
अग्रवाल सेवा समिति ने किया 53 वरिष्ठ समाजसेवियों का युगल सम्मान, सम्मान पाकर समाज के बुजुर्गों की आंखें हुईं नम!
Ratlam : शहर की सागोद रोड़ स्थित अग्रसेन वाटिका पर रविवार को अग्रवाल सेवा समिति द्वारा 53वां वरिष्ठ युगल सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जो ना केवल एक कार्यक्रम, बल्कि भावनाओं, संस्कारों और पीढ़ियों के मिलन का पावन उत्सव बन गया। ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि के बीच जब पुष्पवर्षा करते हुए सभी वरिष्ठ युगलों को सम्मानपूर्वक हाल में प्रवेश कराया तो पूरा वातावरण श्रद्धा से भर उठा। तिलक, माल्यार्पण और शॉल ओढ़ाकर किए गए स्वागत ने हर हृदय को स्पर्श किया। मंच पर जब एक-एक कर वरिष्ठ दंपत्तियों को आमंत्रित किया गया और उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष, प्रेम, त्याग और परिवार के लिए किए गए समर्पण की बातें साझा की तो सभागार में सन्नाटा छा गया। अनेक युगलों की आंखों से भावनाओं की धारा बह निकली और वही आंसु समाज की युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा संदेश बन गए। मुख्य अतिथि श्रीमती नीता सुरेश चंद्र अग्रवाल अध्यक्ष, अग्रवाल समाज महासभा महिला मंडल, महेश अग्रवाल-अध्यक्ष, अग्रसेन सोशल ग्रुप थे।
कार्यक्रम में अतिथियों ने अत्यंत भावुक शब्दों में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज जो वृक्ष हमें छाया दें रहें हैं वे कभी नन्हें पौधे थे। हमारे बुजुर्गों ने त्याग, परिश्रम और संस्कारों से इस समाज को सींचा हैं। अब यह जिम्मेदारी युवा पीढ़ी की है कि वह इन जड़ों को सूखने न दे। उन्होंने कहा कि आधुनिकता आवश्यक है, प्रगति आवश्यक है, लेकिन यदि संस्कार खो गए तो पहचान भी खो जाएगी। युवाओं से आग्रह किया गया कि वे अपने दादा-दादी और परिवार के वरिष्ठजनों के साथ समय बिताएं व उनके अनुभवों को सुनें, उनके चरणों में बैठकर जीवन की सच्ची शिक्षा प्राप्त करें गीता भेंट करें पीढ़ियों को जोड़ने का संकल्प लें। समारोह में सभी 53 वरिष्ठ युगलों को पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद् गीता भेंट की गई। यह केवल एक उपहार नहीं, बल्कि संस्कारों की ज्योति को आगे बढ़ाने का संकल्प था।वरिष्ठजनों से निवेदन किया गया कि वे गीता का अध्ययन कर अपने पोते-पोतियों को धर्म, कर्तव्य, मर्यादा और जीवन के सच्चे मूल्यों का ज्ञान दें।

वक्ताओं ने भावुक स्वर में कहा
आज आवश्यकता धन की नहीं, दिशा की हैं और वह दिशा हमारे बुजुर्ग ही दे सकते हैं। इस गरिमामय आयोजन को सफल बनाने में सेवासमिति के समर्पित सदस्यों ओमप्रकाश अग्रवाल, महेश गोयल, कौशिक अग्रवाल, शलभ अग्रवाल, अंकित अग्रवाल, गौरव एरन, संजय अग्रवाल, रितेश झंडीवाला, भावेश गर्ग, राकेश झंडीवाला, प्रमोद बिंदल, जितेंद्र मंगल, दीपक अग्रवाल, विवेक अग्रवाल एवं मनोज मित्तल ने तन-मन-धन से योगदान दिया।संचालन श्रीमती ज्योति अग्रवाल एवं श्रीमती नितिका एरन ने किया। संस्था परिचय संजय अग्रवाल ने प्रस्तुत किया तथा अंत में श्री गौरव एरन ने आभार माना।

युवा पीढ़ी के नाम अंतिम संदेश!
समारोह के अंत में एक स्वर में यह संदेश गूंजा- युवा पीढ़ी केवल भविष्य नहीं, वर्तमान की जिम्मेदारी भी है। अपने बुजुर्गों का सम्मान कीजिए, उनके अनुभवों को अपना मार्गदर्शन बनाइए। संस्कारों की ज्योति बुझने न दें, क्योंकि जिस दिन जड़ें कमजोर हो जाती हैं, उस दिन शाखाएं भी सूख जाती हैं। यह आयोजन केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला एक भावनात्मक आह्वान बन गया कि हम अपनी पहचान, परंपरा और संस्कारों को सहेजकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं!





