Anand Sagar Dies: ‘रामायण’ के क्रिएटिव स्तंभ रहे आनंद सागर का 84 वर्ष की आयु में निधन

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Anand Sagar Dies: ‘रामायण’ के क्रिएटिव स्तंभ रहे आनंद सागर का 84 वर्ष की आयु में निधन

Mumbai: मुंबई से एक युगांतकारी खबर सामने आई है। मशहूर फिल्ममेकर रामानंद सागर के बेटे और सागर परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने वाले आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का 13 फरवरी 2026 को निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे। पिछले लगभग एक दशक से अधिक समय से वे पार्किंसंस बीमारी से जूझ रहे थे और स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था।

उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार शाम 4.30 बजे मुंबई के पवन हंस स्थित हिंदू श्मशान भूमि में किया गया, जहां परिवार, करीबी मित्रों और फिल्म-टीवी जगत की कई हस्तियां मौजूद रहीं।

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● ‘रामायण’ की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाला नाम

आनंद सागर उस सृजनात्मक परंपरा के प्रमुख स्तंभ थे जिसने भारतीय टेलीविजन इतिहास को नई दिशा दी। 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाली ऐतिहासिक धारावाहिक रामायण के निर्माण और रचनात्मक दृष्टि को आगे बढ़ाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। यह धारावाहिक केवल एक शो नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आंदोलन बन गया था, जिसने रविवार की सुबह को राष्ट्रव्यापी अनुष्ठान में बदल दिया था।

सागर परिवार की प्रोडक्शन कंपनी Sagar Arts के माध्यम से आनंद सागर ने पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया। उन्होंने भारतीय मिथकों को आधुनिक तकनीक और प्रस्तुति के साथ नई पीढ़ी के सामने रखने की कोशिश की।

● लंबे समय से चल रही थी बीमारी

परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार आनंद सागर पिछले 10 से 12 वर्षों से पार्किंसंस रोग से पीड़ित थे। उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ती गईं। बीते कुछ महीनों में उनकी स्थिति और नाजुक हो गई थी। अंततः 13 फरवरी को उन्होंने अंतिम सांस ली।

टीवी और सिनेमा जगत में शोक

उनके निधन की खबर सामने आते ही टीवी और फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई कलाकारों और निर्माताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उन्होंने भारतीय टेलीविजन को भक्ति, भव्यता और तकनीकी दृष्टि से नई पहचान दी। सोशल मीडिया पर भी दर्शकों ने ‘रामायण’ से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं।

● एक युग का अवसान

आनंद सागर का जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि भारतीय टेलीविजन के स्वर्णिम अध्याय से जुड़े एक महत्वपूर्ण सूत्र का टूटना है। जिस परिवार ने भारतीय घरों में आध्यात्मिक कथाओं को जीवंत किया, उसकी दूसरी पीढ़ी का यह स्तंभ अब इतिहास का हिस्सा बन गया है।

उनकी विरासत उन कहानियों में जीवित रहेगी, जिन्होंने पीढ़ियों को जोड़ा और भारतीय संस्कृति की जड़ों को स्क्रीन पर जीवंत किया।