
धार के रिटायर्ड पुलिसकर्मी की इंदौर में मौत, दूषित पानी पीने से बिगड़ी तबीयत का आरोप
छोटू शास्त्री की रिपोर्ट
धार: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हो रही मौतों की श्रृंखला थमने का नाम नहीं ले रही है। इस मामले में एक और व्यक्ति की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। ताज़ा मामला धार जिले से जुड़े एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी का है, जिनकी इलाज के दौरान इंदौर में मौत हो गई।
मृतक की पहचान धार के शिव विहार क्षेत्र में रहने वाले 69 वर्षीय रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक ओमप्रकाश शर्मा अपने बेटे से मिलने इंदौर आए थे। 29 और 30 दिसंबर को भागीरथपुरा क्षेत्र में चाय-नाश्ता करने और कथित तौर पर दूषित पानी के सेवन के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत शुरू हो गई। परिजनों का कहना है कि हालत लगातार बिगड़ने पर 1 जनवरी को उन्हें इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। 2 जनवरी को उनकी स्थिति गंभीर हो गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया। अगले दो दिनों तक वे वेंटिलेटर पर रहे, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद रविवार दोपहर करीब 1 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
देखिए वीडियो: क्या कह रहा है, गौरव शर्मा (मृतक का बेटा)-
इनको डायरिया स्टार्ट हुआ था और एक तारीख को हम लोगों ने इन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल इंदौर में ऐडमिट किया था और इनके सिम्पटम्स भी सारे जो कंटेमिनेटेड वाटर है उसी के सिम्पटम्स थे और इनके आस पास भी जो पेशेंट्स थे सारे सेम डिजीज वाले पेशेंट्स थे और हम लोगों ने इसी के रिगार्डिंग प्रशासन से भी कांटेक्ट करने की कोशिश करी जो इंदौर के मेयर है उनसे भी कांटेक्ट करने की कोशिश करी और जो कलेक्टर है उनसे भी वो भी विजिट पर आए थे वहाँ पर उनसे भी मेरी बात हुई थी।
उन्होंने आश्वासन दिया था की वो कुछ पॉज़िटिव रिस्पांस करेंगे। लेकिन जब बॉम्बे हॉस्पिटल मैनेजमेंट से बात हुई तो उन्होंने ये कहा कि हमारे पास लिखित में कोई भी आदेश न होने के कारण हम आपकी किसी भी तरीके से सहायता नहीं कर सकते। नहीं इलाज में या आर्थिक सहायता और सेम चीज़ हमारी सीएमएचओ सर से भी बात हुई थी। उन्होंने भी बोला था कि मैं हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन को ये बात बताऊँगा तो वो आपकी हेल्प करेंगे लेकिन एक उसमें टेक्निकल शायद इशू ये आया कि पापा का जो आधार कार्ड है हम लोग मूल निवासी धार के हैं लेकिन मैं रहता इंदौर में और पापा मेरे यहाँ पर ही आए थे और हमारे एक और भैया हैं जो नंदानगर एरिया में रहते हैं। हम लोग वहाँ गए थे और वहीं से हमारा भागीरथपुरा एरिया में भी जाना हुआ।
हमें नहीं पता था कि वहाँ पर दूषित पानी ऐसा कुछ इश्यू होगा फिर वो किसी को भी नहीं पता होता है उस दिन जाना हुआ वहीं पर हमारा चाय नाश्ता पानी हुआ और शायद उसी कारण से हमारा वो जो दूषित जल था वो पापा को गया है क्योंकि इसके पहले उनको इससे संबंधित कोई समस्या नहीं थी। अचानक से उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई। लगातार इतने इलाज के बाद भी उनकी स्थिति सुधर नहीं पाई और तीन तारीख को शाम को उनकी स्थिति थोड़ी डाउन हुई और चार तारीख को उनको मॉर्निंग में वेंटिलेटर पे लिया और उसके बाद डॉक्टर्स ने अपना जवाब दे दिया। मुझे जो समझ में आया कि उनके सारे सिम्पटम्स तो वही दूषित पानी वाले ही जो टाइमलाइन है जिसमें उनको ये प्रॉब्लम हुई क्योंकि इसके पहले कोई हिस्ट्री नहीं है।
प्रशासन किस तरीके से मदद नहीं कर रहा है । कोई भी पेशेंट जब भर्ती होता है तो वहाँ पर वो अपने पेशेंट की केयर में लगता है ना कि ये सबूत जुटाने में लगता है तो उसमें बड़ा टेक्निकल फ्ला मुझे लग रहा है। यही है कि आधार कार्ड यहाँ होने के कारण कोई ये नहीं मानने को तैयार है कि दूषित पानी वहाँ से भी पिया जा सकता है लेकिन मेरी सिर्फ एक रिक्वेस्ट है कॉमन सेंस के बेसिस पर बैक्टीरिया कोई एरिया देख ये नहीं आता। बैक्टीरिया आधार कार्ड देख के नहीं आता किसी भी बॉडी पर वो बैक्टीरिया है एरिया से आया है तभी हुआ है और मेडिकल प्रूवेन है। डॉक्टर ने लिख के दिया है उसके बाद भी ये टेक्निकल प्रॉब्लम के कारण इतने लोगों से संपर्क करने के कारण भी हमारी मदद नहीं हुई। मैं अभी भी आशावादी हूं।





