
भोपाल के निर्देश पर 3 सदस्यीय हाई पावर कमेटी पहुंची उज्जैन, किया बेजुबान श्यामू का परीक्षण
कीर्ति राणा की विशेष रिपोर्ट
उज्जैन। परिंदों को प्यास लगने पर तो वह छत या बालकनी में रखा खाली सकोरा गिरा कर या लगातार चीं चीं कर हमारा ध्यान आकर्षित करा देता है तो हम दाना-पानी का इंतजाम कर सकते हैं लेकिन किसी भी जानवर को अंदरुनी परेशानी हो तो वह अपनी पीड़ा किससे और कैसे कहे।जोड़ों के भीषण दर्द की परेशानी से श्यामू हाथी भी जूझ रहा है। महाकाल की सवारी का प्रमुख आकर्षण श्यामू को अपना पेट पालने के साथ ही महावत गोस्वामी परिवार के लिए भी रोटी की चिंता का भार है इसलिये उसे हर रोज 10-12 घंटे सड़कों पर भटकना ही पड़ता है।
हाथ फैलाए किसी भिखारी को कुछ देने का मन भले ही ना करे किंतु गणेश जी के अवतार हाथी के दर्शन मात्र से ही मन में श्रद्धा का सागर हिलोरे मारने लगता है। श्रद्धालु आसपास नजर दौड़ाते हैं, केले, गुड़ की भेली, सांटा आदि जो भी मिल जाए हाथी बाबा को अर्पित करने के साथ ही उसे लेकर चलने वाले महावत को भी कुछ ना कुछ राशि भेंट करते ही हैं। किसी परिवार का एकमात्र जवान युवक जैसे परिवार के पालनहार का दायित्व निभाता है वही दायित्व 28 वर्षीय श्यामू पर भी है। उसे अपने साथ परिवार का भी पेट पालना है।
श्यामू से पहले यह जिम्मेदारी रामू की थी। महावत श्रवण गोस्वामी का कहना है 1980 से 2016 तक रामू हाथी महाकाल की सवारी की शान रहता था। उसके दिंवगत होने के बाद से श्यामू हमारा सहारा है। 2006 से श्यामू को पाला है।2016 से 2025 तक वह हर सवारी में अनुशासित रहते काम कर रहा है।
घर की जिम्मेदारी उठाने वाला मुखिया जैसे अपना दर्द-बीमारी को भुलाकर परिवार की रोजी-रोटी की चिंता में खुद को खपाता रहता है कुछ ऐसे ही हालात से श्यामू हाथी भी जूझ रहा है। महावत परिवार उसकी बीमारी को जानता तो है लेकिन वो सब जानते हैं कि श्यामू के प्रति श्रद्धालुओं के दया भाव से ही उनके घर का चूल्हा जल रहा है।
श्यामू की बीमारी संबंधी जानकारी भोपाल पहुंच चुकी है। वन विभाग की चीफ वाइल्ड वार्डन डॉ संगीता राजोरा ने उसके स्वास्थ्य की बेहतरी के साथ बीमारी की विस्तृत रिपोर्ट के लिए तीन सदस्यीय हाईपॉवर कमेटी को उज्जैन भेजा है। इस समिति में पन्ना टाइगर रिजर्व से डॉ संजीव गुप्ता, उज्जैन के वेटरनरी डॉक्टर (पशु चिकित्सक) मुकेश जैन, इंदौर नगर निगम के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (इंदौर जू) के प्रभारी अधिकारी/निदेशक डॉ. उत्तम यादव को श्यामू की जांच पड़ताल और हेल्थ अपडेट रिपोर्ट देने के लिये उज्जैन भेजा है।
दो दिन पहले भी डॉ मुकेश जैन और वन विभाग का अमला श्यामू के परीक्षण के लिये पहुंचा था लेकिन गोस्वामी परिवार के भारी विरोध के चलते इस टीम को लौटना पड़ा था। महावत परिवार का आरोप था कि टीम के अधिकारी श्यामू को बलात अपने साथ ले जाने आए हैं। आज पहुंची इस हाईपॉवर कमेटी की समझाइश के बाद महावत परिवार श्यामू के इलाज में सहयोग के लिये राजी हुआ है।
*श्यामू गुजर रहा है इन दिक्कतों से*
इस त्रिसदस्यीय टीम के सदस्य डॉ उत्तम यादव ने चर्चा में कहा श्यामू जिस परेशानी से गुजर रहा है ऐसे में उसके लिये टोटल रेस्ट ही अधिक जरूरी है। हम महावत परिवार की परेशानी, धार्मिक मान्यताओं के विरोधी नहीं है लेकिन जीव दया की बात भी तो हमारे ग्रंथ कहते हैं। श्यामू के परीक्षण के पश्चात मिले लक्षणों से उसे जोड़ो में भीषण दर्द (जॉइंट डीजेनेरेटिव डिजीज) की शिकायत है।
*क्यों होती है जॉइंट डीजेनेरेटिव डिजीज*
