
एक साल तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद विधायक पहुंचे विधानसभा,पर सदन में लागू रहेगी यह शर्त!
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का पहला दिन राजनीति के गलियारों में एक खास चर्चा का केंद्र रहा। वह था- पूर्व मंत्री कवासी लखमा का सदन में लौटना।
कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में करीब एक साल तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद, लखमा सोमवार को पहली बार विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए।
सदन में प्रवेश करते ही उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं अजय चंद्राकर, रामविचार नेताम और धर्मजीत सिंह को गले लगाया। इस दौरान अजय चंद्राकर ने भी गर्मजोशी दिखाते हुए लखमा की पीठ थपथपाई।
कवासी लखमा की यह वापसी जितनी चर्चा में है, उतनी ही कड़ी शर्तों के दायरे में भी है। उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद विधानसभा ने उन्हें कुछ विशेष नियमों के तहत सत्र में बैठने की इजाजत दी है। इसमें सबसे अहम शर्त नो स्पीच की है। लखमा अपने ऊपर चल रहे विचाराधीन मामले या केस से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सदन के भीतर न तो कोई टिप्पणी करेंगे और न ही कोई बयान देंगे।साथ ही लखमा केवल विधानसभा सत्र और परिसर तक ही सीमित रहेंगे। उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र या अन्य किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है। उन्हें अपनी आवाजाही की लिखित जानकारी पहले से विधानसभा सचिव को देनी होगी, जिसका औपचारिक रिकॉर्ड रखा जाएगा।
सत्र के पहले दिन लखमा का व्यवहार बेहद सौम्य रहा।आमतौर पर सत्तापक्ष पर हमलावर रहने वाले लखमा आज विपक्ष की बेंच से उठकर सीधे भाजपा के मंत्रियों और विधायकों की ओर गए और उनसे हाथ मिलाकर पुरानी मित्रता निभाई। लखमा की एक साल बाद वापसी पर सदन में अलग ही माहौल देखने को मिला।





