83 दिन की जंग जीतकर 500 ग्राम के नवजात ने जीती जिंदगी, आज हुआ डिस्चार्ज

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83 दिन की जंग जीतकर 500 ग्राम के नवजात ने जीती जिंदगी, आज हुआ डिस्चार्ज

बड़वानी : चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए बड़वानी जिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में मात्र 500 ग्राम वज़न के प्री टर्म जन्मे नवजात शिशु को 83 दिनों तक गहन उपचार देने के बाद मंगलवार को स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया।
एसएनसीयू के सहायक नोडल अधिकारी डॉ. लक्ष्मण अवास्या ने बताया कि यह मामला 7 जनवरी 2026 का है, जब धार जिले की कुक्षी तहसील के कड़माल गांव निवासी कृष्णा अलावे की पत्नी उर्मिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। उन्हें निसरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया, जहां जांच में ट्रिपलेट (तीन शिशुओं) की हाई-रिस्क गर्भावस्था सामने आई। इसके बाद उन्हें बड़वानी के जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया।
उन्होंने बताया कि तीनों शिशुओं का सामान्य प्रसव हुआ, लेकिन अत्यधिक कम वजन और गंभीर स्थिति के कारण पहले और तीसरे नवजात की जन्म के तुरंत बाद मृत्यु हो गई। वहीं तीसरे नवजात, एक बालक जिसका वजन केवल 500 ग्राम था, को गंभीर हालत में एसएनसीयू में भर्ती किया गया।
उपचार के शुरुआती दिनों में शिशु का वजन घटकर लगभग 400 ग्राम तक पहुंच गया, जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई। परंतु चिकित्सा टीम ने लगातार निगरानी और समय पर उपचार के माध्यम से शिशु की स्थिति को संभाला। यह परिवार मजदूरी करने वाला है, जिसके बावजूद उन्होंने धैर्य बनाए रखा।
डॉ. आवस्या ने बताया कि उपचार के दौरान नवजात को कई गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ा, जिनमें रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (CPAP सपोर्ट से नियंत्रित), सर्कुलेटरी शॉक (इनोट्रोपिक सपोर्ट से उपचार), तीसरे सप्ताह में नेक्रोटाइजिंग एंटेरोकोलाइटिस, लंबे समय तक हाइपोग्लाइसीमिया और छठे सप्ताह में लेट ऑनसेट सेप्सिस शामिल थे। इन सभी जटिलताओं का सफलतापूर्वक प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज किया गया।
उन्होंने बताया कि शिशु के स्वस्थ होने में मां द्वारा दी गई कंगारू मदर केयर (KMC) यानी त्वचा से त्वचा संपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
करीब 12 सप्ताह के उपचार के बाद नवजात की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। वह बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के सांस लेने लगा, सभी लाइफ पैरामीटर स्थिर रहे और वह पूरी तरह से फीड लेने लगा। डिस्चार्ज के समय उसका वजन बढ़कर लगभग 1.23 किलोग्राम हो गया।
एसएनसीयू प्रभारी डॉ. रूप सिंह भादले ने बताया कि यह अत्यंत कम वजन वाले नवजात के सफल उपचार का एक दुर्लभ उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उन्नत नवजात चिकित्सा सेवाओं, टीमवर्क और सतत निगरानी का परिणाम है।
इस सफल उपचार में डॉ. रूप सिंह भदले के साथ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रविकांत अवास्या और डॉ. शीला अगरेचा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नवजात के परिवार ने चिकित्सा टीम का आभार व्यक्त किया।