कुत्तों की नसबंदी में गजब का खेल, कागजों में 33 हजार का दावा, जमीनी हकीकत सिर्फ 2200, रतलाम में करोड़ों का घोटाला उजागर

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कुत्तों की नसबंदी में गजब का खेल, कागजों में 33 हजार का दावा, जमीनी हकीकत सिर्फ 2200, रतलाम में करोड़ों का घोटाला उजागर

▪️राजेश जयंत ▪️

INDORE-RATLAM:आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं के बीच रतलाम नगर निगम का नसबंदी अभियान अब खुद सवालों के घेरे में आ गया है। कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के नाम पर किए गए इस अभियान में कागजों पर 33 हजार से ज्यादा कुत्तों की नसबंदी दिखा दी गई, जबकि जमीनी स्तर पर महज करीब 2200 कुत्तों की ही नसबंदी होने की बात सामने आ रही है। इस अंतर ने नगर निगम में करोड़ों रुपये के बड़े घोटाले की आशंका को जन्म दे दिया है।

● नसबंदी के नाम पर खर्च, असर नदारद
नगर निगम ने बीते कुछ वर्षों में आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए भारी बजट खर्च होने का दावा किया। दस्तावेजों में हजारों कुत्तों के ऑपरेशन पूरे होने का उल्लेख है, लेकिन शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती गई। यही स्थिति इस पूरे अभियान की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा सवाल बन गई।

● आंकड़ों में बड़ा फासला, हकीकत उजागर
रिकॉर्ड में जहां 33 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी दर्शाई गई, वहीं स्थल निरीक्षण और उपलब्ध साक्ष्यों में केवल करीब 2200 कुत्तों के ही ऑपरेशन की पुष्टि हो सकी। शेष हजारों नसबंदियां सिर्फ फाइलों और बिलों तक सीमित दिखाई दे रही हैं।

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● दरें और भुगतान भी संदेह के घेरे में
नसबंदी कार्य के भुगतान में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है। अलग-अलग चरणों में प्रति कुत्ता अलग दरें दर्शाई गईं। विशेषज्ञों के अनुसार एक कुत्ते की नसबंदी, दवाइयों, पकड़ने, ऑपरेशन और बाद की देखभाल सहित तय खर्च होता है, लेकिन दर्शाई गई दरों में यह प्रक्रिया पूरी होना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।

● नगर निगम की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। आरोप है कि बिना वास्तविक कार्य के ही भुगतान कर दिए गए और फर्जी आंकड़ों के आधार पर लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई।

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● जांच के घेरे में अधिकारी और एजेंसियां
मामले के सामने आने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रिकॉर्ड, भुगतान, बैंक ट्रांजेक्शन और कार्यस्थलों की गहन पड़ताल की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि इसमें अधिकारियों और ठेका एजेंसियों की मिलीभगत हो सकती है।

● शहरवासी परेशान, जवाबदेही की मांग
एक ओर शहर में डॉग बाइट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, दूसरी ओर नसबंदी अभियान का जमीनी असर दिखाई नहीं दे रहा। नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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● भविष्य में निगरानी पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा पशु नियंत्रण जैसे संवेदनशील कार्यक्रमों में पारदर्शिता, फिजिकल वेरिफिकेशन और नियमित ऑडिट बेहद जरूरी है। बिना सख्त निगरानी के ऐसे अभियान सिर्फ कागजी साबित होते हैं।