महकमे अपने कर्मचारियों की संख्या व अन्य तकाजों के मुताबिक विभागीय नीति तय करने में देरी करते रहे, जब तक नीति बनी और जिलों से जानकारी, प्रस्ताव आदि बुलाए गए तब तक आधा समय बीत चुका था। बताते हैं कि स्कूल शिक्षा,राजस्व,वन,उच्च शिक्षा,पुलिस जैसे करीब दर्जनभर विभागों में तबादले के लिए दबाव ज्यादा था और अब तक है भी, मगर इन्ही वजहों से तबादलों का काम अधूरा रह गया। पुलिस विभाग, स्वास्थ्य और एनएचएम तथा लोक निर्माण जैसे कुछ विभागों ने तेजी दिखाते हुए तबादला सूची जारी कर दी,लेकिन इसमें अभी कसर रह गई है। स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, राजस्व और जनजातीय कार्य विभाग में देर शाम तक आपाधापी की स्थिति रही।

सूत्रों की मानें तो तीन-चार प्रमुख महकमे ऐसे हैं, जहां मंत्री,प्रमुख सचिव के बीच सही ट्यूनिंग नहीं हो सकी। राजस्व विभाग में तो प्रमुख सचिव की विदेश यात्रा के चलते काफी समय तक असमंजस की स्थिति रही। हालांकि इन महकमों ने स्वैच्छिक तबादलों के प्रस्ताव सिरे चढा दिए लेकिन प्रशासनिक तकाजों वाले तबादले की कई सूची धरी रह गई। इसके चलते लगभग सभी विभाग सात दिन का समय और चाहते हैं।

*अब बैक डेट व समन्वय ही सहारा*

वैसे तो मुख्यमंत्री पहले कह चुके हैं कि तबादलों की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। तबादलो की डेडलाइन के आखिरी दिन अधिकांश मंत्री अपने विभागों में जमे रहे तथा तबादला सूची में नाम जोड़ने और काटने का दौर चलता रहा। कुछ मंत्रियो ंने इसके लिए अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमो में बदलाव तक किया और कुछ देर रात तक अफसरो के साथ बैठे।

बहरहाल, प्रतिबंध स्वत: लागू होने के पहले सोमवार रात तक तबादलों की सूची जारी करने की हड़बड़ी रही. सूत्र बताते हैं कि 15 जून की डेट से कई सूची अगले कुछ दिन आ सकती हैं, इसके बाद सीएम-समन्वय का ही सहारा बचेगा,जहां तबादलों के प्रस्तावों पर मुहर लग सकेगी।