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* *तकनीकी और मेडिकल शिक्षा का नया हब बनेगा उज्जैन*
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के त्रि-विभाजन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार भोपाल, जबलपुर और उज्जैन तीन क्षेत्रीय इकाइयों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा का संचालन किया जाएगा। इससे मालवा क्षेत्र के इंजीनियरिंग एवं तकनीकी कॉलेजों का प्रशासनिक नियंत्रण उज्जैन से संभव होगा। इसी तरह मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रशासनिक विभाजन की भी योजना है। प्रस्ताव के तहत उज्जैन में मेडिकल विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय परिसर स्थापित होगा, जिससे मालवा-निमाड़ के मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग कॉलेजों का संबद्धीकरण यहीं से किया जा सकेगा।

*₹592.3 करोड़ की मेडिसिटी, स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई पहचान*
सरकार ने उज्जैन में प्रदेश की पहली मेडिसिटी विकसित करने का ब्लूप्रिंट तैयार किया है। लगभग ₹592.3 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में नया मेडिकल कॉलेज, 550 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तथा आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य मालवा क्षेत्र के मरीजों की रीवा, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों पर निर्भरता कम करना है।
* *कृषि अनुसंधान और बागवानी के लिए भी नई पहल*
प्रदेश सरकार जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय और अन्य कृषि संस्थानों के कार्यों का विकेंद्रीकरण करने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार उज्जैन संभाग में विशेष कृषि अनुसंधान विंग और उन्नत बागवानी केंद्र स्थापित किए जाएंगे। सिंहस्थ-2028 और मालवा क्षेत्र की कृषि आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई अनुसंधान परियोजनाओं को उज्जैन से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
* *उज्जैन को ‘प्राइम मेरिडियन’ के रूप में स्थापित करने की पहल*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन की ऐतिहासिक वेधशाला और प्राचीन कालगणना परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल भी शुरू की है। सरकार ग्रीनविच की तर्ज पर उज्जैन को ‘प्राइम मेरिडियन’ के रूप में स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरवी कर रही है। इसके साथ स्पेस एवं एस्ट्रोनॉमिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिससे उज्जैन खगोल विज्ञान और कालगणना का प्रमुख केंद्र बन सके।
* *धार्मिक पर्यटन के साथ प्रशासनिक महत्व भी बढ़ा*
धार्मिक न्यास विभाग, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय और सिंहस्थ से जुड़ी व्यवस्थाओं के उज्जैन में केंद्रित होने से शहर का प्रशासनिक महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित विश्वविद्यालय, मेडिसिटी, अनुसंधान संस्थान और अन्य परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होती हैं, तो उज्जैन केवल धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रशासन का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है।