हाथियों में होने वाली यह गंभीर और काफी आम समस्या है, विशेषकर वृद्ध, कैद में रहने वाले या अधिक वजन वाले हाथी इसके शिकार होते हैं। इस रोग में जोड़ों की उपास्थि (Cartilage) धीरे-धीरे घिसने लगती है। परिणामस्वरूप जोड़ों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने में कठिनाई होने लगती है। यह मनुष्यों के ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसा ही रोग है।
*श्यामू में बीमारी के ये लक्षण मिले **
तीन सदस्यीय दल ने श्यामू के स्वास्थ्य की जांच के लिए मल-मूत्र के सैंपल के साथ अन्य परीक्षण भी किये हैं। जांच में पाया कि 28 वर्षीय श्यामू का वजन 3-4 हजार किलो (ओवर वेट) होने फेट बढ़ते जाने, हर दिन दस घंटे चलने से सारा भार पैरों पर पड़ने से वह लंगड़ाकर चल रहा है। पिछले पैर सतत बैंड होते जाने से आपस में टकरा रहे हैं। उसकी गर्दन पर फंगल इंफेक्शन बढ़ता जा रहा है। उसे उठने-बैठने में कठिनाई होने के साथ ही चलने की गति कम हो गई है, जोड़ों में सूजन के साथ ही सामान्य हाथियों जैसी गतिविधि कम होने के साथ ही भोजन में रुचि कम हो रही है।
श्यामू पिछले 9 वर्षों से बाबा महाकाल की शाही सवारी में भगवान मनमहेश की प्रतिमा को अपनी पीठ पर लेकर नगर भ्रमण कराता है। उसका जन्म 8 नवंबर 1997 को असम के गोलाघाट में हुआ था। वर्ष 2000 में संत श्रवण गिरी महाराज उसे उज्जैन लेकर आए थे। वर्ष 2016 में रामू हाथी के बाद से श्यामू महाकाल की शाही सवारी की जिम्मेदारी निभा रहा है।
श्यामू को जितना आराम मिलेगा, उतनी ही जल्दी तबीयत में सुधार होगा : डॉ उत्तम यादव
डॉ. उत्तम यादव इंदौर नगर निगम (IMC) के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय (इंदौर जू) के प्रभारी अधिकारी/निदेशक हैं। वह लंबे समय से इस पद पर कार्यरत हैं और जू प्रबंधन के साथ-साथ वन्यजीवों के इलाज, ब्रीडिंग (प्रजनन), और बचाव कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।
डॉ उत्तम यादव ने इस प्रतिनिधि से चर्चा में बताया एशिया में पाए जाने वाले हाथी मकरा प्रजाति के होते हैं। श्यामू भी इसी प्रजाति का है। इस प्रजाति के हाथियों की औसत उम्र अधिकतम 70 वर्ष होती है जबकि अफ्रीकन प्रजाति के हाथियों की उम्र 90 वर्ष होती है।
श्यामू की बीमारी के जो लक्षण हैं उसे देखते हुए दवाइयां तो अपनी जगह काम करेगी लेकिन बेहतर उपचार यही है कि कुछ महीने उसे टोटल रेस्ट मिले। चलने-फिरने से जितनी राहत मिलेगी, उतनी तेजी से वह ठीक होगा।
🔹**आठ महीने पहले हुई थी शिकायत **
करीब आठ महीने वाइल्ड लाइफ दिल्ली में एक एनजीओ ने शिकायत की थी कि उज्जैन में महाकाल की सवारी में चलने वाला हाथी श्यामू बीमार है और सवारी के लिए अनुपयुक्त है। शिकायत के बाद दिल्ली से जांच के आदेश हुए। उसे पालने वाला महावत परिवार इसे साजिश बता रहा है, जबकि वन विभाग का कहना है कि नियमों के तहत जांच जरूरी है।
🔹**महावत के घर नोटिल चस्पा किया **
जांच में पर्याप्त सहयोग नहीं करने पर अब महावत श्रवण गिरी के घर पर एक नोटिस चिपकाया गया है, जिसमें लिखा है कि वह एक महीने तक श्यामू हाथी को अपने घर से बाहर नहीं निकाले। यहीं रहकर उसका इलाज करना होगा अगर इन आदेशों का पालन नहीं होता है तो फिर महावत के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पशु चिकित्सक डॉ. मुकेश जैन ने बताया कि टीम ब्लड सैंपल लेने पहुंची थी, लेकिन विरोध के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया। हाथी के मल और मूत्र के नमूने लिए गए हैं, जिनकी जांच के बाद ही उसके स्वास्थ्य स्थिति को लेकर कोई निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि श्यामू के पैरों में जन्मजात समस्या है, जिसे बीमारी नहीं कहा जा सकता, लेकिन मौजूदा स्थिति में उससे सवारी का कार्य लेना जोखिम भरा हो सकता है।





