Ajit Pawar Death Tragedy: लियरजेट-45 की तकनीक, उड़ान प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरा सवालों में!

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Ajit Pawar Death Tragedy: लियरजेट-45 की तकनीक, उड़ान प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरा सवालों में!

सुरेश तिवारी की विशेष रिपोर्ट 

देश एक बार फिर एक वीआईपी विमान हादसे से स्तब्ध है। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु ने न केवल राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ा दी है, बल्कि यह भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वीआईपी यात्राओं में प्रयुक्त अत्याधुनिक माने जाने वाले बिजनेस जेट वास्तव में उतने सुरक्षित हैं, जितना माना जाता है। बारामती में हुआ यह हादसा अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लियरजेट-45 की तकनीकी विश्वसनीयता, उड़ान प्रोटोकॉल और वीआईपी सुरक्षा तंत्र की गंभीर परीक्षा बन चुका है।

केवल सात माह पहले 16 जून 2025 को पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की विमान दुर्घटना में मृत्यु और अब 28 जनवरी 2026 को अजित पवार का इसी तरह असमय निधन — 226 दिन के भीतर दो वरिष्ठ नेताओं की मौत- विमान सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर गहरे प्रश्न छोड़ जाती है। जन भावना में शोक के साथ-साथ अब यह मांग भी तेज हो रही है कि इन घटनाओं को मात्र संयोग मानकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अजित पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे। लैंडिंग प्रक्रिया के दौरान विमान का संतुलन बिगड़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विमान आसमान में लड़खड़ाता नजर आया और जमीन से टकराने से पहले व दौरान कई तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। विमान रनवे तक पहुंचने से पहले खेत क्षेत्र में गिरा और आग की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

इस हादसे में अजित पवार सहित विमान में सवार कुल छह लोगों की मौत हो गई। राहत और बचाव दल मौके पर तुरंत पहुंचे, लेकिन आग और क्षति की तीव्रता के कारण किसी को बचाया नहीं जा सका।

 *● पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे*

अजित पवार की मृत्यु ने उन पुराने घावों को भी फिर हरा कर दिया है, जब देश ने अपने वरिष्ठ नेताओं को विमान या हेलीकॉप्टर हादसों में खोया था। इनमें

• 12 जून 2025 को विजय रूपाणी

• माधवराव सिंधिया

• संजय गांधी

• वाईएस राजशेखर रेड्डी

• जीएमसी बालयोगी

जैसे नाम शामिल हैं। इन घटनाओं ने समय-समय पर यह सवाल उठाया है कि क्या वीआईपी उड़ानों में सुरक्षा मानकों का पालन वास्तविक रूप से उतनी गंभीरता से होता है, जितना कागजों में दर्शाया जाता है।

 *● कौन सा विमान था: लियरजेट-45*

हादसे का शिकार हुआ विमान लियरजेट-45 था, जिसे बॉम्बार्डियर कंपनी ने तैयार किया था। यह विमान वीआईपी यात्रा, कॉरपोरेट मूवमेंट और चार्टर फ्लाइट्स के लिए जाना जाता है। इसके केबिन में सामान्यतः करीब आठ यात्री आराम से यात्रा कर सकते हैं, इसी कारण यह निजी उड़ानों में लोकप्रिय रहा है।

 *● तकनीकी खूबियां और उड़ान क्षमता*

लियरजेट-45 में दो शक्तिशाली जेट इंजन, आधुनिक एवियोनिक्स और संतुलित एयरोडायनामिक डिजाइन होता है। यह विमान तेज गति और बिना रुके लंबी दूरी तय करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि यह तकनीकी रूप से सक्षम विमान माना जाता है, लेकिन टेकऑफ और लैंडिंग इसके सबसे संवेदनशील चरण होते हैं, जहां किसी भी स्तर की चूक घातक साबित हो सकती है।

 *● कीमत, बाजार मूल्य और संचालन खर्च*

उत्पादन के समय इस विमान की कीमत करीब 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 80 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जाती थी। वर्तमान में

• इस्तेमाल किए गए मॉडल 2.5 से 4.5 मिलियन डॉलर

• पुराने मॉडल 9 लाख से 3 मिलियन डॉलर

• उन्नत 45XR संस्करण इससे अधिक

मूल्य में उपलब्ध बताए जाते हैं।

संचालन खर्च की बात करें तो वार्षिक खर्च उड़ान घंटों के आधार पर लगभग 6 से 8 लाख डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि चार्टर किराया करीब 3,000 से 4,500 डॉलर प्रति घंटा माना जाता है।

 *● पायलट और क्रू की भूमिका*

विमान को कैप्टन सुमित कपूर और फर्स्ट ऑफिसर शाम्भवी पाठक उड़ा रहे थे। दोनों के प्रशिक्षण, उड़ान अनुभव और निर्णय प्रक्रिया अब जांच के दायरे में है। विमानन एजेंसियां यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही हैं कि हादसे के पीछे

• तकनीकी खराबी

• मानवीय त्रुटि

• मौसम या रनवे की स्थिति में से कौन-सा कारण प्रमुख रहा?

 *● राजनीतिक और प्रशासनिक असर*

अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा शून्य पैदा हो गया है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने शोक व्यक्त किया है। साथ ही यह हादसा वीआईपी सुरक्षा, चार्टर उड़ानों और प्रशासनिक निगरानी पर नई बहस छेड़ रहा है।

बारामती का यह विमान हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। लियरजेट-45 जैसी अत्याधुनिक मशीन, अनुभवी क्रू और वीआईपी सुरक्षा के बावजूद यदि ऐसा हादसा होता है, तो यह स्पष्ट करता है कि विमानन सुरक्षा प्रणाली की गहन, स्वतंत्र और पारदर्शी समीक्षा अब टालना संभव नहीं है।

यह मामला तकनीक, मानव निर्णय और सुरक्षा प्रोटोकॉल – तीनों की संयुक्त परीक्षा बन चुका है, जिसके निष्कर्ष भविष्य की उड़ानों की दिशा तय करेंगे।