
रचनाकार व्यक्ति के सोए अंतर्मन को जगाता है – प्रो. चौहान
जनवादी लेखक संघ ने मोहन ‘अंबर’ पर केन्द्रित आयोजन किया!
Ratlam : एक रचनाकार व्यक्ति के सोए हुए अंतर्मन को जगाता है। वह उसे सही दिशा दिखाता है। जिस रचनाकार के भीतर द्वैत नहीं होता है, उसकी रचना सदैव प्रभावित करती है। कोई भी रचना कभी पुरानी नहीं होती। वह जितनी बार पढ़ी जाती है, नए-नए अर्थ खोलती है। मोहन ‘अंबर’ भी सोए हुए समाज को जगाने वाले रचनाकार थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को झकझोरा। उक्त विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित ‘ एक रचनाकार का रचना संसार ‘ श्रंखला की नौंवी कड़ी में दिवंगत रचनाकार मोहन ‘अंबर’ की रचनाओं पर केन्द्रित आयोजन की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हर दौर में सुकरात को जहर पीना पड़ता है। एक सच्चा रचनाकार भी ज़हर पी कर समाज को एक विचार प्रदान करता है, जो सदैव प्रेरित करता है।
रायपुर से आए अंबर के पुत्र रवि गेहलोत ने कहा कि जो शहर अपने पुराने रचनाकारों को याद करता है वह उसकी रचनात्मक संपत्ति का संवाहक होता है। उन्होंने अंबर की जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया। वरिष्ठ कवि जुझार सिंह भाटी ने कहा कि अंबर जी की पारिवारिकता समृद्ध थी। उन्होंने अपनी रचनाओं को अपने रिश्तों की तरह मज़बूत रखा। जनवादी लेखक संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने कहा कि श्री अंबर ने शोषित पीड़ित मनुष्य के हक़ के लिए सदैव संघर्ष किया और इसे अपनी रचनात्मकता का विषय भी बताया। युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर ने मोहन ‘अंबर’ पर केन्द्रित आलेख का वाचन करते हुए उनके गीतों की हिन्दी गीत परंपरा में महत्वपूर्ण निरुपित किया।
इन्होंने रचनाएं प्रस्तुत की!
कार्यक्रम में मोहन ‘अम्बर’ की रचनाओं का पाठ रवि गेहलोत, आईएल पुरोहित, डॉ एनके शाह, मांगीलाल नागावत, कीर्ति शर्मा, विनोद झालानी, सुभाष यादव, चरणसिंह जाधव, गीता राठौर, आशा श्रीवास्तव, रणजीत सिंह राठौर, अनीस ख़ान, पंकज व्यास, रचना चंद्रावत, सपना ठाकुर, मुन्नीबेन ने किया। अतिथियों का स्वागत सचिव सिद्दीक़ रतलामी ने किया। इस अवसर पर रवि गेहलोत का अभिनंदन किया गया। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया तथा आभार जुझार सिंह भाटी ने माना।
अगला आयोजन नंदकिशोर ‘सलिल’ पर केन्द्रित!
जनवादी लेखक संघ द्वारा अपने शहर के रचनाकारों की रचनाओं के पुनर्पाठ की श्रंखला ‘ एक रचनाकार का रचना संसार ‘की दसवीं कड़ी में 8 फरवरी को दिवंगत रचनाकार नंदकिशोर जोशी ‘सलिल’ की रचनाओं का पाठ कर उन पर चर्चा की जाएंगी!a





