आमा डारा, डारा-मिर्ची, डारा-मिरी-काड़…

38

आमा डारा, डारा-मिर्ची, डारा-मिरी-काड़…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

आमा डारा का मतलब किसी बैठक में शामिल होने की सांकेतिक सूचना, डारा-मिर्ची मतलब ज्वलंत मुद्दों, जिस पर तुरंत निर्णय लेने बैठक की सांकेतिक सूचना और डारा-मिरी-काड़ मतलब सशस्त्र संघर्ष किये जाने बैठक की सांकेतिक सूचना।

यह सांकेतिक भाषा है जो छत्तीसगढ़ के आदिवासियों द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के समय विद्रोह के दौरान बैठकें आयोजित करने के लिए प्रयोग में लाई जाती थी। आमा डारा, डारा-मिर्ची, डारा-मिरी-काड़… स्लोगन रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय में अंकित किया गया है। यह संग्रहालय देखकर छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का आज़ादी की लड़ाई में योगदान से रूबरू हुआ जा सकता है। संग्रहालय देखकर मन आनंद से भर जाता है। और हमें आदिवासियों की वीरता, साहस और शौर्य से ओतप्रोत कर देता है। इस तरह के संग्रहालय देश में गिने चुने होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ की रजत जयंती समारोह के अवसर पर एक नवंबर 2025 को शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय का लोकार्पण किया था। संग्रहालय के प्रभारी अनिल वरुलकर ने बताया कि 2018 से दो 2022 तक

आदिवासी समाज के योगदान पर गहन शोध किया गया। उसके बाद तीन साल संग्रहालय के निर्माण कार्य में लगे। शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय 50 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। यहां 14 गैलरियों में अंग्रेजी हुकूमत काल के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की लगभग 650 मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। जनजातीय विद्रोहों को आसानी से समझाने के लिए डिजिटल माध्यमों की भी व्यवस्था की गई है। इसे सेनानियों के इतिहास पर गहन अध्ययन और शोध के बाद वीएफएक्स टेक्नोलॉजी और प्रोजेक्शन वर्क के माध्यम से तैयार किया गया है।

यह संग्रहालय केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि सभी वर्गों के लिए प्रेरणादायी है। यह देश-विदेश के आगंतुकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपरा, शौर्य और संस्कृति से परिचित करा रहा है। भव्य और आकर्षक संग्रहालय आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की शौर्यगाथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। यह संग्रहालय इस संदेश को जीवंत करता है कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह करने का साहस सबसे बड़ी शक्ति है। यह छत्तीसगढ़ प्रदेश का पहला संग्रहालय है, जो विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के शौर्य और बलिदान को समर्पित है। निश्चित तौर से यह स्मारक देखकर छत्तीसगढ़ कि आदिवासी संस्कृति और के संघर्ष से रूबरू हुआ जा सकता है।यह स्मारक-सह-संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों को अपने पुरखों के संघर्षों और बलिदानों की स्मृति से जोड़े रखेगा।

आगंतुकों को प्रत्येक दीर्घा में आदिवासी विद्रोह का विवरण डिजिटल बोर्ड पर उपलब्ध है। संग्रहालय में प्रदर्शित मूर्तियों और घटनाओं को जीवंत रूप में अनुभव किया जा सकता है। प्रत्येक दीर्घा के सामने लगे स्कैनर से मोबाइल द्वारा कोड स्कैन कर संबंधित जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकती है।

16 गैलरियों में इतिहास जीवंत होकर सामने आ जाता है। संग्रहालय में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ में हुए प्रमुख आदिवासी विद्रोहों — हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह के वीर नायकों के संघर्ष और शौर्य को जिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त जंगल सत्याग्रह और झंडा सत्याग्रह पर दो अलग-अलग गैलरियाँ भी निर्मित की गई हैं। यह दावा किया जा सकता है कि संग्रहालय देखकर हमारे भीतर आमा डारा, डारा-मिर्ची, डारा-मिरी-काड़… जैसे सांकेतिक शब्द जीवंत हो उठते हैं।

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।