
ACB Trap: 50 हजार की रिश्वत लेते इंजीनियर गिरफ्तार, ट्रांसफार्मर और नाश्ते के नाम पर…!
रायपुर: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने विद्युत विभाग के एक अधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यहां सीएसईबी (CSEB) के दीपका कार्यालय में पदस्थ सब ऑडिट इंजीनियर सत्येंद्र को ₹50,000 की घूस लेते हुए पकड़ा गया है।
आरोपी अभियंता ने ट्रांसफार्मर लगाने और नाश्ते के नाम पर 80 हजार रूपये की रिश्वत की मांग की थी। वह पहली किस्त 30 हजार ले चुका था और दूसरी किस्त 50 हजार लेते ACB की टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार किया।आरोपी सहायक ऑडिट अभियंता का नाम सत्येंद्र दिवाकर है।
दरअसल, पीड़ित श्यामता टंडन, निवासी ग्राम रलिया, जिला कोरबा द्वारा एन्टी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर में शिकायत की थी कि ग्राम दर्री में उसके मित्र के पिता के नाम पर कृषि जमीन है जिसमें ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए मित्र के पिता द्वारा उसे अधिकृत किया गया था। श्यामता टंडन ने सीएसपीडीसीएल दीपका (विद्युत विभाग) में ट्रांसफार्मर लगाने के लिए आवेदन किया था। इस दौरान सीएसपीडीसीएल दीपका के सहायक अभियंता सत्येंद्र दिवाकर द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया।
सहायक अभियंता सत्येंद्र दिवाकर से मिलने पर उनके द्वारा ट्रांसफार्मर लगाने के नाम पर चालान पटाने व अतिरिक्त नाश्ता पानी के नाम पर 80,000 की मांग की गई थी, जिसमें से उसने 30,000 एडवांस के रूप में ले लिया गया। सहायक अभियंता के द्वारा बचे रिश्वत की मांग की गई। प्रार्थी रिश्वत नहीं देना चाहता था, बल्कि आरोपी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़वाना चाहता था।
एन्टी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर के द्वारा की गई जांच में शिकायत सही पाई गई। ब्यूरो की टीम ने ट्रेप आयोजित कर 28 जनवरी को आरोपी सहायक अभियंता सत्येंद्र दिवाकर को पीड़ित से दूसरी किश्त के रूप में 50,000 रूपये लेते रंगे हाथों पकड़ा। इस छापेमारी के बाद से विद्युत विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। चर्चा है कि सत्येंद्र दिवाकर की कार्यप्रणाली पहले से ही संदिग्ध थी और क्षेत्र में उसकी रिश्वतखोरी की खबरें आम थीं।
बताते चलें कि प्रदेश भर के अधिकांश जिलों में CSEB वितरण विभाग के कई अफसर रिश्वतखोरी के नाम पर बदनाम हैं। चूंकि लोगों के जीवनचर्या में बिजली सबसे अहम चीज है, और इसी का फायदा ऐसे रिश्वतखोर अफसर उठाते हैं, जो बिजली कनेक्शन के नाम पर लोगों से पैसा वसूलते हैं। यही नहीं छापेमारी करके बिजली चोरी पर भारी-भरकम जुर्माना लगाने का भय दिखाकर भी लोगों से वसूली की जाती है।




